{"_id":"64309868ffbf2e17c306bd24","slug":"recognition-of-schools-forcing-books-and-uniforms-to-be-purchased-from-a-shop-will-be-canceled-karnal-news-c-18-knl1031-84950-2023-04-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: एक दुकान से किताबें-वर्दी खरीद को मजबूर करने वाले स्कूलों की मान्यता होगी रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: एक दुकान से किताबें-वर्दी खरीद को मजबूर करने वाले स्कूलों की मान्यता होगी रद्द
विज्ञापन
करनाल। निजी स्कूलों की मनमानी और किताबों एवं वर्दी के नाम पर अभिभावकों को परेशान करने पर अब शिक्षा निदेशालय सख्त हो गया है। निदेशालय की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि अब ऐसे सभी स्कूलों की मान्यता रद्द होगी, जिन्होंने एक ही दुकान से किताबें, स्टेशनरी और वर्दी खरीदने के लिए मजबूर किया हैं। इन स्कूलों को डी-बार करते हुए मान्यता तक रद्द की जाएगी।
जानकारी के अनुसार करनाल में ज्यादातर स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाई हैं। निजी स्कूलाें द्वारा प्रकाशकों से प्रति सेट से लेकर पूरे स्कूल की किताबों पर 60 प्रतिशत तक कमीशन भी वसूला गया है। वहीं अभिभावकों को बुलाकर फीस और किताबों तक का पूरा पैसा भी लिया जा रहा था। इस संबंध में जब 26 मार्च को अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया तो किताबों की बिक्री स्कूलों से बंद हो गईं। कार्रवाई से बचने के लिए स्कूलों ने परिसर के नजदीक टेंट लगवाकर किताबें बेचीं तो किसी ने एक डीलर की दुकान ही तय कर दी। स्कूल की बिना नाम वाली पर्ची दिखाने के बाद अभिभावकों को पहले से तैयार सेट हाथ में थमाए गए। बिल पर भी दुकानदार का नाम नहीं था और किताबों के पैसे भी नकद में लिए गए। इस मुद्दे को भी अमर उजाला ने पांच अप्रैल के अंक में प्रमुखता से उठाया। जिस पर निदेशक सेकेंडरी शिक्षा पीएस के उप अधीक्षक ने संज्ञान लेते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश हैं। इससे पहले करनाल के जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी भी इस मामले में 375 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर चुके हैं। ब्यूरो
नर्सरी का 1300 तो पांचवीं का 4620 रुपये का सेट
सबसे सस्ता नर्सरी का सेट 1300 रुपये और पांचवीं का सेट 4620 रुपये में छूट देने के बाद दिया जा रहा है। करीब 10 से 14 किताबों के इन सेट में एक भी किताब एनसीईआरटी की नहीं है। नोट बुक का सेट अलग से इन्हीं दुकानों पर बेचा जा रहा है। कक्षा के अनुसार रेट की बात करें तो एलकेजी का 2000 रुपये, यूकेजी का 2600, पहली का 4350, दूसरी का 4500, तीसरी का 3753 और चौथी कक्षा का 3850 रुपये का किताबों का सेट दिया जा रहा है।
विज्ञापन
किताबें नहीं लीं तो कक्षा से बाहर करने का डर
स्कूलों की ओर से विद्यार्थियों को जल्द किताबें लेने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। बाकायदा अभिभावकों को व्हॉट्सएप के माध्यम से सूचित भी किया जा रहा है। इसके पीछे दावा यह किया जा रहा है कि सोमवार से उन्हें पढ़ाई रेगुलर करनी है पर बुक सेलरों की ओर से स्कूलों संचालकों से शीघ्र स्टॉक निकलवाने का आग्रह किया गया है। ऐसे में जो विद्यार्थी तय समय तक किताबें नहीं लेंगे, उन्हें कक्षाओं में न बैठाने का भी डर दिखाया जा रहा है।
किताब का एमआरपी भी अपनी मनमर्जी का
