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अब रेलयात्री करेंगे अंग्रेजों के जमाने के हैंडपंप का दीदार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 02:08 AM IST
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Now rail travelers will see the hand pump of the British era
कर्मबीर लाठर
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करनाल। रेलवे स्टेशन पर प्राचीन दुलर्भ हैंडपंप को विरासत के रूप में सहेजा जाएगा। रेलवे के इतिहास से जुड़े इस हैंडपंप को जनता भी देख सके इसके लिए रेलवे स्टेशन पर कांच का बॉक्स तैयार किया जाएगा। वीरवार को करनाल रेलवे स्टेशन पर पहुंचे उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के डीआरएम डिंपी गर्ग ने हैंडपंप को विरासत के रूप में सहेजने तथा जनता के लिए प्रदर्शित करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि दीवार को तोड़कर प्लेटफार्म की तरफ कांच का केबिन बनाएं ताकि हर यात्री को यह नल दिखाई दे। संभव हो तो इसे चलाने योग्य बनाएं ताकि यात्री इसका पानी पी सकें। उन्होंने यात्रियों को आकर्षित करने के लिए केबिन पर ‘अब पीयें अंग्रेजों के जमाने का पानी’ अंकित करने को कहा। संवाद
शिलापट्ट पर अंकित है हैंडपंप का इतिहास
करनाल रेलवे स्टेशन पर अधिकारी विश्राम गृह के अंदर प्लेटफार्म की दीवार के साथ यह नल लगा है। साथ में बड़ी दीवार होने के कारण यात्रियों को यह नल दिखाई नहीं देता। नल के समीप दीवार पर शिलापट्ट लगा है। जिस पर इस नल का इतिहास लिखा गया है। जिसमें लिखा है कि इस तरह के हैंडपंप 1930-40 के लगभग आरंभ हुए थे। उस समय यह एक नई उपलब्धि थी, क्योंकि इससे पहले पानी की आपूर्ति कुआं से पूरी की जाती थी। पंप की कार्यशैली उत्कृष्ट थी। परंतु 1970 तक आसपास ये हैंडपंप नजर आने बंद हो गए। यह हैंडपंप पुरानी गैंग 18 नंबर घरौंडा में लगा था जोकि बंद पड़ा था। उस स्थान से विस्थापित इस हैंडपंप को जोकि एक पुरातत्व की संपत्ति बन गई है, इसलिए इसको रेलवे हैरिटेज के रूप में अधिकारी विश्राम गृह में स्थापित किया गया है।
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1892 में बना था करनाल रेलवे स्टेशन
1888 से 1891 तक दिल्ली-करनाल-अंबाला रेल लाइन का निर्माण कार्य चला था। ब्रिटिश शासन में 1892 में करनाल में रेलवे स्टेशन बना और उसी वर्ष इस ट्रैक पर रेल चली। इसे अब ‘ए’ श्रेणी का दर्जा प्राप्त है। ब्रिटिश राज में 1800 से 1844 तक करनाल को छावनी बनाया गया था। सेमग्रस्त इलाका होने के कारण यहां मच्छरों के आतंक से परेशान अंग्रेजों ने छावनी को अंबाला स्थानांतरित कर दिया था। 1892 में बना स्टेशन का प्रवेश द्वार भवन आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है। एक पानी की टंकी भी ब्रिटिश शासन के समय की है। उस समय में बनी प्रतीक्षालय की इमारत आज भी है।
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