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लापरवाही : कोहरा गहराने लगा पर बसें बिना फॉग लाइट भर रही फर्राटा
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पुराने बस स्टैंड पर खड़ी बस में नही लगी फौग लाइट। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कोहरा गहराने लगा है लेकिन रोडवेज की बसें बिना फॉग लाइट के दौड़ रही हैं। यह स्थिति आने वाले दिनों में बड़े हादसों का कारण बन सकती है, जो विभाग की लापरवाही को दिखा रही है। जिले में अधिकांश रोडवेज बसों से फॉग लाइटें गायब हैं। फिलहाल रोडवेज डिपो की ओर से बसों पर रिफलेक्ट टेप जरूर लगाई गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ रिफलेक्ट टेप धुंध में हादसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
धुंध में छोटे वाहन, बाइक सवार और पैदल चलने वाले दिखाई नहीं देते। ऐसे में फॉग लाइटें पीली रोशनी के साथ सड़क पर बेहतर विजिबिलिटी देती हैं और समय रहते सामने आ रहे वाहन या व्यक्ति का पता चल जाता है। हालांकि रोडवेज के अधिकारियों का दावा है कि 150 बसों पर फॉग लाइट लगाने का कार्य शुरू हो चुका है लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि यह कार्य अब कोहरा छाने के बाद ही क्यों शुरू हुआ है। इस बार तो सर्दी भी लेट हुई है। जबकि यह कार्य तो नवंबर माह की शुरुआत में ही जाना चाहिए था। रोजाना हाईवे पर हादसे हो रहे हैं।
कई बसों में बल्ब की सुविधा
रोडवेज विभाग का कहना है कि आधुनिक बसों में फॉग लाइट के स्थान पर बल्ब लगाने का इंतजाम होता है, जिसमें पीली रोशनी का बल्ब लगा दिया जाता है, कुछ पुरानी बसें बिना फॉग लाइट ही सड़क पर दौड़ रही हैं। धुंध बढ़ने पर चालकों को हेडलाइट बंद करके सिर्फ पार्किंग लाइट जलानी पड़ती है, क्योंकि सफेद रोशनी घनी धुंध में नजर आना कम कर देती है।
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अधिकांश बसों में फॉग लाइट लगवा दी गई हैं। नई बसों में ये लाइटें पहले से ही लगी हुई आती हैं। सभी बसों में रिफ्लेक्टर टेप लगा दिए गए हैं। यदि कोई बस रह गई होगी तो उन पर भी एक दो दिन में फॉग लाइट लग जाएगी।
- कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज
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करनाल। कोहरा गहराने लगा है लेकिन रोडवेज की बसें बिना फॉग लाइट के दौड़ रही हैं। यह स्थिति आने वाले दिनों में बड़े हादसों का कारण बन सकती है, जो विभाग की लापरवाही को दिखा रही है। जिले में अधिकांश रोडवेज बसों से फॉग लाइटें गायब हैं। फिलहाल रोडवेज डिपो की ओर से बसों पर रिफलेक्ट टेप जरूर लगाई गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ रिफलेक्ट टेप धुंध में हादसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
धुंध में छोटे वाहन, बाइक सवार और पैदल चलने वाले दिखाई नहीं देते। ऐसे में फॉग लाइटें पीली रोशनी के साथ सड़क पर बेहतर विजिबिलिटी देती हैं और समय रहते सामने आ रहे वाहन या व्यक्ति का पता चल जाता है। हालांकि रोडवेज के अधिकारियों का दावा है कि 150 बसों पर फॉग लाइट लगाने का कार्य शुरू हो चुका है लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि यह कार्य अब कोहरा छाने के बाद ही क्यों शुरू हुआ है। इस बार तो सर्दी भी लेट हुई है। जबकि यह कार्य तो नवंबर माह की शुरुआत में ही जाना चाहिए था। रोजाना हाईवे पर हादसे हो रहे हैं।
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कई बसों में बल्ब की सुविधा
रोडवेज विभाग का कहना है कि आधुनिक बसों में फॉग लाइट के स्थान पर बल्ब लगाने का इंतजाम होता है, जिसमें पीली रोशनी का बल्ब लगा दिया जाता है, कुछ पुरानी बसें बिना फॉग लाइट ही सड़क पर दौड़ रही हैं। धुंध बढ़ने पर चालकों को हेडलाइट बंद करके सिर्फ पार्किंग लाइट जलानी पड़ती है, क्योंकि सफेद रोशनी घनी धुंध में नजर आना कम कर देती है।
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अधिकांश बसों में फॉग लाइट लगवा दी गई हैं। नई बसों में ये लाइटें पहले से ही लगी हुई आती हैं। सभी बसों में रिफ्लेक्टर टेप लगा दिए गए हैं। यदि कोई बस रह गई होगी तो उन पर भी एक दो दिन में फॉग लाइट लग जाएगी।
- कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज