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Karnal News: बीमा कंपनी को सात लाख का मुआवजा देने का आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बीमाधारक की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। परिजन ने मामला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में उठाया। दोनों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता न्यायालय ने बीमा कंपनी को सेवाओं में कमी का दोषी माना। बीमा कंपनी को सात लाख रुपये मुआवजा देने के साथ साथ 25 हजार रुपये का हर्जाना व 11 हजार रुपये का वाद व्यय भी अदा करने का आदेश दिया।
जिले के कुरलन गांव निवासी श्याम सिंह ने श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी शाखा करनाल से 28 सितंबरए 2021 को 7.50 लाख रुपये की एक पॉलिसी कराई थी। जिसका रिस्क कवर 30 सितंबर, 2021 से शुरू हो गया था। किस्तें भी भरी गईं। इसी बीच श्याम सिंह की 16 अप्रैल, 2022 को मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके बेटे विक्रम ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा। इसी बीच बीमा कंपनी ने 50 हजार रुपये वापस कर चुकी थी लेकिन शेष रकम को बीमा ने देने से मना कर दिया।
बीमा कंपनी ने कहा कि श्याम सिंह नशा करता था, उसका लीवर पहले से ही खराब था, इसलिए बीमा क्लेम नहीं बनता है। श्याम सिंह के पुत्र विक्रम ने इस मामले को लेकर जिला उपभोक्ता वाद निवारण आयोग में याचिका दाखिल की।
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वाद व्यय भी देना होगा
उपभोक्ता न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनी और 7 सितंबर 2025 को आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने निर्णय सुनाया। इसमें बीमा कंपनी को सेवाओं में कमी का दोषी पाया। न्यायालय ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी को याची को सात लाख रुपये का मुआवजा भरना होगा। इसके साथ ही 25 हजार रुपये का हर्जाना व 11 हजार रुपये का वाद व्यय का भी भुगतान करना होगा।
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करनाल। बीमाधारक की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। परिजन ने मामला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में उठाया। दोनों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता न्यायालय ने बीमा कंपनी को सेवाओं में कमी का दोषी माना। बीमा कंपनी को सात लाख रुपये मुआवजा देने के साथ साथ 25 हजार रुपये का हर्जाना व 11 हजार रुपये का वाद व्यय भी अदा करने का आदेश दिया।
जिले के कुरलन गांव निवासी श्याम सिंह ने श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी शाखा करनाल से 28 सितंबरए 2021 को 7.50 लाख रुपये की एक पॉलिसी कराई थी। जिसका रिस्क कवर 30 सितंबर, 2021 से शुरू हो गया था। किस्तें भी भरी गईं। इसी बीच श्याम सिंह की 16 अप्रैल, 2022 को मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके बेटे विक्रम ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा। इसी बीच बीमा कंपनी ने 50 हजार रुपये वापस कर चुकी थी लेकिन शेष रकम को बीमा ने देने से मना कर दिया।
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बीमा कंपनी ने कहा कि श्याम सिंह नशा करता था, उसका लीवर पहले से ही खराब था, इसलिए बीमा क्लेम नहीं बनता है। श्याम सिंह के पुत्र विक्रम ने इस मामले को लेकर जिला उपभोक्ता वाद निवारण आयोग में याचिका दाखिल की।
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वाद व्यय भी देना होगा
उपभोक्ता न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनी और 7 सितंबर 2025 को आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने निर्णय सुनाया। इसमें बीमा कंपनी को सेवाओं में कमी का दोषी पाया। न्यायालय ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी को याची को सात लाख रुपये का मुआवजा भरना होगा। इसके साथ ही 25 हजार रुपये का हर्जाना व 11 हजार रुपये का वाद व्यय का भी भुगतान करना होगा।