{"_id":"5d34d68a8ebc3e6c9b480a14","slug":"medical-association-karnal-news-knl871499","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंबित मांगों को लेकर बंद कर सकते हैं पोस्टमार्टम, एचसीएमएस की सरकार को चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंबित मांगों को लेकर बंद कर सकते हैं पोस्टमार्टम, एचसीएमएस की सरकार को चेतावनी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्रदेशभर के डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन का ऐलान कर दिया है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएस) ने प्रदेश सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देकर चेताया है कि अगर इस अवधि में उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे हड़ताल पर भी जा सकते हैं। साथ ही पोस्टमार्टम करना भी बंद कर सकते हैं। रविवार को सीएम मनोहर लाल के विधानसभा क्षेत्र करनाल में एचसीएमएस की राज्यस्तरीय बैठक में सर्वसहमति से यह फैसला लिया गया।
इससे पहले, एचसीएम एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. जसबीर सिंह पंवार और महासचिव डॉ. राजेश श्योकंद ने प्रदेश के सभी जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ तीन घंटे तक समस्याओं और मांगों पर मंथन किया। इस दौरान जिलावार सभी पदाधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। बैठक के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ खुलकर रोष जाहिर किया। डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि सरकार धीरे-धीरे विभाग को निजीकरण की तरफ ले जा रही है। दो साल से नियमित डाक्टरों की भर्ती नहीं हुई है, इससे स्वास्थ्य विभाग के पास लगातार डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। डॉ. जसबीर ने कहा कि सरकार डॉक्ट रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। दिसंबर-2018 से उनकी मांगें एसीएस व स्वास्थ्य मंत्री से अप्रूवल होने के बाद सीएम के पास पड़ी है। सात माह के बाद भी इन मांगों को लेकर सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया है। इनको लेकर वे कई बार सीएम और उनके अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आए। अब डॉक्टरों का सब्र जवाब दे गया है। 15 दिनों में सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो प्रदेशभर के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर जा सकते हैं। इस मौके पर डॉ. शील कांत, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. सुखपाल, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. पंकज वत्स, डॉ. शमशेर, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. नीलम वर्मा, डॉ. संदीप अबरोल, डॉ. रविंद्र संधु, डॉ. राजेश श्योकंद समेत प्रदेश के सभी जिलों के एसोसिएशन पदाधिकारी मौजूद रहे।
कांट्रेक्ट पर डॉक्टरों का वेतन एक लाख, रेगुलर का 70 हजार क्यों ?
एसोसिएशन ने सरकार के उस फैसले का भी विरोध किया है, जिसमें कांट्रेक्ट पर रखे जाने वाले एमबीबीएस डॉक्टर का वेतन एक लाख रुपये और स्पेशलिस्ट डॉक्टर का वेतन सवा लाख रुपये करने का फैसला लिया गया है। एसोसिएशन का तर्क है कि रेगुलर डॉक्टर (एमबीबीएस) या फिर स्पेशलिस्ट का वेतन 70 हजार रुपये है। एसोसिएशन ने मांग की है कि नियमित डॉक्टरों का वेतन भी बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया कि ठेके पर डॉक्टर नहीं रखे जाने चाहिए, इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा। इससे अच्छा यह रहेगा कि नियमित डॉक्टरों का वेतन बढ़ाया जाए।
विज्ञापन
जांच कमेटी पर जताया एतराज
प्रदेश सरकार द्वारा पर्ची पर लिखी जाने वाली दवाइयों को लेकर तहसीलदार, डीएसपी व ड्रग इंस्पेक्टर की कमेटी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में दवाइयां नहीं होने के कारण मजबूरी में डॉक्टरों को बाहर की दवा लिखनी पड़ती है, अगर अस्पताल में दवाइयां पूरी होंगी, तो कोई क्यों बाहर की लिखेगा? एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा है कि वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन यह जांच विभाग के ही लोगों से कराई जाए, जिसको मेडिकल लाइन की जानकारी हो। इस कमेटी को भंग किया जाए।
एसीएस व स्वास्थ्य मंत्री जता चुके हैं सहमति, सीएम के पास अटकी फाइल
एसोसिएशन ने मुख्य रूप से सरकार से दो मांगें रखी हैं। इनमें पहली मांग है कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर के लिए स्पेशल पैकेज दिया जाए, या फिर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के अतिरिक्त इंक्रीमेंट लगाए जाए। इसके साथ ही एसोसिएशन ने डीएसीपी (डायनेमिक करियर एसोरड प्रोगेशन) को लेकर दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर चार बार देने की मांग की। फिलहाल प्रदेश में तीन एसीपी 5, 10 और 15 साल बाद दिए जाते हैं, जबकि दूसरे प्रदेशों में चार दिए जाते हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि सर्विस के 4,9,13 व 20 साल के बाद दिया जाए।
वर्किंग में दो जबकि जरूरत है छह हजार डॉक्टरों की
एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से छह हजार डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि वर्किंग में केवल दो हजार डॉक्टर हैं। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा 3250 पद स्वीकृत हैं। उन्होंने बताया कि वर्कलोड ज्यादा होने के कारण डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं। एक-एक डॉक्टर 200-200 मरीजों को चेक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब की जनसंख्या 2.75 करोड़ है, जबकि हरियाणा की जनसंख्या 2.50 करोड़ है, लेकिन डाक्टरों की तुलना करें तो पंजाब में चार हजार डॉक्टर हैं, हरियाणा में केवल 2600 हैं। इनमें से 500 के करीब डॉक्टर पीजी कोर्स के लिए चले जाते हैं। ऐसे में अस्पतालों में केवल दो हजार ही काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कितनी बड़ी विडंबना है कि सीएम के जिले में तीन सीएचसी के पास एक भी डॉक्टर नहीं है।
विज्ञापन
इससे पहले, एचसीएम एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. जसबीर सिंह पंवार और महासचिव डॉ. राजेश श्योकंद ने प्रदेश के सभी जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ तीन घंटे तक समस्याओं और मांगों पर मंथन किया। इस दौरान जिलावार सभी पदाधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। बैठक के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ खुलकर रोष जाहिर किया। डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि सरकार धीरे-धीरे विभाग को निजीकरण की तरफ ले जा रही है। दो साल से नियमित डाक्टरों की भर्ती नहीं हुई है, इससे स्वास्थ्य विभाग के पास लगातार डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। डॉ. जसबीर ने कहा कि सरकार डॉक्ट रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। दिसंबर-2018 से उनकी मांगें एसीएस व स्वास्थ्य मंत्री से अप्रूवल होने के बाद सीएम के पास पड़ी है। सात माह के बाद भी इन मांगों को लेकर सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया है। इनको लेकर वे कई बार सीएम और उनके अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आए। अब डॉक्टरों का सब्र जवाब दे गया है। 15 दिनों में सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो प्रदेशभर के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर जा सकते हैं। इस मौके पर डॉ. शील कांत, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. सुखपाल, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. पंकज वत्स, डॉ. शमशेर, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. नीलम वर्मा, डॉ. संदीप अबरोल, डॉ. रविंद्र संधु, डॉ. राजेश श्योकंद समेत प्रदेश के सभी जिलों के एसोसिएशन पदाधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कांट्रेक्ट पर डॉक्टरों का वेतन एक लाख, रेगुलर का 70 हजार क्यों ?
एसोसिएशन ने सरकार के उस फैसले का भी विरोध किया है, जिसमें कांट्रेक्ट पर रखे जाने वाले एमबीबीएस डॉक्टर का वेतन एक लाख रुपये और स्पेशलिस्ट डॉक्टर का वेतन सवा लाख रुपये करने का फैसला लिया गया है। एसोसिएशन का तर्क है कि रेगुलर डॉक्टर (एमबीबीएस) या फिर स्पेशलिस्ट का वेतन 70 हजार रुपये है। एसोसिएशन ने मांग की है कि नियमित डॉक्टरों का वेतन भी बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया कि ठेके पर डॉक्टर नहीं रखे जाने चाहिए, इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा। इससे अच्छा यह रहेगा कि नियमित डॉक्टरों का वेतन बढ़ाया जाए।
विज्ञापन
जांच कमेटी पर जताया एतराज
प्रदेश सरकार द्वारा पर्ची पर लिखी जाने वाली दवाइयों को लेकर तहसीलदार, डीएसपी व ड्रग इंस्पेक्टर की कमेटी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में दवाइयां नहीं होने के कारण मजबूरी में डॉक्टरों को बाहर की दवा लिखनी पड़ती है, अगर अस्पताल में दवाइयां पूरी होंगी, तो कोई क्यों बाहर की लिखेगा? एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा है कि वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन यह जांच विभाग के ही लोगों से कराई जाए, जिसको मेडिकल लाइन की जानकारी हो। इस कमेटी को भंग किया जाए।
एसीएस व स्वास्थ्य मंत्री जता चुके हैं सहमति, सीएम के पास अटकी फाइल
एसोसिएशन ने मुख्य रूप से सरकार से दो मांगें रखी हैं। इनमें पहली मांग है कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर के लिए स्पेशल पैकेज दिया जाए, या फिर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के अतिरिक्त इंक्रीमेंट लगाए जाए। इसके साथ ही एसोसिएशन ने डीएसीपी (डायनेमिक करियर एसोरड प्रोगेशन) को लेकर दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर चार बार देने की मांग की। फिलहाल प्रदेश में तीन एसीपी 5, 10 और 15 साल बाद दिए जाते हैं, जबकि दूसरे प्रदेशों में चार दिए जाते हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि सर्विस के 4,9,13 व 20 साल के बाद दिया जाए।
वर्किंग में दो जबकि जरूरत है छह हजार डॉक्टरों की
एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से छह हजार डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि वर्किंग में केवल दो हजार डॉक्टर हैं। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा 3250 पद स्वीकृत हैं। उन्होंने बताया कि वर्कलोड ज्यादा होने के कारण डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं। एक-एक डॉक्टर 200-200 मरीजों को चेक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब की जनसंख्या 2.75 करोड़ है, जबकि हरियाणा की जनसंख्या 2.50 करोड़ है, लेकिन डाक्टरों की तुलना करें तो पंजाब में चार हजार डॉक्टर हैं, हरियाणा में केवल 2600 हैं। इनमें से 500 के करीब डॉक्टर पीजी कोर्स के लिए चले जाते हैं। ऐसे में अस्पतालों में केवल दो हजार ही काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कितनी बड़ी विडंबना है कि सीएम के जिले में तीन सीएचसी के पास एक भी डॉक्टर नहीं है।