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Karnal News: पांच साल बाद टीबी मरीजों की मृत्यु दर घटी
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- 2019 में 154 तो 2023 में गई 85 मरीजों की जान, जागरूकता और टीबी जांच केंद्र बढ़ने से मिली राहत
- जिले में अब 22 स्थानों पर टीबी की हो रही निशुल्क जांच व मिली रही निशुल्क दवाइयां
अनुज शर्मा
करनाल। जिले में टीबी जांच केंद्रों की संख्या बढ़ने, निशुल्क दवाइयों और लोगों में टीबी के प्रति आई जागरूकता के कारण पिछले पांच सालों में पहली बार मृत्यु दर काफी कम देखने को मिली है। जहां पिछले वर्ष टीबी से 227 मौतें हुई थी, वहीं इस वर्ष 85 मौतें हुई हैं। मृत्यु दर की बात करें तो यह आंकड़ा पिछले वर्ष 5.18 पर था और इस वर्ष यह आंकड़ा 2.68 पर स्थिर है।
जिला टीबी की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि पिछले पांच सालों में स्वास्थ्य विभाग की टीबी विंग ने टीबी के मरीजों के लिए जिलेभर में सुविधाओं का विस्तार किया है। जहां पहले सिर्फ करनाल शहर में टीबी की जांच होती थी, वहीं अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक में कोई भी संदिग्ध मरीज जाकर निशुल्क टीबी की जांच करवा सकता है। इसके अलावा जिले में विशेष अभियान चलाकर घर-घर तक टीबी के मरीजों की पहचान और उनकी समय रहते हुए दवाओं की सुविधा दी गई। जिससे पिछले पांच सालों में पहली बार मौत का आंकड़ा 100 से नीचे रहा है। पीपीएम अधिकारी स्नेहा राणा ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों को इलाज पूरा होने तक 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए वितरित किए जा रहे हैं। जिससे भी मौत के आंकड़े में गिरावट आई है। संवाद
टीबी के लक्षण
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, शाम के समय बुखार आना, खांसते समय बलगम में खून आना, छाती में दर्द, सांस फूलना, गर्दन या बगल में गांठें, भूख और वजन कम होना, रात के समय पसीना आना।
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जिले में 22 स्थानों पर खुले टीबी जांच केंद्र
नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, सब डिविजनल अस्पताल नीलोखेड़ी व असंध, सीएचसी इंद्री, कुंजपुरा, निगदू, तरावड़ी, घरौंडा, निसिंग, पीएचसी घीड़, बरसत, जुंडला, जलमाना, बल्ला, खुंखनी, भादसो, मधुबन, गगसीना, सांभली, बडौता व यूपीएचसी राम नगर।
पांच वर्षों में आए टीबी के केस, मौत व मृत्यु दर
वर्ष केस मौत मृत्यु दर
2019 3710 154 4.15
2020 4013 184 4.58
2021 3658 213 5.82
2022 4376 227 5.18
2023 4057 85 2.68
नोट : यह डाटा स्वास्थ्य विभाग की टीबी विंग से लिया गया है।
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- जिले में अब 22 स्थानों पर टीबी की हो रही निशुल्क जांच व मिली रही निशुल्क दवाइयां
अनुज शर्मा
करनाल। जिले में टीबी जांच केंद्रों की संख्या बढ़ने, निशुल्क दवाइयों और लोगों में टीबी के प्रति आई जागरूकता के कारण पिछले पांच सालों में पहली बार मृत्यु दर काफी कम देखने को मिली है। जहां पिछले वर्ष टीबी से 227 मौतें हुई थी, वहीं इस वर्ष 85 मौतें हुई हैं। मृत्यु दर की बात करें तो यह आंकड़ा पिछले वर्ष 5.18 पर था और इस वर्ष यह आंकड़ा 2.68 पर स्थिर है।
जिला टीबी की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि पिछले पांच सालों में स्वास्थ्य विभाग की टीबी विंग ने टीबी के मरीजों के लिए जिलेभर में सुविधाओं का विस्तार किया है। जहां पहले सिर्फ करनाल शहर में टीबी की जांच होती थी, वहीं अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक में कोई भी संदिग्ध मरीज जाकर निशुल्क टीबी की जांच करवा सकता है। इसके अलावा जिले में विशेष अभियान चलाकर घर-घर तक टीबी के मरीजों की पहचान और उनकी समय रहते हुए दवाओं की सुविधा दी गई। जिससे पिछले पांच सालों में पहली बार मौत का आंकड़ा 100 से नीचे रहा है। पीपीएम अधिकारी स्नेहा राणा ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों को इलाज पूरा होने तक 500 रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए वितरित किए जा रहे हैं। जिससे भी मौत के आंकड़े में गिरावट आई है। संवाद
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टीबी के लक्षण
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, शाम के समय बुखार आना, खांसते समय बलगम में खून आना, छाती में दर्द, सांस फूलना, गर्दन या बगल में गांठें, भूख और वजन कम होना, रात के समय पसीना आना।
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जिले में 22 स्थानों पर खुले टीबी जांच केंद्र
नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, सब डिविजनल अस्पताल नीलोखेड़ी व असंध, सीएचसी इंद्री, कुंजपुरा, निगदू, तरावड़ी, घरौंडा, निसिंग, पीएचसी घीड़, बरसत, जुंडला, जलमाना, बल्ला, खुंखनी, भादसो, मधुबन, गगसीना, सांभली, बडौता व यूपीएचसी राम नगर।
पांच वर्षों में आए टीबी के केस, मौत व मृत्यु दर
वर्ष केस मौत मृत्यु दर
2019 3710 154 4.15
2020 4013 184 4.58
2021 3658 213 5.82
2022 4376 227 5.18
2023 4057 85 2.68
नोट : यह डाटा स्वास्थ्य विभाग की टीबी विंग से लिया गया है।