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करनालः स्थापना के बाद से एनडीआरआई में पहली बार इतनी बड़ी घटना, कईयों पर गिर सकती है गाज

Tue, 17 Sep 2019 09:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 17 Sep 2019 09:55 AM IST
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NDRI animals death in karnal
कैटल यार्ड में पशु - फोटो : फाइल फोटो
वर्ष 1955 में स्थापना के बाद से एनडीआरआई में पहली बार इतने बड़े स्तर पर पशुओं की मौत हुई है। इस घटना से संस्थान के सभी वैज्ञानिक सहमे हुए हैं। पशुओं की मौत का पहला कारण तो लापरवाही ही सामने आ रहा है।
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ऐसे में जांच में कई कर्मचारियों और अधिकारियों पर गाज गिरना लाजमी है। हालांकि, प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इतने बड़े स्तर पशुओं की मौत के कारण मामला दिल्ली दरबार तक भी गूंजेगा। फिलहाल सभी अपने बचने के लिए तरीके तलाश रहे हैं और एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
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जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिरकार पशुओं की मौत किन कारणों और हालातों में हुई है। अब सवाल ये है कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही बरती गई है? पशुओं ने ऐसा क्या खाया जिससे एक एक करके पशु मर रहे हैं? और पशुओं की मौत न हो, इसके लिए संस्थान ने क्या इंतजाम किए हैं और क्या उन लोगों को जिम्मेदारी तय की गई है, जिनके कारण संस्थान को इतना बड़ा नुकसान हो गया।
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वर्ष 1955 में स्थापित हुआ था संस्थान
बता दें कि वर्ष 1923 में संस्थान की स्थापना पशुपालन एवं डेयरी इम्पीरियल इंस्टीट्यूट के नाम से बैंगलोर में हुई थी। वर्ष 1955 में मुख्यालय को करनाल में स्थानांतरित कर दिया गया, साथ ही इसका नाम राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान रखा गया। इसके दो क्षेत्रीय केंद्र हैं, जो कि एक बैंगलोर और दूसरा कल्याणी पश्चिम बंगाल में स्थित है।

दक्षिण में पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र कृषि वातावरण के अनुरूप डेयरी विकास के लिए अनुसंधान एवं सहयोग प्रधान करने में लगे हैं। तभी से यहां पर पशुओं पर रिसर्च चल रहा है और डेयरी विकास के लिए वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। वर्ष 1985 को शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन हेतु डिम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हुआ।

विश्व में भैंस का पहला क्लोन बना, अब तक 18 हो चुके

विश्व में भैंस का प्रथम क्लोन (2010) में एनडीआरआई में तैयार किया गया। अब तक करीब 18 क्लोन तैयार किए जा चुके हैं। संस्थान में करीब 2000 पशु रखे हुए हैं, जिन पर शोध कार्य किया जा रहा है। पशु पोषण विभाग नित नए कैटेल फीड एवं मिश्रित खनिज फोर्मूलेशन इजात करने में कार्य कर रहे हैं। ईटीर्टी, आईवीएफ, ओपीयू के द्वारा उत्तम नस्ल के दुधारू पशुओं का प्रजनन पशु जैव-प्रौद्योगिकी, पशु आनुवांशिकी एवं प्रजजन विभागों द्वारा किया जा रहा है। राट्रीय दुग्ध गुणवत्ता एवं रेफरल केंद्र स्थापित है, जहां दूध व दूध से बने पदार्थों की गुणवत्ता की जांच होती है

बरती गई घोर लापरवाही
इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फार एनिमल प्राटेक्शन के अध्यक्ष नरेश कादियान का आरोप है कि एनडीआरआई में पशुओं का फीड देने में भारी लापरवाही बरती गई है। अगर कर्मचारी और वैज्ञानिक सतर्क होते तो संस्थान को इतनी बड़ी हानि नहीं उठानी पड़ती। सप्ताह में रोजाना पशु मर रहे हैं, लेकिन संस्थान के अधिकारी कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं और अब तक पशुओं की मौत का कारण नहीं बता रहे हैं। कादियान का आरोप है कि अगर पशुओं की मौत सांप के काटने से हुई तो फिर पशुओं का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया जा रहा है। मामले को दबाने के लिए संस्थान के अंदर ही पशुओं को जमीन में दबाया जा रहा है।

 
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