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Karnal News: गुरु ब्रह्मानंद की मूर्ति स्थापना कर किया पचरंगा झंडे का उच्चारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Dec 2024 02:05 AM IST
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Pronounced Pacharanga flag after installing the statue of Guru Brahmanand
24 दिसंबर को मनाया जाएगा गुरु ब्रह्मानंद का 116वां जन्मदिन
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। पार्श्वनाथ सिटी में शनिवार को गुरु ब्रह्मानंद की मूर्ति की स्थापना कर पचरंगा झंडा का उच्चारण किया गया। इसके बाद हवन कर भंडारा लगाया गया। हवन में सभी श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। सुरेंद्र नंबरदार ने कहा सतगुरु ब्रह्मानंद 36 बिरादरी के गुरु थे। वे ओम को मानने वाले थे। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर को गुरु ब्रह्मानंद के 116वें जन्म दिन के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जगतगुरु ब्रह्मानंद का बचपन का नाम छोटाराम था। मात्र नौ वर्ष की उम्र में माता का निधन हो गया। तब गुरु 11 वर्ष के थे तो उनके पिता स्वर्ग सिधार गए। इसके बाद 12 वर्ष की उम्र में गुरु ज्ञान की खोज में गुरुकुल चले गए। जहां उन्होंने हिंदी और संस्कृत का गहन अध्ययन किया। गुरु जिस पुस्तक को एक बार पढ़ लेते थे उसे कभी नहीं भूलते थे। उनके सच्चे आचरण को देखकर स्वामी भीष्म ने उनका नाम सत्यदेव रखा। जगतगुरु ब्रह्मानंद हरिद्वार से परे सप्त सरोवर के जंगलों में तपस्या के लिए चले गए। जहां गुरुजी ने अपना शरीर छोड़ने का फैसला किया और ऐसा करते समय तीन देवियां प्रकट हुई और स्वामी को पचरंगा झंडा प्रदान किया।
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ब्रह्म आनंद में लीन रहने के कारण देवियों ने उनका नाम ब्रह्मानंद रखा। गुरु ने पंचरंगा ध्वज के पांच नियम बनाए और यहां लौटकर गुरु ब्रह्मानंद ने ओमपुरा नामक गुरुकुल की स्थापना की। कुछ वर्षों के बाद गुरुजी वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए निकल पड़े। लक्ष्मी गुरु के पीछे-पीछे चलती थी लेकिन वे कभी पैसे को छूते तक नही थे। गुरु ने अपना पूरा जीवन निर्दोष और गरीब लोगों की सेवा में बिताया। जब महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी बंद था और शिक्षा तो दूर की बात थी, उस समय गुरु ने महिलाओं को जीवन में मानव कल्याण के लिए वैदिक शिक्षा और हवन का विचार करना सिखाया। इस अवसर पर सोहनलाल, जितेंद्र, महेंद्र सिंह, राजपाल, सुरेंद्र नंबरदार, राजपाल, ऋषि पाल, रामकिशन ,कुलदीप कल्याण,भीम सिंह चौहान, जितेंद्र सिंह व अन्य उपस्थित रहे।
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