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Karnal News: उठान 63.18 फीसदी, फिर भी अटीं मंडियां, जाम की स्थिति
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में खरीदे गए धान की 63.18 प्रतिशत उठान हो चुकी है लेकिन अभी भी मंडियों में जगह कम होने के कारण जाम की स्थिति है। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आवक अधिक है, जिसके सापेक्ष खरीद कम हुई है। पिछले साल हुई धान की कुल खरीद का 62.92 प्रतिशत धान खरीदा जा चुका है। कई मंडियों में अभी भी किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कुछ मंडियों में भीड़ कम हो गई है।
पिछले साल धान की खरीद सीजन में 983167 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि इस साल अभी तक 618663 मीट्रिक टन खरीदा जा चुका है, जो पिछले साल की कुल खरीद का 62.92 प्रतिशत है। उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि इसमें से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 4 लाख 16 हजार 469 मीट्रिक टन धान, हैफेड द्वारा एक लाख 21 हजार 789 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन द्वारा 80 हजार 405 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। अभी तक 390919 मीट्रिक टन धान की उठान कर ली गई है, जो कुल खरीद की 63.18 प्रतिशत है। शेष धान की भी उठान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल ये है कि जब 63 प्रतिशत से अधिक उठान कर ली गई है तो मंडियां धान से अटी हुई क्यों हैं। किसानों के अनुसार आवक के सापेक्ष खरीद नहीं की गई है। पिछले कई दिनों से मंडियों में आवक तो लगातार होती रही लेकिन खरीद की प्रक्रिया काफी धीमी रही, जिसके कारण मंडियों में अभी भी धान का भारी स्टॉक पड़ा है। कभी राइस मिलर्स नहीं आए तो कभी धान में नमी अधिक बताकर किसानों के धान को नहीं खरीदा गया। मौसम कई दिनों से शुष्क बना हुआ है लेकिन इसके बावजूद अभी राइस मिलर्स और एजेंसियां नमी अधिक बताकर कट लगा रही है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
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मंडी में उठान कम होने से बनी जाम की स्थिति
कुंजपुरा। अनाज मंडी में धान का उठान धीमी गति से चल रहा है। जिनका धान मंडी में बिक चुका है लेकिन उठान न होने के कारण बिकी हुई फसल का भुगतान नहीं हो पा रहा। मार्केट कमेटी प्रशासन भी इस समस्या के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा। कुंजपुरा व घीड़ अनाज मंडी में डीएफएससी व हैफेड द्वारा धान की खरीद की जा रही है। इन मंडियों में फसल उठान की गति काफी धीमी है। हालांकि दिन प्रतिदिन अनाज मंडी में धान की आवक भी कम होती जा रही है।
किसानों ने उठान की गति बढ़ाने की अपील की है। उठान न होने के कारण धान से मंडी अटी पड़ी है। जिससे मंडी में आने वाले फसल को डालने की समुचित जगह न मिलने के कारण आढ़ती व किसान दोनों ही परेशान है। कई बार तो अनाज मंडी में जाम की स्थिति भी बन जाती है। संवाद
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करनाल। जिले में खरीदे गए धान की 63.18 प्रतिशत उठान हो चुकी है लेकिन अभी भी मंडियों में जगह कम होने के कारण जाम की स्थिति है। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आवक अधिक है, जिसके सापेक्ष खरीद कम हुई है। पिछले साल हुई धान की कुल खरीद का 62.92 प्रतिशत धान खरीदा जा चुका है। कई मंडियों में अभी भी किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कुछ मंडियों में भीड़ कम हो गई है।
पिछले साल धान की खरीद सीजन में 983167 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि इस साल अभी तक 618663 मीट्रिक टन खरीदा जा चुका है, जो पिछले साल की कुल खरीद का 62.92 प्रतिशत है। उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि इसमें से खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 4 लाख 16 हजार 469 मीट्रिक टन धान, हैफेड द्वारा एक लाख 21 हजार 789 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन द्वारा 80 हजार 405 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। अभी तक 390919 मीट्रिक टन धान की उठान कर ली गई है, जो कुल खरीद की 63.18 प्रतिशत है। शेष धान की भी उठान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सवाल ये है कि जब 63 प्रतिशत से अधिक उठान कर ली गई है तो मंडियां धान से अटी हुई क्यों हैं। किसानों के अनुसार आवक के सापेक्ष खरीद नहीं की गई है। पिछले कई दिनों से मंडियों में आवक तो लगातार होती रही लेकिन खरीद की प्रक्रिया काफी धीमी रही, जिसके कारण मंडियों में अभी भी धान का भारी स्टॉक पड़ा है। कभी राइस मिलर्स नहीं आए तो कभी धान में नमी अधिक बताकर किसानों के धान को नहीं खरीदा गया। मौसम कई दिनों से शुष्क बना हुआ है लेकिन इसके बावजूद अभी राइस मिलर्स और एजेंसियां नमी अधिक बताकर कट लगा रही है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
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मंडी में उठान कम होने से बनी जाम की स्थिति
कुंजपुरा। अनाज मंडी में धान का उठान धीमी गति से चल रहा है। जिनका धान मंडी में बिक चुका है लेकिन उठान न होने के कारण बिकी हुई फसल का भुगतान नहीं हो पा रहा। मार्केट कमेटी प्रशासन भी इस समस्या के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा। कुंजपुरा व घीड़ अनाज मंडी में डीएफएससी व हैफेड द्वारा धान की खरीद की जा रही है। इन मंडियों में फसल उठान की गति काफी धीमी है। हालांकि दिन प्रतिदिन अनाज मंडी में धान की आवक भी कम होती जा रही है।
किसानों ने उठान की गति बढ़ाने की अपील की है। उठान न होने के कारण धान से मंडी अटी पड़ी है। जिससे मंडी में आने वाले फसल को डालने की समुचित जगह न मिलने के कारण आढ़ती व किसान दोनों ही परेशान है। कई बार तो अनाज मंडी में जाम की स्थिति भी बन जाती है। संवाद