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Karnal News: आज से सरसों की खरीद, आढ़ती व किसान बोले-देरी से होगा नुकसान
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इंद्री अनाज मंडी में पहुंची सरसों की सफाई करता मजदूर। संवाद
करनाल/इंद्री। प्रदेश की मंडियों में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है। जिले की अनाज मंडी घरौंडा और इंद्री में आढ़तियों ने देरी से खरीद शुरू होने की बात कहते हुए आपत्ति जताई है। किसानों ओर आढ़तियों का कहना है कि देरी से, बिना किसी मेहनताने या सरकारी सहायता के सरसों की खरीद करना उनके लिए घाटे का सौदा होगा।
आढ़तियों ने कहा कि सरकार को सरसों की खरीद एक मार्च से शुरू करनी चाहिए क्योंकि क्षेत्र में फसल की आवक फरवरी से ही शुरू हो जाती है और मार्च के अंत तक केवल 15 से 20 प्रतिशत फसल ही बचती है। इंद्री के आढ़ती देवी चंद और जय प्रकाश ने बताया कि सरसों की फसल को सुखाने, भंडारण और सफाई में काफी खर्च आता है। इसके अलावा मंडी में पड़ी फसल की रखवाली की जिम्मेदारी भी आढ़तियों पर ही होती है। उन्होंने मांग उठाई कि धान और गेहूं की तरह सरसों की खरीद पर भी आढ़त का भुगतान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
किसान नेता राहुल कलसौरा ने कहा कि सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निजी व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर खरीद रहे हैं।
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किसान पदम सिंह के अनुसार सरकार की ओर से तय 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले निजी खरीद 5200 से 5500 रुपये के बीच हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं ठीक, फिर भी चिंता बरकरार
आढ़ती प्रवीन ने बताया कि अनाज मंडी इंद्री में सरसों की खरीद को लेकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त है और बारदाने की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि गेहूं की खरीद के समय बारदाने की कमी हो सकती है। गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है जबकि बारदाने का टेंडर 30 अप्रैल को खुलने की बात सामने आ रही है।
वर्जन
सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी जबकि गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी। जिले की सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। किसानों की परेशानी के समाधान के लिए हर मंडी में हेल्प डेस्क बनाई गई है। -मुकेश कुमार, नियंत्रक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
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आढ़तियों ने कहा कि सरकार को सरसों की खरीद एक मार्च से शुरू करनी चाहिए क्योंकि क्षेत्र में फसल की आवक फरवरी से ही शुरू हो जाती है और मार्च के अंत तक केवल 15 से 20 प्रतिशत फसल ही बचती है। इंद्री के आढ़ती देवी चंद और जय प्रकाश ने बताया कि सरसों की फसल को सुखाने, भंडारण और सफाई में काफी खर्च आता है। इसके अलावा मंडी में पड़ी फसल की रखवाली की जिम्मेदारी भी आढ़तियों पर ही होती है। उन्होंने मांग उठाई कि धान और गेहूं की तरह सरसों की खरीद पर भी आढ़त का भुगतान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
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किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
किसान नेता राहुल कलसौरा ने कहा कि सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निजी व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर खरीद रहे हैं।
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किसान पदम सिंह के अनुसार सरकार की ओर से तय 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले निजी खरीद 5200 से 5500 रुपये के बीच हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं ठीक, फिर भी चिंता बरकरार
आढ़ती प्रवीन ने बताया कि अनाज मंडी इंद्री में सरसों की खरीद को लेकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त है और बारदाने की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि गेहूं की खरीद के समय बारदाने की कमी हो सकती है। गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी है जबकि बारदाने का टेंडर 30 अप्रैल को खुलने की बात सामने आ रही है।
वर्जन
सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू होगी जबकि गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होगी। जिले की सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। किसानों की परेशानी के समाधान के लिए हर मंडी में हेल्प डेस्क बनाई गई है। -मुकेश कुमार, नियंत्रक, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग