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Karnal News: मिल ने नहीं लौटाया 5.30 करोड़ का चावल, प्राथमिकी दर्ज

Tue, 20 Jan 2026 03:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Tue, 20 Jan 2026 03:05 AM IST
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Mill did not return rice worth Rs 5.30 crore, FIR lodged
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। घरौंडा के मैसर्स शिवाय एग्रोटेक राइस मिल ने सरकारी धान के बदले निर्धारित समय में सरकार को 12 हजार 311 क्विंटल चावल नहीं लौटाया है। इसकी कीमत करीब 5.30 करोड़ रुपये बताई गई है। खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक सज्जन मान की शिकायत पर घरौंडा थाना पुलिस ने मिल मालिक, गारंटर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस के अनुसार शिकायत में बताया गया है कि जिला मिलिंग कमेटी ने जीटी रोड घरौंडा स्थित मैसर्स शिवाय एग्रोटेक को खरीफ वर्ष 2024-25 में मिल को सरकारी धान की मिलिंग के लिए चुना था। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार घरौंडा अनाज मंडी से 27 हजार 198 क्विंटल और असंध अनाज मंडी से करीब 9 हजार 187 क्विंटल धान मिलर को दिया गया था। मिल को कुल 36 हजार 385 क्विंटल धान सौंपा गया।
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नियमों के मुताबिक 67 प्रतिशत वापसी के आधार पर करीब 24 हजार 378 क्विंटल चावल सरकारी एजेंसियों को वापस करना था। मिलर ने 30 सितंबर, 2025 तक सरकार को केवल 12 हजार 66 क्विंटल चावल ही भेजा। करीब 12 हजार 311 क्विंटल चावल बकाया रहा। इससे सरकार को करीब पांच करोड़ 30 लाख 14 हजार 204 रुपये का नुकसान हुआ है।
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घरौंडा थाना प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि डीएफएससी विभाग के निरीक्षक की शिकायत पर सेक्टर-8, करनाल निवासी मिल मालिक विकास गुप्ता, सेक्टर-7 निवासी गारंटर सतीश कुमार और सेक्टर-8 निवासी अंकित गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।


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भौतिक सत्यापन में मिल में धान मिला न चावल, सरकार को 5.30 करोड़ का नुकसान

तय समय सीमा के अंदर सरकार को चावल न लौटाने पर खाद्य आपूर्ति विभाग ने मिल का भौतिक सत्यापन करवाया। मिल के अंदर न तो चावल मिला और न ही मिलिंग के लिए धान मिली। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि मिलर ने सरकारी चावल को बाहर बाजार में बेच दिया है। इससे सरकार को करीब पांच करोड़ 30 लाख 14 हजार 204 रुपये का नुकसान पहुंचा है। सरकार का यह आंकलन 30 सितंबर 2025 तक का है। इसमें ब्याज, होल्डिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क शामिल नहीं किया गया है। वहीं बकाया चावल लौटाने के लिए विभाग की ओर से मिलर को कई बार नोटिस जारी किए गए। इसके बावजूद मिलर ने केवल 20 लाख रुपये ही जमा करवाए।
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