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Karnal News: धान का उठान न भुगतान... किसान परेशान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नई अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद तो पिछले छह दिनों से शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी गति बेहद धीमी हैं। जो धान खरीदा गया है उसका किसानों को भुगतान मिला है और न ही खरीदे गए धान का उठान हो पाया है।
मंडियों में व्यवस्थाओं की हालत खानापूर्ति जैसी ही दिखाई दे रही है। मंडी गेट पर बनाई गई हेल्प डेस्क खाली पड़ी है। किसानों को जानकारी और मदद के लिए भटकना पड़ रहा है। गेट पास पर आधार अपडेट नहीं होने से कई किसानों की पर्चियां नहीं कट पा रही हैं। उन्हें मंडी में ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। धान खरीद की घोषणा के साथ ही सरकार और प्रशासन ने मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाने की बात कही थी लेकिन अभी तक ये कांटे नहीं पहुंच सके हैं।
किसान अपनी उपज का वजन पुराने कांटों से करवा रहे हैं। इससे एक ओर किसानों का विश्वास डगमगा रहा है तो दूसरी ओर खरीद प्रक्रिया भी धीमी हो रही है। शनिवार तक मंडी में करीब 12,500 क्विंटल धान की आवक हुई। 3,678 क्विंटल धान की खरीद हो सकी।
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जिले में खरीफ सीजन के दौरान लगभग 1.70 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई थी। इनमें धान की किस्म 1509 की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से शुरू हो चुकी है। जिले की 10 अनाज मंडियों और सात खरीद केंद्रों में अब तक लगभग 1.60 लाख क्विंटल धान की आवक हो चुकी है, लेकिन खरीद एजेंसियों की ओर से केवल 8000 क्विंटल धान ही खरीदा गया है।
नमी पर टिकी खरीद
खरीद एजेंसियां धान में नमी पर सख्ती दिखा रही हैं। 17 प्रतिशत तक नमी मान्य है, जबकि मंडी में आने वाली धान की फसल में नमी अधिक पाई जा रही है। ऐसे में किसानों को मंडी में ही फसल फैला कर सुखानी पड़ रही है। इससे समय बर्बाद हो रहा है और अतिरिक्त खर्च भी हो रहा है।
धान खरीद जारी है। कुछ आढ़तियों ने इलेक्ट्रॉनिक कांटे भी ले लिए हैं। व्यवस्थाओं में कमी नहीं होगी। किसानों को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा। -आशा, सचिव, मार्केट कमेटी, करनाल।
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करनाल। नई अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद तो पिछले छह दिनों से शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी गति बेहद धीमी हैं। जो धान खरीदा गया है उसका किसानों को भुगतान मिला है और न ही खरीदे गए धान का उठान हो पाया है।
मंडियों में व्यवस्थाओं की हालत खानापूर्ति जैसी ही दिखाई दे रही है। मंडी गेट पर बनाई गई हेल्प डेस्क खाली पड़ी है। किसानों को जानकारी और मदद के लिए भटकना पड़ रहा है। गेट पास पर आधार अपडेट नहीं होने से कई किसानों की पर्चियां नहीं कट पा रही हैं। उन्हें मंडी में ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। धान खरीद की घोषणा के साथ ही सरकार और प्रशासन ने मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाने की बात कही थी लेकिन अभी तक ये कांटे नहीं पहुंच सके हैं।
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किसान अपनी उपज का वजन पुराने कांटों से करवा रहे हैं। इससे एक ओर किसानों का विश्वास डगमगा रहा है तो दूसरी ओर खरीद प्रक्रिया भी धीमी हो रही है। शनिवार तक मंडी में करीब 12,500 क्विंटल धान की आवक हुई। 3,678 क्विंटल धान की खरीद हो सकी।
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जिले में खरीफ सीजन के दौरान लगभग 1.70 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई थी। इनमें धान की किस्म 1509 की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से शुरू हो चुकी है। जिले की 10 अनाज मंडियों और सात खरीद केंद्रों में अब तक लगभग 1.60 लाख क्विंटल धान की आवक हो चुकी है, लेकिन खरीद एजेंसियों की ओर से केवल 8000 क्विंटल धान ही खरीदा गया है।
नमी पर टिकी खरीद
खरीद एजेंसियां धान में नमी पर सख्ती दिखा रही हैं। 17 प्रतिशत तक नमी मान्य है, जबकि मंडी में आने वाली धान की फसल में नमी अधिक पाई जा रही है। ऐसे में किसानों को मंडी में ही फसल फैला कर सुखानी पड़ रही है। इससे समय बर्बाद हो रहा है और अतिरिक्त खर्च भी हो रहा है।
धान खरीद जारी है। कुछ आढ़तियों ने इलेक्ट्रॉनिक कांटे भी ले लिए हैं। व्यवस्थाओं में कमी नहीं होगी। किसानों को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा। -आशा, सचिव, मार्केट कमेटी, करनाल।