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Karnal News: भांजा और भतीजा बनकर चार लोगों से 21.25 रुपये ठगे
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- किसी ने वीजा रद्द होने के नाम पर डराया तो किसी ने इलाज के बहाने मांग लिए रुपये
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। साइबर ठग लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ये कभी विदेश में रहने वाले रिश्तेदार बनकर रुपये मांग रहे हैं तो कभी परिचित बताकर इलाज के नाम पर रुपये ऐंठ रहे हैं। अब चार ऐसे ही नए मामले सामने आए हैं जिनमें भतीजा और भांजा बनकर ठगों ने 21.25 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ितों ने ठगी का पता चलने पर साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी है। थाना साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
केस-1
कहा- वीजा रद्द हुआ तो 10 की होगी जेल
विकास नगर के राकेश कुमार ने बताया कि उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया, जिसमें आरोपी ने खुद को उनका भांजा अंकित बनकर बात की। आरोपी ने कहा कि उसका वीजा रद्द होने वाला है और अगर तीन लाख रुपये तुरंत नहीं दिए तो उसे 10 साल की जेल हो सकती है। राकेश कुमार ने बताए गए बैंक खाते में गूगल पे और आईएमपीएस के जरिये 1,43,500 रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्त बंसीलाल के पीएनबी खाते से एक लाख रुपये और फिर ऊषा रानी के नाम पर 29 हजार रुपये ट्रांसफर किए। सेक्टर-12 की बैंक मशीन से 27,500 रुपये नकद जमा किए। अगले दिन भांजे से बात की तो पता चला कि वह मैसेज उसका नहीं था। तब पता चला कि उनके साथ तीन लाख रुपये की ठगी हो चुकी है।
केस-2
भरोसा जताने के लिए भेजी जमा नकदी की रसीद
काछवा गांव की मूर्ति देवी ने बताया कि वह जिला सहकारी बैंक में कार्यरत हैं। 10 मार्च को उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसमें बताया गया कि एक जानकार की पत्नी की सर्जरी होनी है और तत्काल रुपयों की जरूरत है। आरोपी ने भरोसे में लेने के लिए रुपयों की जमा रसीद भी व्हाट्सएप पर भेजी और कहा कि वह अगले दिन रुपये उनके खाते में वापस कर देगा। महिला ने झांसे में आकर उनके खाते में दो लाख रुपये भेज दिए। जब रुपये वापस नहीं आए तो उन्होंने 11 मार्च की शाम को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि हाल में उसी नंबर से दोबारा कॉल आई और 10 हजार और मांगे गए।
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केस-3
अच्छी कमाई का दिया झांसा
सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग के नाम पर रोहित कुमार निवासी स्प्रिंग वैली से 10.12 लाख रुपये की ठगी की गई। रोहित ने बताया कि 17 मार्च को फेसबुक पर एक लिंक के जरिये वह एक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ गया। वहां से उसे एक एप डाउनलोड करने को कहा गया। उसने सात बार में 10,12,543.60 रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए। इसमें इसराफिल एंटरप्राइज, लक्ष्मी एंटरप्राइज, महालक्ष्मी एंटरप्राइज, जनकी प्रधान, एएसके इंटरनेशनल आदि के खाते शामिल हैं। जब उन्हें कोई लाभ नहीं मिला और एप में लॉगिन भी नहीं हो पाया तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत की। उन्होंने सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी, बैंक स्टेटमेंट और संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
केस-4
कहा-तत्काल चाहिए रुपये
