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10. एनएच के फ्लाईओवर पर फ्लैक्सीबल पोस्ट लगा रहे जिंदगी की ब्रेक
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करनाल। नेशनल हाईवे के फ्लाईओवर पर लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए गए फ्लैक्सीबल पोस्ट राहगीरों की जिंदगी पर ब्रेक लगा रहे हैं। दरअसल बरसात में नेशनल हाईवे-44 के कई फ्लाईओवर की मिट्टी खिसक गई थी। ऐसे में कोई हादसा न हो, इसलिए एनएचएआई ने यहां फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाते हुए एक लेन को बंद कर दिया था। इससे तीन लेन का हाईवे फ्लाईओवर पर दो लेन में ही सिमट गया। चार माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक एनएचएआई ने इन फ्लाईओवर की मरम्मत नहीं की।
यह हालात पानीपत सीमा से कुरुक्षेत्र तक के 70 किलोमीटर के हाईवे में आठ फ्लाईओवर के हैं, जहां वाहनों के अचानक ब्रेक लगने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। अब धुंध के दिनों में स्थिति और खराब होना तय माना जा रहा है, लेकिन एनएचएआई का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
जुलाई से लेकर अगस्त के अंत तक कई बार शहर के अलावा नेशनल हाईवे की सर्विस लेन पर भी जलभराव की स्थिति बनी। इस दौरान ही कई फ्लाईओवर की साइडों से मिट्टी भी खिसकी थी। जहां पहले वाहनों की टक्कर हुई थी, वहां की ग्रिल भी बरसात में ढह गई थी। उस समय स्थिति को संभालते हुए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीसी के आदेशों के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की थी, ताकि बरसातों के बाद मरम्मत हो सके, लेकिन चार माह में अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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हालात यह हैं कि फ्लाईओवर पर रात के समय हादसे की आशंका बनी रहती है। क्योंकि जहां फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाए हैं, वहां संकेतक लाइट नहीं लगाई गई है। ऐसे में दूर से वाहन चालक को ये डेढ़ फुट के संकेतक दिखाई नहीं पड़ते। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार का कहना है कि धुंध में तो दृश्यता शून्य हो जाती है, उस समय में ये पोस्ट कैसे दिखाई देंगे।
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यह हालात पानीपत सीमा से कुरुक्षेत्र तक के 70 किलोमीटर के हाईवे में आठ फ्लाईओवर के हैं, जहां वाहनों के अचानक ब्रेक लगने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। अब धुंध के दिनों में स्थिति और खराब होना तय माना जा रहा है, लेकिन एनएचएआई का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
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जुलाई से लेकर अगस्त के अंत तक कई बार शहर के अलावा नेशनल हाईवे की सर्विस लेन पर भी जलभराव की स्थिति बनी। इस दौरान ही कई फ्लाईओवर की साइडों से मिट्टी भी खिसकी थी। जहां पहले वाहनों की टक्कर हुई थी, वहां की ग्रिल भी बरसात में ढह गई थी। उस समय स्थिति को संभालते हुए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीसी के आदेशों के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की थी, ताकि बरसातों के बाद मरम्मत हो सके, लेकिन चार माह में अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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हालात यह हैं कि फ्लाईओवर पर रात के समय हादसे की आशंका बनी रहती है। क्योंकि जहां फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाए हैं, वहां संकेतक लाइट नहीं लगाई गई है। ऐसे में दूर से वाहन चालक को ये डेढ़ फुट के संकेतक दिखाई नहीं पड़ते। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार का कहना है कि धुंध में तो दृश्यता शून्य हो जाती है, उस समय में ये पोस्ट कैसे दिखाई देंगे।