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Karnal News: देसी पशुओं की नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बनेगी योजना, छह प्रगतिशील किसान सम्मानित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:49 AM IST
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Plan to be formulated to promote the conservation of indigenous livestock breeds; six progressive farmers honored.
एनबीएजीआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अति​थि। संवाद
करनाल। देसी पशुओं की नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं तैयार की जाएंगी। ताकि पशुपालक और किसान इन्हें प्राथमिकता दें। वर्तमान में पहले से स्थिति काफी सुधरी है और पशुपालकों के अलावा आम लोगों ने भी देसी नस्लों के महत्व को समझा है। यह कहना है वैज्ञानिकों का।
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राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) का 43वां स्थापना दिवस शुक्रवार को वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, किसानों की भागीदारी के साथ मनाया गया। अपने अब तक के सफर में संस्थान ने 262 पशु नस्लों का पंजीकरण किया। वहीं जीन बैंक में 3.7 लाख से अधिक सीमन डोज संरक्षित किया है।
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निदेशक डॉ. एनएच मोहन ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों और आगामी पांच वर्षों की रणनीति प्रस्तुत की। उन्होंने पशु आनुवंशिक संसाधनों के लक्षण निर्धारण, संरक्षण और समुदाय आधारित उपयोग के लिए समन्वित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक आईएफएस अतुल जे. सिसिरकर और आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न विशेषज्ञ शामिल रहे। अतुल जे. सिसिरकर ने देशी पशुधन नस्लों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और ट्रेसेबिलिटी पर जोर देते हुए जियो-टैगिंग जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों को अपनाने की आवश्यकता बताई। स्थापना दिवस के अवसर पर करनाल और आसपास के गांवों के छह प्रगतिशील किसानों को देसी नस्लों साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा भैंस और बारबरी बकरी के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कुल 49 महिला और 33 पुरुष किसानों ने भाग लेकर संस्थान के विस्तार और जनसहभागिता को दर्शाया।

संस्थान की उपलब्धियां-
संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि अब तक 258 स्वदेशी पशु-पक्षी नस्लों और 4 सिंथेटिक नस्लों सहित कुल 262 नस्लों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही 3.7 लाख से अधिक सीमन डोज और 171 नस्लों की जर्मप्लाज्म सामग्री राष्ट्रीय जीन बैंक में संरक्षित की गई है, जिनमें 37 संकटग्रस्त नस्लें शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्रकाशनों का विमोचन, पोस्टर एवं खेल प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट मिशन और आधुनिक तकनीक पर जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने देशी पशुधन के वैज्ञानिक संरक्षण, जीनोमिक मूल्यांकन और सतत उपयोग पर बल दिया। साथ ही जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट एनिमल मिशन को मजबूत करने की बात कही गई, ताकि भारत की पशु आनुवंशिक विविधता को संरक्षित रखते हुए ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा को मजबूती दी जा सके। डॉ. वाईएस मलिक ने मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को पशुधन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं डॉ. एसके दुबे ने संस्थागत कार्य संस्कृति और समर्पण की भावना को उत्पादकता से जोड़ते हुए उत्कृष्टता पर जोर दिया।

एनबीएजीआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि। संवाद

एनबीएजीआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि। संवाद

एनबीएजीआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि। संवाद

एनबीएजीआर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि। संवाद

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