घरौंडा निवासी प्रदीप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भतीजे के नाम पर 6.25 लाख रुपये ठगी लिए। प्रदीप कुमार ने बताया कि 23 अप्रैल को उनकी फेसबुक आईडी पर रोहित राजपूत नाम की आईडी से मैसेज आया और उसने खुद को उनका ऑस्ट्रेलिया निवासी भतीजा बताया। उसने कहा कि उसने उनके खाते में 10,40,600 रुपये भेज दिए हैं और उन्हें आधार कार्ड दिखाकर यह रकम बैंक से मिल जाएगी। लेकिन वह खुद तत्काल 6.25 लाख रुपये चाहता था, जो वह बाद में लौटाएगा। भरोसा कर प्रदीप कुमार ने अलग-अलग बैंक खातों और मोबाइल नंबरों पर 6.25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि यह ठगी थी। उन्होंने उसी दिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। साइबर ठग लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ये कभी विदेश में रहने वाले रिश्तेदार बनकर रुपये मांग रहे हैं तो कभी परिचित बताकर इलाज के नाम पर रुपये ऐंठ रहे हैं। अब चार ऐसे ही नए मामले सामने आए हैं जिनमें भतीजा और भांजा बनकर ठगों ने 21.25 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ितों ने ठगी का पता चलने पर साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी है। थाना साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
केस-1
कहा- वीजा रद्द हुआ तो 10 की होगी जेल
विकास नगर के राकेश कुमार ने बताया कि उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया, जिसमें आरोपी ने खुद को उनका भांजा अंकित बनकर बात की। आरोपी ने कहा कि उसका वीजा रद्द होने वाला है और अगर तीन लाख रुपये तुरंत नहीं दिए तो उसे 10 साल की जेल हो सकती है। राकेश कुमार ने बताए गए बैंक खाते में गूगल पे और आईएमपीएस के जरिये 1,43,500 रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्त बंसीलाल के पीएनबी खाते से एक लाख रुपये और फिर ऊषा रानी के नाम पर 29 हजार रुपये ट्रांसफर किए। सेक्टर-12 की बैंक मशीन से 27,500 रुपये नकद जमा किए। अगले दिन भांजे से बात की तो पता चला कि वह मैसेज उसका नहीं था। तब पता चला कि उनके साथ तीन लाख रुपये की ठगी हो चुकी है।
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केस-2
भरोसा जताने के लिए भेजी जमा नकदी की रसीद
काछवा गांव की मूर्ति देवी ने बताया कि वह जिला सहकारी बैंक में कार्यरत हैं। 10 मार्च को उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसमें बताया गया कि एक जानकार की पत्नी की सर्जरी होनी है और तत्काल रुपयों की जरूरत है। आरोपी ने भरोसे में लेने के लिए रुपयों की जमा रसीद भी व्हाट्सएप पर भेजी और कहा कि वह अगले दिन रुपये उनके खाते में वापस कर देगा। महिला ने झांसे में आकर उनके खाते में दो लाख रुपये भेज दिए। जब रुपये वापस नहीं आए तो उन्होंने 11 मार्च की शाम को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि हाल में उसी नंबर से दोबारा कॉल आई और 10 हजार और मांगे गए।
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केस-3
अच्छी कमाई का दिया झांसा
सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग के नाम पर रोहित कुमार निवासी स्प्रिंग वैली से 10.12 लाख रुपये की ठगी की गई। रोहित ने बताया कि 17 मार्च को फेसबुक पर एक लिंक के जरिये वह एक व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ गया। वहां से उसे एक एप डाउनलोड करने को कहा गया। उसने सात बार में 10,12,543.60 रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए। इसमें इसराफिल एंटरप्राइज, लक्ष्मी एंटरप्राइज, महालक्ष्मी एंटरप्राइज, जनकी प्रधान, एएसके इंटरनेशनल आदि के खाते शामिल हैं। जब उन्हें कोई लाभ नहीं मिला और एप में लॉगिन भी नहीं हो पाया तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत की। उन्होंने सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी, बैंक स्टेटमेंट और संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
केस-4
कहा-तत्काल चाहिए रुपये
घरौंडा निवासी प्रदीप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भतीजे के नाम पर 6.25 लाख रुपये ठगी लिए। प्रदीप कुमार ने बताया कि 23 अप्रैल को उनकी फेसबुक आईडी पर रोहित राजपूत नाम की आईडी से मैसेज आया और उसने खुद को उनका ऑस्ट्रेलिया निवासी भतीजा बताया। उसने कहा कि उसने उनके खाते में 10,40,600 रुपये भेज दिए हैं और उन्हें आधार कार्ड दिखाकर यह रकम बैंक से मिल जाएगी। लेकिन वह खुद तत्काल 6.25 लाख रुपये चाहता था, जो वह बाद में लौटाएगा। भरोसा कर प्रदीप कुमार ने अलग-अलग बैंक खातों और मोबाइल नंबरों पर 6.25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि यह ठगी थी। उन्होंने उसी दिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई।