फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Rar over 50 acres of corporation's land, municipal commissioner-mayor face to face

निगम की 50 एकड़ भूमि पर रार, निगमायुक्त-महापौर आमने सामने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2022 02:30 AM IST
विज्ञापन
Rar over 50 acres of corporation's land, municipal commissioner-mayor face to face
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

करनाल। सरकारी भूमि पर धान की फसल लगाने से मना करने के बाद नगर निगम की ऊंचानी गांव स्थित खाली रह गई 50 एकड़ जमीन को लेकर निगमायुक्त और महापौर आमने-सामने आ गए हैं। निगमायुक्त का कहना है कि निगम की आय बढ़ाने के लिए भूमि को वन विभाग को देने की तैयारी की गई है, इस संबंध में वन विभाग से सुझाव मांगा गया है। वहीं महापौर और पार्षदों ने बिना हाउस की बैठक में पास कराए भूमि को किसी अन्य विभाग को देने को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि चाहे इसके लिए आंदोलन ही क्यों न करना पड़े, निगम की जमीन को किसी और विभाग को नहीं देने देंगे। भूमि में यदि बाग लगाना है तो निगम ही लगाएगा।
नगर निगम करनाल की 50 एकड़ कृषि योग्य भूमि हर साल फसली नीलामी पर दी जाती थी, लेकिन इस बार सरकार ने धान लगाने से मना कर दिया तो जमीन खाली रह गई है। निगमायुक्त नरेश नरवाल का कहना है कि जमीन खाली रहने से निगम को नुकसान होगा, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों से प्राप्त फलों की ब्रिकी से आय बढ़ाने के लिए, नगर निगम की ओर से वन विभाग को तीन प्लाट वनीकरण के लिए देने की तैयारी की है। इस भूमि की सात बार बोली करवाई गई, लेकिन किसी भी बोलीदाता द्वारा उक्त भूमि को पट्टे पर लेने के लिए बोली में भाग नहीं लिया गया। इसलिए इसे वर्ष 2022-23 व 2023-24 के लिए वन विभाग को पौधारोपण के लिए देने की तैयारी की गई है। वन विभाग से सुझाव मांगा गया है कि इस पर क्या किया जा सकता है, ताकि निगम की आय बढ़े। निगमायुक्त ने बताया कि भूमि पर वन विभाग फलदार व सफेदा जैसे क्लोन के जो पौधे लगाएगा, उनसे प्राप्त होने वाले फल या पौधों से नगर निगम को आय होगी। पौधे लगाने व देखभाल का खर्च वन विभाग द्वारा स्वयं या किसी एजेंसी के माध्यम से वहन किया जाएगा, लेकिन जमीन का मालिक नगर निगम ही रहेगा। वन विभाग, लगाए गए पौधों को तीन वर्ष उपरांत नगर निगम को सौंप देगा।
विज्ञापन

इधर, महापौर रेनू बाला गुप्ता का कहना है कि कोई बोली लगाने इसलिए नहीं आया, क्योंकि एक सीजन खाली है, दूसरे सीजन में गेहूं लगाया जा सकेगा, लेकिन निगम ने बोली की धनराशि दोनों सीजन की जोड़कर रखी है, जो अधिक है। वैसे भी निगम की कोई भी संपत्ति किसी को देने का अधिकार सदन को है। पहले हाउस की मीटिंग में प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए था। बोर्ड तय करेगा कि जमीन का क्या किया जाए। यदि उसमें पौधे ही लगाने हैं, ये पौधे निगम लगा सकता है। निगम के पास सारे संसाधन मौजूद हैं, इसके लिए जमीन किसी अन्य विभाग को देने के जरूरत नहीं है। सभी पार्षदों ने तय किया है कि जमीन को किसी को भी नहीं देने देंगे, इसके लिए भले ही आंदोलन ही क्यों न करना पड़े। महापौर ने कहा कि निगमायुक्त हो या कोई अन्य अधिकारी, मनमानी को चलने नहीं दिया जाएगा। ये जमीन हाईवे पर है, करोड़ों की कीमत की है। इसे निगम भविष्य में किसी विकास कार्य के लिए प्रयोग कर सकता है। किसी विभाग को जमीन देने के बाद वापस लेना मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed