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Karnal News: अधिकतर खेतों में पीआर-26 धान, 15 से खरीद की मांग
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- पिछले साल पीआर-14 में बीमारी लगने के कारण किसानों ने बदली धान की किस्म
- धान की ये किस्म 90 दिन में पक जाती है, इस कारण जल्द मंडी में पहुंचने की संभावना
- हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने सरकार से की 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग
- कहा, धान की नमी के मानक में भी कम से कम दो से तीन प्रतिशत छूट दी जाए
देव शर्मा
करनाल। हरियाणा सरकार ने धान की खरीद की तैयारी शुरू कर दी हैं, लेकिन खरीद एक अक्तूबर से शुरू करने की योजना हैं, जबकि इस बार किसानों ने धान की किस्म बदली है। इस बार करीब 70 से 80 प्रतिशत खेतों में पीआर-26 किस्म का सामान्य धान है, जो एक पखवाड़ा में जल्द पक सकता है। इसलिए हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने राज्य में इस बार धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू कराने की मांग की है, क्योंकि इस किस्म का धान मंडियों में 15 सितंबर से आना शुरू हो सकता है, लेकिन सरकारी खरीद नहीं होने पर किसानों को धान औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा। जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
धान की फसल को लेकर इस बार परिस्थितियां बदली हैं। किसानों के 80 प्रतिशत खेतों में पीआर-26 प्रजाति का धान होने के कारण इसकी कटाई भी 15 सितंबर से पहले शुरू हो सकती है। अहम बात ये है कि सीधे खेतों से कटकर मंडियों में पहुंचने वाले धान में नमी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए धान को अधिक समय तक रोका नहीं जा सकता है। तीन-चार दिन के बाद ही धान का रंग बदलना शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि मंडियों में धान की खरीद शुरू नहीं होती है, तो किसानों को मजबूरन अपनी फसल को औने-पौने दाम पर राइस मिलरों, चावल कारोबारियों आदि निजी खरीदारों को बेचना होगा। एक साथ मंडी में अधिक धान आने, शीघ्र बेचने की मजबूरी का फायदा भी निजी खरीदार उठाएंगे और सस्ते दामों पर धान खरीदेंगे।
इसलिए बदली धान की किस्म
काछवा के किसान सुरिंद्र ने बताया कि सामान्य धान की किस्म पीआर-14 तो लंबे समय से लगाते चले आ रहे हैं। पिछले साल भी करीब 90 प्रतिशत किसानों ने यही किस्म खेतों में लगाई थी, क्योंकि पीआर किस्म को ही सरकार खरीदती है, लेकिन पिछले साल इस किस्म में बीमारी लग गई थी। खेतों में धान के पौधों में बौनापन देखा गया था। खेतों में पौधे छोटे-बड़े हो जाने के कारण फसल की पैदावार भी प्रभावित हुई थी और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई थी।
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यही कारण है कि किसानों ने इस बार पीआर-26 किस्म को खेतों में लगाया है। करनाल सहित राज्य के अधिकांश जिलों में 80 प्रतिशत किसानों ने इसी किस्म की रोपाई की थी। ये किस्म 90 दिन में पकने वाली किस्म है। अगस्त में भले ही कम बारिश हुई, लेकिन जून, जुलाई में बारिश का औसत ठीक रहा है। इसलिए धान की फसल की कटाई 10 से 15 सितंबर तक शुरू हो सकती है और मंडियों में 15 सितंबर से धान की आवक शुरू हो सकती है।
ये बात सही है कि इस बार अधिकतर किसानों ने पीआर-26 किस्म का धान ही लगाया है, क्योंकि पीआर-14 में पिछले साल बीमारी लग गई थी। इसके पकाव की तिथि 10 से 15 सितंबर है। इसलिए हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर मांग की गई कि राज्य में इस बार धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू कराई जानी चाहिए। इसके साथ-साथ धान में नमी की अधिकता हो सकती है, इसलिए सरकार को धान की नमी का मानक 17 से बढ़ाकर 19 से 20 प्रतिशत तक किया जाना चाहिए। अन्यथा पहले ही बाढ़ आदि से किसान परेशान हैं, धान समय से नहीं बिका तो फिर उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही आढ़तियों व श्रमिकों को भी नुकसान होगा।
- रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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- धान की ये किस्म 90 दिन में पक जाती है, इस कारण जल्द मंडी में पहुंचने की संभावना
- हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने सरकार से की 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग
- कहा, धान की नमी के मानक में भी कम से कम दो से तीन प्रतिशत छूट दी जाए
देव शर्मा
करनाल। हरियाणा सरकार ने धान की खरीद की तैयारी शुरू कर दी हैं, लेकिन खरीद एक अक्तूबर से शुरू करने की योजना हैं, जबकि इस बार किसानों ने धान की किस्म बदली है। इस बार करीब 70 से 80 प्रतिशत खेतों में पीआर-26 किस्म का सामान्य धान है, जो एक पखवाड़ा में जल्द पक सकता है। इसलिए हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने राज्य में इस बार धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू कराने की मांग की है, क्योंकि इस किस्म का धान मंडियों में 15 सितंबर से आना शुरू हो सकता है, लेकिन सरकारी खरीद नहीं होने पर किसानों को धान औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा। जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
धान की फसल को लेकर इस बार परिस्थितियां बदली हैं। किसानों के 80 प्रतिशत खेतों में पीआर-26 प्रजाति का धान होने के कारण इसकी कटाई भी 15 सितंबर से पहले शुरू हो सकती है। अहम बात ये है कि सीधे खेतों से कटकर मंडियों में पहुंचने वाले धान में नमी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए धान को अधिक समय तक रोका नहीं जा सकता है। तीन-चार दिन के बाद ही धान का रंग बदलना शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि मंडियों में धान की खरीद शुरू नहीं होती है, तो किसानों को मजबूरन अपनी फसल को औने-पौने दाम पर राइस मिलरों, चावल कारोबारियों आदि निजी खरीदारों को बेचना होगा। एक साथ मंडी में अधिक धान आने, शीघ्र बेचने की मजबूरी का फायदा भी निजी खरीदार उठाएंगे और सस्ते दामों पर धान खरीदेंगे।
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इसलिए बदली धान की किस्म
काछवा के किसान सुरिंद्र ने बताया कि सामान्य धान की किस्म पीआर-14 तो लंबे समय से लगाते चले आ रहे हैं। पिछले साल भी करीब 90 प्रतिशत किसानों ने यही किस्म खेतों में लगाई थी, क्योंकि पीआर किस्म को ही सरकार खरीदती है, लेकिन पिछले साल इस किस्म में बीमारी लग गई थी। खेतों में धान के पौधों में बौनापन देखा गया था। खेतों में पौधे छोटे-बड़े हो जाने के कारण फसल की पैदावार भी प्रभावित हुई थी और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई थी।
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यही कारण है कि किसानों ने इस बार पीआर-26 किस्म को खेतों में लगाया है। करनाल सहित राज्य के अधिकांश जिलों में 80 प्रतिशत किसानों ने इसी किस्म की रोपाई की थी। ये किस्म 90 दिन में पकने वाली किस्म है। अगस्त में भले ही कम बारिश हुई, लेकिन जून, जुलाई में बारिश का औसत ठीक रहा है। इसलिए धान की फसल की कटाई 10 से 15 सितंबर तक शुरू हो सकती है और मंडियों में 15 सितंबर से धान की आवक शुरू हो सकती है।
ये बात सही है कि इस बार अधिकतर किसानों ने पीआर-26 किस्म का धान ही लगाया है, क्योंकि पीआर-14 में पिछले साल बीमारी लग गई थी। इसके पकाव की तिथि 10 से 15 सितंबर है। इसलिए हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर मांग की गई कि राज्य में इस बार धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू कराई जानी चाहिए। इसके साथ-साथ धान में नमी की अधिकता हो सकती है, इसलिए सरकार को धान की नमी का मानक 17 से बढ़ाकर 19 से 20 प्रतिशत तक किया जाना चाहिए। अन्यथा पहले ही बाढ़ आदि से किसान परेशान हैं, धान समय से नहीं बिका तो फिर उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही आढ़तियों व श्रमिकों को भी नुकसान होगा।
- रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन