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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   One gets devotion from Sakalmukhi, protection from Panchmukhi and strength from worshipping Ekadashmukhi Hanuman.

Karnal News: सकल मुखी से भक्ति, पंचमुखी से सुरक्षा और एकादश मुखी हनुमान की पूजा से मिलता है बल

Thu, 02 Apr 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 02 Apr 2026 12:42 AM IST
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One gets devotion from Sakalmukhi, protection from Panchmukhi and strength from worshipping Ekadashmukhi Hanuman.
जीटी रोड ​स्थित नवग्रह मंदिर में स्थापित पंच मुखी हनुमान जी की प्रतिमा। संवाद
भगवानदास
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करनाल। अंजनी पुत्र हनुमान के प्रत्येक स्वरूप और पूजन का अलग महत्व है। ज्योतिष के अनुसार, उनके तीन स्वरूप सकल, पंचमुखी और एकादशमुखी हैं। भक्त जिस रूप में उनकी आराधना करते हैं, उन्हें उस स्वरूप के प्रभाव से वैसा फल जरूर मिलता है।
ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री के अनुसार, भगवान हनुमान के सकल मुखी स्वरूप की पूजा से भक्ति, पंचमुखी से घर की सुरक्षा और एकादश मुखी हनुमान स्वरूप की पूजा से बल की प्राप्ति होती है। वह भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जन्मोत्सव व मंगलवार के दिन पूजा करने से जागृत देवता हनुमान प्रसन्न होकर संकटों को दूर कर देते हैं।
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- सकल रूप (एकमुखी हनुमान)
यह सबसे सामान्य और प्रचलित रूप है। इसमें वह भगवान राम की भक्ति में लीन या हाथ जोड़े (दास भाव) दिखाई देते हैं। यह रूप सेवा, ज्ञान, और विनम्रता का प्रतीक है। इनका केसरिया रंग है। मान्यता है कि हनुमानी सिंदूर और चमेली का तेल लगाने से अति प्रसन्न होते हैं। साधक को भक्ति, यश, ज्ञान और निर्भयता प्रदान करते हैं।
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- पंचमुखी हनुमान

यह रूप उन्होंने पाताल लोक में अहिरावण के वध के लिए धारण किया था। इसमें पांच दिशाओं के मुख शामिल हैं। यह स्वरूप घर की सुरक्षा, ग्रहों के दोष (शनि, राहु, केतु) और संकट निवारण के लिए पूजनीय है।

मुख का महत्व-
पूर्व (वानर मुख) : भक्ति और शक्ति।

दक्षिण (नरसिंह मुख) : भय, चिंता और शत्रुओं का नाश।

पश्चिम (गरुड़ मुख) : विष, तंत्र-मंत्र और बुरी नजर से सुरक्षा।

उत्तर (वराह मुख) : धन, समृद्धि और सुख।

उर्ध्व (हयग्रीव मुख : आकाश की ओर) : ज्ञान, बुद्धि और विद्या।

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- एकादशमुखी हनुमान (ग्यारह मुख)
यह स्वरूप कालकारमुख राक्षस के वध के लिए प्रकट हुआ था। इसमें वानर, सिंह, गरुड़, वराह, अश्व, भैरव, रुद्र, नरसिंह आदि के मुख शामिल हैं, जो भक्तों को सर्वशक्तिमान और निर्भीक बनाते हैं। मान्यता है कि एकादशमुखी स्वरूप की पूजा जीवन में अजेय साहस, बल और सर्वोच्च सफलता पाने के लिए की जाती है।
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आज पूजन के दो मुहूर्त

हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के दो अति शुभ मुहूर्त हैं। सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 44 मिनट तक और दूसरा मुहूर्त शाम 6 बजकर 39 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट तक है। इस मुहूर्त में पूजन का विशेष फल है।

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अतुलित बलधामा.. इसलिए पहलवान करते हैं पूजन
हे अतुलित बल धामा... ज्योतिषाचार्य मांगे राम ने बताया कि इसका अर्थ है जिस बल की कोई तुलना न हो। हर पहलवान ये चाहता है कि उसके मुकाबले का कोई भी पहलवान न हो। हनुमान जी का पहाड़ और चट्टान जैसा शरीर है, जिसका कोई मुकाबला नहीं। इसलिए पहलवान हनुमान जी को अपना आदर्श और आराध्य मानते हैं, क्योंकि वे असीम शारीरिक बल, शक्ति, साहस, अनुशासन, ब्रह्मचर्य और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। हनुमान जी को संकटमोचन और कुश्ती का देवता माना जाता है, जो अखाड़े में पहलवानों को मानसिक मजबूती, भय से मुक्ति और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं।
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