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Karnal News: एनएचएम कर्मियों ने बुलंद की आवाज
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- लेबर रूम की स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारी सात दिनों से हड़ताल पर हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। सरकार ने मंगलवार देर शाम एनएचएम के सेवा नियमों को फ्रीज करने के आदेश जारी कर दिए थे। हड़ताल के आठवें दिन सभी एनएचएम कर्मचारी सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन करेंगे।
एनएचएम की हड़ताल के दौरान सबसे अधिक जिला नागरिक अस्पताल का लेबर रूम प्रभावित है। जहां रोजाना 10 से 12 डिलीवरी होती थी वहां पर पिछले छह दिनों में मात्र 16 डिलीवरी ही संभव हो पाई हैं। वहीं ऐसा ही हाल कस्बों की सीएचसी पर लेबर रूम का हुआ पड़ा है। जिले के उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएचएम के तहत एएनएम कार्यरत हैं। जिनके द्वारा बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उनके द्वारा हड़ताल पर जाने के कारण टीकाकरण के सेशन नहीं लगाए जा रहे व बच्चों का टीकाकरण ठप हो गया है।
नागरिक अस्पताल के लेबर रूम में जहां 14 स्टाफ नर्सें तैनात थी अब वहां पर एनएचएम की हड़ताल के चलते मात्र पांच स्टाफ नर्सें रह गई हैं यानी तीन शिफ्टों का काम अब पांच स्टाफ नर्सों के कंधों पर आ गया है। अधिक भार पड़ने पर अब रेफर वाले केसों की संख्या अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा एनसीडी क्लीनिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित फिजियोथैरेपी विभाग की ओपीडी में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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एनएचएम कर्मचारियों की मुख्य मांगें
एनएचएम कर्मचारियों को पॉलिसी बनाकर नियमित किया जाए। सेवा नियमों में रह गई त्रुटियों व वेतन विसंगतियों को ठीक करने के लिए संघ के साथ वार्ता करके उन्हें दूर किया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत सीएचओ कैडर की एसओपी को लागू किया जाए व साथ ही बॉन्ड प्रथा को समाप्त किया जाए।
एनएचएम में कार्यरत जिन-जिन कर्मचारियों पर ड्रेस कोड लागू किया गया है उन्हें वर्दी भत्ता, धुलाई भत्ता दिया जाए। कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर समयाविधि में बढ़ी हुई सीएल, ईएल व सीसीएल प्रदान की जाए और नियमित कर्मियों की तर्ज पर सभी एनएचएम कर्मचारियों को कैशलैस मेडिकल सुविधा दी जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारी सात दिनों से हड़ताल पर हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई है। सरकार ने मंगलवार देर शाम एनएचएम के सेवा नियमों को फ्रीज करने के आदेश जारी कर दिए थे। हड़ताल के आठवें दिन सभी एनएचएम कर्मचारी सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन करेंगे।
एनएचएम की हड़ताल के दौरान सबसे अधिक जिला नागरिक अस्पताल का लेबर रूम प्रभावित है। जहां रोजाना 10 से 12 डिलीवरी होती थी वहां पर पिछले छह दिनों में मात्र 16 डिलीवरी ही संभव हो पाई हैं। वहीं ऐसा ही हाल कस्बों की सीएचसी पर लेबर रूम का हुआ पड़ा है। जिले के उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएचएम के तहत एएनएम कार्यरत हैं। जिनके द्वारा बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उनके द्वारा हड़ताल पर जाने के कारण टीकाकरण के सेशन नहीं लगाए जा रहे व बच्चों का टीकाकरण ठप हो गया है।
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नागरिक अस्पताल के लेबर रूम में जहां 14 स्टाफ नर्सें तैनात थी अब वहां पर एनएचएम की हड़ताल के चलते मात्र पांच स्टाफ नर्सें रह गई हैं यानी तीन शिफ्टों का काम अब पांच स्टाफ नर्सों के कंधों पर आ गया है। अधिक भार पड़ने पर अब रेफर वाले केसों की संख्या अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा एनसीडी क्लीनिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित फिजियोथैरेपी विभाग की ओपीडी में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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एनएचएम कर्मचारियों की मुख्य मांगें
एनएचएम कर्मचारियों को पॉलिसी बनाकर नियमित किया जाए। सेवा नियमों में रह गई त्रुटियों व वेतन विसंगतियों को ठीक करने के लिए संघ के साथ वार्ता करके उन्हें दूर किया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत सीएचओ कैडर की एसओपी को लागू किया जाए व साथ ही बॉन्ड प्रथा को समाप्त किया जाए।
एनएचएम में कार्यरत जिन-जिन कर्मचारियों पर ड्रेस कोड लागू किया गया है उन्हें वर्दी भत्ता, धुलाई भत्ता दिया जाए। कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर समयाविधि में बढ़ी हुई सीएल, ईएल व सीसीएल प्रदान की जाए और नियमित कर्मियों की तर्ज पर सभी एनएचएम कर्मचारियों को कैशलैस मेडिकल सुविधा दी जाए।