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Karnal News: कर्णनगरी में एक करोड़ की लागत से विकसित होगा ऑक्सीवन

Sat, 08 Jun 2024 05:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 08 Jun 2024 05:54 AM IST
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Oxygen van will be developed in Karnanagari at a cost of one crore
सुखदेव चौहान
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करनाल। वन विभाग की ओर से शहर में सेक्टर चार ग्रीन बेल्ट से मधुबन तक करीब चार किलोमीटर में ऑक्सीवन तैयार किया जा रहा है। इसके पहले भाग का कार्य पूरा हो चुका है, जिस पर साढ़े तीन करोड़ रुपए की राशि खर्च हुई है। ऑक्सीवन का करीब एक करोड़ की लागत से तैयार होने वाले दूसरे भाग की निविदा आवंटित हो चुकी है जिसमें अंतरिक्ष-वन, अरोग्य व स्मृति वन विकसित करने का काम जल्द ही शुरू होगा।

शहरवासियों को शुद्ध हवा देने व योग संस्थाओं को बेहतर मंच प्रदान करने के लिए वन विभाग द्वारा ऑक्सीवन के पहले फेज का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस भाग में तपोवन, पाखीवन, कृष्णवन, सुगंध वन व मियावाकी भी तैयार की गई है। अब दूसरे भाग का कार्य शुरू होना है, इससे पहले यहां फेसिंग व लेवलिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है।
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दूसरे चरण में वन क्षेत्र तैयार किया जाना है, जिसमें लोगों की सुविधा के हिसाब से वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। मियावाकी पौधरोपण की एक जापानी विधि है। इस विधि का प्रयोग कर खाली पड़े स्थान को छोटे बगानों या जंगलों में बदला जा सकता है। इस पद्धति में पौधों को एक दूसरे से कम दूरी पर लगाया जाता है।
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पौधे सूर्य का प्रकाश प्राप्त कर ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं किंतु सघनता के कारण नीचे उगने वाले खरपतवार को प्रकाश नहीं मिल पाता है। यह पौधों की वृद्धि के लिए अच्छी विधि है, इस पद्धति के अनुसार पौधों की तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है, जिनकी ऊंचाई अलग-अलग होती है। इसका कारण यह है कि वे एक -दूसरे से कम से कम प्रतियोगिता करें।
आमतौर पर जंगलों को पारंपरिक विधि से उगने में कम से कम 100 वर्ष का समय लगता है, जबकि मियावाकी पद्धति से उन्हें केवल 20 से 30 वर्षों में ही उगाया जा सकता है। मियावाकी पद्धति बिल्कुल वैज्ञानिक ढंग से की जाती है जिसमें प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से की जाती हैं।
ऑक्सीवन के भाग दो में आर्किड टी (कचनालर), इंडियन लैबर्नम (अमल्तास), प्राईड ऑफ इंडिया, रेड सिल्क कॉटन ट्री (सीमल), इंडियन कोरल, सीता अशोक, जावा कैसिया, लाल गुलमोहर, गोल्डन शॉवर, पैशन फ्लावर, जैसे सजावटी और फूल वाले पौधे लगाए जाएंगा। पाखी वन में पीपल, बरगद, पिलखन, नीम आदि के पौधे लगे है, दूसरे भाग में अंतरिक्ष वन में जंगल की आग (पलाश/ढाक), कटहल गुल्लर, आवंला, कृष्णा नील, चंपा, खैर व बेल पत्थर जैसे पौधे लगाए जाएंगे।
आरोग्य वन में तुलसी, आश्वगंधा, नीम, एलोवेरा, हरड़, बेहड़ा, आंवला आदि औषधीय पौधे रोपित किए जाएंगे। तीसरे भाग में सुगंध वाटिका में चमेली, रात की रानी, दिन का राजा, पारिजात, चंपा, गुलाब, हनी स्कल व पैसी फलौरा पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

ऑक्सीवन के भाग दो में स्मृति वन विकसित किया जाएगा, जिसमें लोग अपने जन्मदिन व विशेष दिन की स्मृति के लिए पौधरोपण करेंगे। जैसे ही व्यक्ति का एक साल बाद जन्मदिन या वह विशेष तिथि आएगी, उसे स्मृति रहेगी की उसने इस तिथि पर ऑक्सीवन में पौधरोपण किया था। इस कारण से पौधरोपण को व्यक्ति की विशेष दिन की स्मृति से जोड़ा गया है।
रोपित पौधों का चार साल तक रखा जाएगा विवरण

वन विभाग की ओर से वन मित्र योजना शुरू की गई है। योजना का उद्देश्य वृक्ष आवरण बढ़ाने में स्थानीय समुदायों को सीधे शामिल करना है। योजना के तहत 10 जून तक पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने का काम, एक जुलाई से 15 अगस्त तक रोपण अवधि होगी। 31 अगस्त तक पौधरोपण सत्यापन और जियो टैग, सितंबर से अप्रैल तक रोपित पौधों का रखरखाव व संरक्षण कार्य किया जाएगा। योजना के तहत चार वर्षों तक रोपित पौधों का रखरखाव और संरक्षण का कार्य किया जाएगा।




ऑक्सीवन परियोजना के तहत शहरवासियों को शुद्ध हवा व स्वस्थ जीवन देने के तीन भाग में पार्क विकसित किया जाएगा। इसके पहले भाग का कार्य पूरा हो चुका है। इस वर्ष दूसरे भाग को तैयार कर उसमें अंतरिक्ष और आरोग्य वन विकसित किए जाएंगे। लगभग चार किलोमीटर लंबे और 80 एकड़ भूमि में बनने वाला यह वन अपने आप में आकर्षण का केंद्र रहेगा जिससे शहरवासियों को शुद्ध वातावरण मिलेगा। -जय कुमार, जिला वन अधिकारी करनाल
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