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Karnal News: 16 साल से नहीं दिया दुकान का कब्जा, अब 72 हजार रुपये हर्जाना भी देना होगा

Thu, 01 Jan 2026 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 01 Jan 2026 02:06 AM IST
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Possession of the shop was not given for 16 years, now a fine of Rs 72 thousand will also have to be paid.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मैसर्स सुपर मॉल प्राइवेट लिमिटेड और स्टार सर्विसेज को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। दोनों कंपनियों ने सिरसा निवासी उपभोक्ता प्रेमलता से 13 लाख रुपये की राशि लेकर भी सुपर मॉल में दुकान का कब्जा नहीं दिया। अब आयोग ने उपभोक्ता को कब्जा देने के साथ-साथ 72 हजार रुपये का जुर्माना देने के आदेश दिए हैं। इसमें 50 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न और 22 हजार रुपये मुकद्दमेबाजी खर्च के शामिल हैं।

सिरसा निवासी शिकायतकर्ता प्रेमलता बिश्नोई ने बताया कि वर्ष 2008 में उन्होंने अपनी आजीविका के लिए करनाल के सेक्टर-12 स्थित सुपर मॉल में एक कॉमर्शियल यूनिट (दुकान संख्या FF-18) खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने 13 लाख रुपये की पूरी राशि का भुगतान उसी समय कर दिया था। लेकिन उन्हें भौतिक कब्जा नहीं दिया गया। 15 जनवरी, 2024 को वह अपने पति के साथ सुपर मॉल के मैनेजर से मिलीं और उन्हें जगह दिए जाहे की मांग की थी। इस पर मॉल प्रबंधन ने उन्हें रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये के दो डिमांड नोटिस थमा दिए।
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एक नोटिस में 59 लाख 34 हजार 837 रुपये और दूसरे नोटिस में 50 लाख 71 हजार 916 रुपये बकाया दिखाया गया था। हालांकि उन्हें अभी तक यहां पर कब्जा भी नहीं दिया गया था। उन्होंने इसकी शिकायत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष रखी। उपभोक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि 16 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें दुकान का कब्जा नहीं दिया गया और निर्माण कार्य भी अधूरा है। अदालत में मॉल प्रबंधन ने अपना तर्क दिया कि कब्जा 2008 में ही दे दिया गया था और शिकायतकर्ता ''''उपभोक्ता'''' की श्रेणी में नहीं आती हैं। इसके साथ ही मामले को समय सीमा से बाहर बताया गया था।
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भौतिक कब्जे से पहले मेंटेनेंस चार्ज मांगना गलत
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने मॉल के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता प्रेमलता ने अपनी आजीविका कमाने के लिए दुकान खरीदी थी, इसलिए वह एक ''''उपभोक्ता'''' हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक दुकान का भौतिक कब्जा नहीं सौंपा गया, तब तक ''''कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्जेज'''' मांगना पूरी तरह अवैध और अनुचित है। आयोग ने विपक्षी पक्ष यानी सुपर मॉल और स्टार सर्विसेज को दुकान का काम पूरा कर कब्जा सौंपने का निर्देश दिया। इसके अलावा आयोग ने आदेश दिए कि विपक्षी पक्ष उपभोक्ता को बिना मेंटेनेंस चार्ज लिए दुकान का भौतिक कब्जा सौंपे। उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 22 हजार रुपये देने के आदेश जारी किए। इसके साथ ही 45 दिनों के भीतर इन आदेशों की पालना किए जाने के आदेश दिए।
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