प्रति सेट 500 रुपये से लेकर पूरे स्कूल की किताबें लगवाने पर निजी प्रकाशकों की ओर से 60 प्रतिशत तक कमीशन दिया जा रहा है। एक बुक डीलर के अनुसार, किताब का एमआरपी भी मनमर्जी से तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर निजी प्रकाशक की नर्सरी की एक किताब पर 220 रुपये का प्रिंट हैं। 50 प्रतिशत छूट पर 110 रुपये में ग्राहक को बेच सकते हैं जबकि दुकानदार इस पर महज 10 प्रतिशत तक ही छूट दे रहे हैं। डीलर ने स्कूल को किताब को लगवाने के लिए पैसा दिया है। 10 प्रतिशत छूट के बाद 220 रुपये एमआरपी वाली किताब 198 रुपये में दी जा रही है। इसी तरह नर्सरी की पांच किताबों के सेट की कीमत 300 या 400 होनी चाहिए, जिसे 1300 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार करनाल में ज्यादातर स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाई हैं। निजी स्कूलाें द्वारा प्रकाशकों से प्रति सेट से लेकर पूरे स्कूल की किताबों पर 60 प्रतिशत तक कमीशन भी वसूला गया है। वहीं अभिभावकों को बुलाकर फीस और किताबों तक का पूरा पैसा भी लिया जा रहा था। इस संबंध में जब 26 मार्च को अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया तो किताबों की बिक्री स्कूलों से बंद हो गईं। कार्रवाई से बचने के लिए स्कूलों ने परिसर के नजदीक टेंट लगवाकर किताबें बेचीं तो किसी ने एक डीलर की दुकान ही तय कर दी। स्कूल की बिना नाम वाली पर्ची दिखाने के बाद अभिभावकों को पहले से तैयार सेट हाथ में थमाए गए। बिल पर भी दुकानदार का नाम नहीं था और किताबों के पैसे भी नकद में लिए गए। इस मुद्दे को भी अमर उजाला ने पांच अप्रैल के अंक में प्रमुखता से उठाया। जिस पर निदेशक सेकेंडरी शिक्षा पीएस के उप अधीक्षक ने संज्ञान लेते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश हैं। इससे पहले करनाल के जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी भी इस मामले में 375 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर चुके हैं। ब्यूरो
विज्ञापन
नर्सरी का 1300 तो पांचवीं का 4620 रुपये का सेट
सबसे सस्ता नर्सरी का सेट 1300 रुपये और पांचवीं का सेट 4620 रुपये में छूट देने के बाद दिया जा रहा है। करीब 10 से 14 किताबों के इन सेट में एक भी किताब एनसीईआरटी की नहीं है। नोट बुक का सेट अलग से इन्हीं दुकानों पर बेचा जा रहा है। कक्षा के अनुसार रेट की बात करें तो एलकेजी का 2000 रुपये, यूकेजी का 2600, पहली का 4350, दूसरी का 4500, तीसरी का 3753 और चौथी कक्षा का 3850 रुपये का किताबों का सेट दिया जा रहा है।
विज्ञापन
किताबें नहीं लीं तो कक्षा से बाहर करने का डर
स्कूलों की ओर से विद्यार्थियों को जल्द किताबें लेने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। बाकायदा अभिभावकों को व्हॉट्सएप के माध्यम से सूचित भी किया जा रहा है। इसके पीछे दावा यह किया जा रहा है कि सोमवार से उन्हें पढ़ाई रेगुलर करनी है पर बुक सेलरों की ओर से स्कूलों संचालकों से शीघ्र स्टॉक निकलवाने का आग्रह किया गया है। ऐसे में जो विद्यार्थी तय समय तक किताबें नहीं लेंगे, उन्हें कक्षाओं में न बैठाने का भी डर दिखाया जा रहा है।
किताब का एमआरपी भी अपनी मनमर्जी का
प्रति सेट 500 रुपये से लेकर पूरे स्कूल की किताबें लगवाने पर निजी प्रकाशकों की ओर से 60 प्रतिशत तक कमीशन दिया जा रहा है। एक बुक डीलर के अनुसार, किताब का एमआरपी भी मनमर्जी से तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर निजी प्रकाशक की नर्सरी की एक किताब पर 220 रुपये का प्रिंट हैं। 50 प्रतिशत छूट पर 110 रुपये में ग्राहक को बेच सकते हैं जबकि दुकानदार इस पर महज 10 प्रतिशत तक ही छूट दे रहे हैं। डीलर ने स्कूल को किताब को लगवाने के लिए पैसा दिया है। 10 प्रतिशत छूट के बाद 220 रुपये एमआरपी वाली किताब 198 रुपये में दी जा रही है। इसी तरह नर्सरी की पांच किताबों के सेट की कीमत 300 या 400 होनी चाहिए, जिसे 1300 रुपये तक में बेचा जा रहा है।