हरियाणा के होनहारों ने साझा किए किस्से: छात्र बोले- कोचिंग सेंटरों की ओर नहीं देखा, मेहनत करके पाई सफलता
हरियाणा में द्वितीय रही जींद की पल्लवी का भारतीय सेना में फ्लाइंग अफसर बनने का सपना है। सेना में सूबेदार चाचा सुभाष से उन्हें यह प्रेरणा मिली है। इसके लिए उन्होंने 11वीं नॉन मेडिकल में दाखिला लेते हुए तैयारी भी शुरू कर दी है।
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जब लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ते हैं तो सफलता जरूर मिलती है, बशर्तें सही राह का पता हो। यह कहना है हरियाणा बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में टॉप-3 स्थानों पर आने वाले होनहारों का। अपनी सफलता के किस्से बताते हुए विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने तनाव को हावी नहीं होने दिया, न ही समाज की प्रतिस्पर्धा पर ध्यान दिया। बस मेहनत करते हुए आगे बढ़े।
इसमें भी बड़ी बात यह है कि इन टॉपर विद्यार्थियों ने कभी कोचिंग सेंटरों की ओर नहीं देखा। स्कूल की पढ़ाई के अलावा सेल्फ स्टडी करते हुए विषयों पर फोकस रखा। अब परिणाम सभी के सामने है। उन्होंने सभी को लक्ष्य निर्धारित करते हुए मेहनत करने की प्रेरणा दी। अमर उजाला के मंच पर पहली बार मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने के पल को भी उन्होंने यादगार बताया। उत्साहित कई मेधावियों ने अपने सम्मान को अभिभावकों और गुरुजनों को भी समर्पित किया।
सूबेदार चाचा का जोश बढ़ा रहा सेना की ओर कदम
10वीं कक्षा में प्रदेश में द्वितीय रही जींद की पल्लवी का भारतीय सेना में फ्लाइंग अफसर बनने का सपना है। सेना में सूबेदार चाचा सुभाष से उन्हें यह प्रेरणा मिली है। इसके लिए उन्होंने 11वीं नॉन मेडिकल में दाखिला लेते हुए तैयारी भी शुरू कर दी है। किसान पिता की इस बेटी ने अपने स्कूल के हॉस्टल में रहते हुए दसवीं की पढ़ाई की। इस दौरान कोई ट्यूशन नहीं लगाया। अपने दम पर पढ़ाई करते हुए छात्रा के 498 अंक आने पर अमर उजाला के मंच पर उसे पहली बार सीएम के हाथों सम्मान पाने पर उत्साहित दिखाई दी। अंक : 498/500, स्थान : प्रदेश में द्वितीय, नाम : पल्लवी, कक्षा : 10वीं
किसान पिता के साथ खेत में भी बंटाया हाथ
जींद की श्वेता 498 अंक के साथ प्रदेश कला संकाय में प्रथम है। छात्रा के पिता सुनील कुमार किसान हैं और मां नरेश कुमारी गृहिणी। श्वेता ने 12वीं की पढ़ाई के दौरान भी पिता के साथ खेत में हाथ बंटाया। उनके अभिभावकों को भी बेटी पर नाज है। छात्रा का कहना है कि दसवीं में 95 प्रतिशत अंक आने से वे टॉप-3 में आने से रह गई थी। इस बार बिना कोचिंग मेहनत करके तीन प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी के साथ सफलता पाई है। अब यूपीएससी की भी तैयारी कर रही हैं। आईएएस बनकर ग्रामीण स्तर की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना उद्देश्य है। अंक : 498/500, स्थान : प्रदेश में प्रथम, नाम : श्वेता , कक्षा : 12वीं, कला।
बड़ी बहन ने पढ़ाई अंग्रेजी, यू-ट्यूब से मिली पाठ्यसामग्री
करनाल के अराईंपुरा निवासी मोहित ने 495 अंक से कला संकाय में प्रदेश में तृतीय स्थान प्राप्त किया। पंप कंपनी में मजदूरी करने वाले जिले सिंह के बेटे ने कभी ट्यूशन नहीं रखी। बड़ी बहन सेजल और कोमल ने अंग्रेजी विषय में मदद की और अन्य विषयों के लिए बेहतर पाठ्यसामग्री उन्हें यू-ट्यूब पर मिली, जहां से लेक्चर सुनकर उन्होंने नोट्स तैयार किए और करनाल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मोहित का आईएएस अधिकारी बनने का सपना है। इसके लिए उन्होंने तैयारी एक साल पहले शुरू कर दी थी, ऑनलाइन इसकी पढ़ाई भी कर रहे हैं। अंक : 495/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : मोहित, कक्षा : 12वीं, कला।
पढ़ाई के तनाव ने किया बीमार फिर भी लहराया परचम
पानीपत के हेमंत ने कॉमर्स में 488 अंक के साथ प्रदेश में तीसरा स्थान पाया। कपड़े की फेरी लगाने वाले नवीन वर्मा के इस बेटे को पढ़ाई के तनाव ने वर्ष में कई बार बीमार भी किया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मेहनत को बरकरार रखा। दसवीं कक्षा में तो जिले में तीसरे स्थान पर थे। अब 12वीं में प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंचे हैं। छात्र का एकाउंट्स विषय का शिक्षक बनने का सपना है। इस विषय में उसके 100 अंक हैं। हेमंत का कहना है कि पढ़ाने के तरीकों में सुधार हो तो गणित, एकाउंट्स और साइंस जैसे मुश्किल लगने वाले विषय भी आसान बनते हैं। अंक : 488/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : हेमंत, कक्षा : 12वीं, कॉमर्स।
सीएम के हाथों सम्मान की दसवीं की टीस अब हुई पूरी
पानीपत की चुलकाना निवासी तमन्ना 488 अंक से विज्ञान संकाय में प्रदेश में द्वितीय है। बिजली निगम के लाइनमैन पिता राजबीर सिंह की बेटी का कॉलेज प्रोफेसर बनने का सपना है। उनका कहना है कि दसवीं के परीक्षा परिणाम में वे जिले में चौथे नंबर पर थी, इस कारण वे सम्मानित नहीं हो पाई थी। उनकी दो साल पुरानी टीस अब अमर उजाला के मंच पर सीएम के हाथों सम्मानित होने पर पूरी हुई। छात्रा के फिजिक्स में 100 अंक हैं। छात्रा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता और पिता दोनों को दिया। छात्रा ने बताया कि उन्होंने सेल्फ स्टडी करके सफलता पाई है। अंक : 488/500, स्थान : प्रदेश में द्वितीय, नाम : तमन्ना, कक्षा : 12वीं, विज्ञान।
मां ने चोटिल होने पर भी पढ़ाई नहीं होने दी बाधित
कैथल की मन्नत विज्ञान संकाय में 487 अंक के साथ प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। उसका इंजीनियर बनने का सपना है। इस साल कहीं दाखिला न लेकर वह जेईई की तैयारी ही कर रही है। वीडियो एडिटर सुरेंद्र पाल और गृहिणी रजनी की बेटी शाम से रात 12 बजे तक और सुबह चार बजे से छह बजे तक पढ़ती थी। मन्नत ने बताया कि सत्र की शुरुआत में हादसा होने पर उनकी मां के पैर में चोट लग गई थी। इस दौरान एक माह तक बेडरेस्ट पर रहीं। ऐसे समय में भी उनकी माता ने घर के काम के लिए उनकी पढ़ाई के टाइमटेबल को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने सीएम के हाथों मिले पदक को अपनी मां को समर्पित किया। अंक : 487/500, स्थान : प्रदेश में तृतीय, नाम : मन्नत, कक्षा : 12वीं, विज्ञान।