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प्रदूषण व स्मॉग से खांसी, दमा, अस्थमा, टीबी के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा, ओपीडी 250 पार
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जिले में पिछले एक सप्ताह से प्रदूषण और स्मॉग बढ़ रहा है। शुक्रवार को जिले का औसत एक्यूआई 269 रहा, वहीं अधिकतम एक्यूआई 367 तक पहुंच गया। लगातार बढ़ते प्रदूषण और स्मॉग का असर जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ रहा है। प्रदूषण और स्मॉग के कारण खांसी, दमा, अस्थमा व टीबी के मरीजों में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। नागरिक अस्पताल की अकेले टीबी ओपीडी पर नजर डालें तो पिछले सप्ताह तक ओपीडी में रोजाना 90 से 95 मरीज चेक अप और दवाइयाें के लिए आते थे, लेकिन पिछले चार दिनों से अचानक से टीबी की ओपीडी 250 के पार हो गई है।
टीबी के मेडिकल ऑफिसर ट्रीटमेंट यूनिट (एमओटीयू) डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि मौसम में प्रदूषण और स्मॉग की मात्रा में एक दम बदलाव आया है। स्थिति यह है कि प्रदूषण और स्मॉग धीरे-धीरे जानलेवा होता जा रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को खांसी, छाती में दर्द, सांस फूलने सहित गर्दन में दर्द की समस्याएं सामने आ रही हैं। पिछले सप्ताह की ओपीडी देखें तो उनके पास 90 से 95 की ओपीडी रहती थी, लेकिन अब इस सप्ताह में ओपीडी 250 के पार जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही जनरल फिजिशियन की ओपीडी में भी सामान्य मरीजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। प्रदूषण इतना अधिक बढ़ गया है कि जो मरीज इन्हेलर का प्रयोग कर रहे हैं। उनके इन्हेलर ने काम करना बंद कर दिया है।
जरूरी न हो तो घर पर सुरक्षित रहें
एमओ डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों को वे घर रहने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि इस समय सांस के मरीजों का बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में घर पर रहकर ही मरीज अपने आपको सुरक्षित रख सकते हैं। उसके बावजूद अगर फिर भी मरीजों को बाहर निकलना है तो मास्क जरूर पहनें और जब भी पानी पीएं उसे उबाल कर चाय की तरह सिप कर चुस्की लेते हुए पीएं। सांस और छाती से संबंधित रोगियों के लिए जीवनदायक है।
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वर्जन
जिले में प्रदूषण बढ़ रहा है। मरीजों और सामान्य लोगों को जरूरत के हिसाब से ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है। वहीं घर से निकलने से पहले मास्क का प्रयोग अति आवश्यक है।
- डॉ. सिम्मी कपूर, डिप्टी सिविल सर्जन, करनाल।
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टीबी के मेडिकल ऑफिसर ट्रीटमेंट यूनिट (एमओटीयू) डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि मौसम में प्रदूषण और स्मॉग की मात्रा में एक दम बदलाव आया है। स्थिति यह है कि प्रदूषण और स्मॉग धीरे-धीरे जानलेवा होता जा रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को खांसी, छाती में दर्द, सांस फूलने सहित गर्दन में दर्द की समस्याएं सामने आ रही हैं। पिछले सप्ताह की ओपीडी देखें तो उनके पास 90 से 95 की ओपीडी रहती थी, लेकिन अब इस सप्ताह में ओपीडी 250 के पार जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही जनरल फिजिशियन की ओपीडी में भी सामान्य मरीजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। प्रदूषण इतना अधिक बढ़ गया है कि जो मरीज इन्हेलर का प्रयोग कर रहे हैं। उनके इन्हेलर ने काम करना बंद कर दिया है।
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जरूरी न हो तो घर पर सुरक्षित रहें
एमओ डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों को वे घर रहने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि इस समय सांस के मरीजों का बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में घर पर रहकर ही मरीज अपने आपको सुरक्षित रख सकते हैं। उसके बावजूद अगर फिर भी मरीजों को बाहर निकलना है तो मास्क जरूर पहनें और जब भी पानी पीएं उसे उबाल कर चाय की तरह सिप कर चुस्की लेते हुए पीएं। सांस और छाती से संबंधित रोगियों के लिए जीवनदायक है।
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जिले में प्रदूषण बढ़ रहा है। मरीजों और सामान्य लोगों को जरूरत के हिसाब से ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है। वहीं घर से निकलने से पहले मास्क का प्रयोग अति आवश्यक है।
- डॉ. सिम्मी कपूर, डिप्टी सिविल सर्जन, करनाल।