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कंपनियों में नहीं फायर सेफ्टी के इंतजाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 02:25 AM IST
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No provision of fire safety in companies
जीएसटी नंबर के साथ जिले में 19 हजार फर्म चल रही हैं, जहां करोड़ों का व्यापार होता है, लेकिन इन फर्मों के मालिक अपने कर्मचारी और यहां आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि इनमें पांच प्रतिशत फर्म भी ऐसी नहीं हैं, जो फायर सेफ्टी के प्रति सजग हों। यहां फायर सुरक्षा के इंतजाम होना तो दूर की बात, इनके पास फर्म चलाने के लिए दमकल विभाग की एनओसी तक नहीं है। ऐसे में यदि कहीं हादसा होता है, तो हालात भयावह होंगे।
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दमकल विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां हर साल औसतन 600 फर्में ही फायर एनओसी के लिए आवेदन करती हैं, इनमें से करीब 500 को ही नियम पूरे करने के बाद एनओसी मिल पाती है, यानी जिले में तीन प्रतिशत फर्में ही मानकों को पूरा कर फायर सेफ्टी में काम कर रही हैं। यह हालात तब हैं, जब पिछले तीन साल से लगातार कहीं न कहीं हादसा होने पर लोगों की जान जाती है। लेकिन इन फर्म संचालकों के अलावा दमकल विभाग और जिला प्रशासन फिर भी बेपरवाह हैं। हाल ही में घोघड़ीपुर की पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में चार मजदूरों की जान चली गई। लेकिन इस हादसे के बाद भी प्रशासन की ओर से जिले में फायर सेफ्टी इंतजाम जानने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया गया। अभी तक न कहीं चेकिंग हुई और न ही फर्म संचालकों की ओर से फायर सेफ्टी के इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम उठाया गया।
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इनके लिए ज्यादा जरूरी है फायर एनओसी
जिले में 600 के करीब कोचिंग सेंटर, 150 से ज्यादा राइस मिल, सदर बाजार में जूता एवं लेदर व्यापार, टिंबर मार्केट में करीब 60 शोरूम, फर्नीचर मार्केट के 50 से ज्यादा शोरूम, सोफा और गद्दा फैक्टरी, पेंट की दुकानें भी बड़ी संख्या में हैं। जहां फायर सेफ्टी के इंतजाम होने जरूरी हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर के पास एनओसी भी नहीं है। कोचिंग सेंटरों में 20 हजार से ज्यादा बच्चे रोजाना पढ़ाई के लिए आते हैं तो वहीं अन्य ट्रेड में लाखों की संख्या में लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं। इनमें लेबर तबका और दैनिक उपभोक्ता ज्यादा हैं।
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फायर एनओसी को लेकर यह है स्थिति-
वर्ष आवेदन मंजूर रिजेक्ट
2018 458 434 24
2019 613 578 35
2020 532 377 155
लॉकडाउन ने और किए हालात खराब, एनओसी रिन्यू कराना तक भूले
करनाल में 2018 से ऑनलाइन फायर एनओसी जारी हो रही है। जितने लोग अब एनओसी के लिए आवेदन करते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया में भी इन्हीं फर्मों के ज्यादातर नाम हैं। लेकिन वर्ष 2020 में लॉकडाउन ने हालात ज्यादा खराब कर दिए। हर साल करीब 500 एनओसी जारी होने वाला आंकड़ा 377 तक ही सिमट गया।

विस्फोटक उत्पादों की फर्मों के लिए ये हैं नियम-
-अग्निशमन विभाग और संबंधित थाना पुलिस की एनओसी के बाद ही फर्म संचालित की जा सकती है।
-फैक्टरी, निर्माता या दुकानदार के पास लाइसेंस होना अनिवार्य है।
-अग्निशमन यंत्र होना, आग बुझाने के लिए रेत की बाल्टी व पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
-फैक्टरी और दुकान आबादी के करीब एक किलोमीटर के दूर होनी चाहिए।
-बिजली सप्लाई के लिए हाइटेंशन तार, ट्रांसफार्मर के आस-पास फैक्टरी नहीं होनी चाहिए।
-फैक्टरी या दुकान में गैस सिलेंडर, लैंप, अगरबत्ती, सहित ज्वलनशील पदार्थ पर पाबंदी होनी चाहिए।
-फैक्टरी संचालक और कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने की जानकारी होनी चाहिए।
-मजदूरों के लिए दस्ताने, स्पेशल ड्रेस, मास्क सहित अन्य उपकरण होना जरूरी है।
ये हो चुके हैं हादसे
-2019 में शिव कॉलोनी क्षेत्र में पोटाश कूटते हुए एक बच्चे की विस्फोट से दर्दनाक मौत हो गई थी।
-2020 में कुंजपुरा की पटाखा फैक्टरी में आग से एक मजदूर की मौत हुई थी।
-2021 में घोघड़ीपुर के समीप पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में चार मजदूरों की मौत हो गई थी।
एनओसी के लिए प्रत्येक आवेदक द्वारा पहले नियमों को पूरा करना जरूरी है। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। इसमें एनबीसी के नियम के अनुसार, भवनों में पानी टैंक, होज रील, हाइड्रेंट और फायर पंप जरूरी है। इनकी फोटो भी पोर्टल पर अपलोड होती है। नगर निगम के उपायुक्त और दमकल विभाग के अधिकारियों की विजिट के बाद ही एनओसी जारी होती है। जिले में 10 पटाखा फैक्टरी एवं होल सेलर हैं। इनके यहां जांच की जा रही है कि इन्होंने एनओसी ली है या नहीं। अन्य फर्मों की भी जांच करेंगे। -नरेंद्र कुमार, फायर अफसर
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