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Karnal News: करोड़ों के ऑक्सीवन में दम तोड़ रहे पौधे
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जितेंद्र नरवाल
करनाल। शहर के लोगों को भरपूर प्राणवायु देने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सेक्टर-4 से मधुबन तक बनाए गए ऑक्सीवन के पेड़-पौधे रखरखाव के अभाव में सूख रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक ऑक्सीवन के लिए दो चरणों में करीब 30 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। जबकि तीसरे चरण में करीब 10 हजार पौधे और लगाए जाने बाकी हैं।
हालात ये हैं कि इनमें से करीब 25 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। तो हजारों पौधे पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। इन पौधों को रोपित करते समय बताया गया कि इनका चार साल तक रखरखाव भी किया जाएगा लेकिन अब अधिकारी कहते हैं कि उनके पास इन पौधों के रखरखाव के लिए बजट नहीं है। इसके लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा।
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दूसरी ओर सरकार ने जिस उद्देश्य से ऑक्सीवन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी, वह भी पूरा नहीं हो पाया है। सूख रहे ये पौधे न तो लोगों को ऑक्सीजन दे पा रहे हैं और न ही सुंदरता के नजरिए से यहां के फूल उग पाए हैं।
शहर का वातावरण दूषित होता जा रहा है। एक्यूआई 150 पार तक जा चुका है। ऐसे में शहर के लोगों को शुद्ध वातावरण की आवश्यकता थी। इसे देखते हुए ऑक्सीवन प्रोजेक्ट को मंजूर किया गया था। वहीं, यहां एक पेड़ मां के नाम से भी लगाए गए थे। लापरवाही से इन पौधों की भी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सेक्टर चार से मधुबन तक करीब 80 एकड़ यानी 32 हेक्टेयर जमीन में करीब 40 हजार पौधे लगाने का प्लान बनाया गया था। ऑक्सीवन में पांच वन क्षेत्र तैयार किए गए हैं। इनमें अलग-अलग किस्म के पेड़-पौधे रोपित हैं। यहां चितवन, पाखीवन, अंतरिक्ष वन, आरोग्य वन और सुगंध वाटिका बनाए गए हैं।
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करनाल। शहर के लोगों को भरपूर प्राणवायु देने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सेक्टर-4 से मधुबन तक बनाए गए ऑक्सीवन के पेड़-पौधे रखरखाव के अभाव में सूख रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक ऑक्सीवन के लिए दो चरणों में करीब 30 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। जबकि तीसरे चरण में करीब 10 हजार पौधे और लगाए जाने बाकी हैं।
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हालात ये हैं कि इनमें से करीब 25 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। तो हजारों पौधे पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। इन पौधों को रोपित करते समय बताया गया कि इनका चार साल तक रखरखाव भी किया जाएगा लेकिन अब अधिकारी कहते हैं कि उनके पास इन पौधों के रखरखाव के लिए बजट नहीं है। इसके लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा।
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दूसरी ओर सरकार ने जिस उद्देश्य से ऑक्सीवन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी, वह भी पूरा नहीं हो पाया है। सूख रहे ये पौधे न तो लोगों को ऑक्सीजन दे पा रहे हैं और न ही सुंदरता के नजरिए से यहां के फूल उग पाए हैं।
शहर का वातावरण दूषित होता जा रहा है। एक्यूआई 150 पार तक जा चुका है। ऐसे में शहर के लोगों को शुद्ध वातावरण की आवश्यकता थी। इसे देखते हुए ऑक्सीवन प्रोजेक्ट को मंजूर किया गया था। वहीं, यहां एक पेड़ मां के नाम से भी लगाए गए थे। लापरवाही से इन पौधों की भी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सेक्टर चार से मधुबन तक करीब 80 एकड़ यानी 32 हेक्टेयर जमीन में करीब 40 हजार पौधे लगाने का प्लान बनाया गया था। ऑक्सीवन में पांच वन क्षेत्र तैयार किए गए हैं। इनमें अलग-अलग किस्म के पेड़-पौधे रोपित हैं। यहां चितवन, पाखीवन, अंतरिक्ष वन, आरोग्य वन और सुगंध वाटिका बनाए गए हैं।