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पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के आक्रोश को नहीं भांप पाया प्रशासन

Tue, 07 Mar 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Tue, 07 Mar 2017 12:17 AM IST
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marrage ceremony, marrage, two party, conflict, police, villagers, karnal
dharna - फोटो : amar ujala
गांव सग्गा में घुड़चढ़ी को लेकर दो वर्गों के आमने-सामने आने के मामले के मामले में जिला प्रशासन व पुलिस के गंभीरता नहीं दिखाने के कारण आखिरकार वही हुआ जिसकी पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी थी। आखिरकार पीड़ित परिवार ने गांव छोड़ दिया।  
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तीन दिन पहले परिवार ने गांव छोड़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे हलके में लिया। न तो किसी के खिलाफ केस दर्ज किया और न ही दोनों ही समुदायों को बैठाकर सौहार्द पैदा कर पाए। पीड़ित परिवार को सुरक्षा और विश्वास बहाली कराने में प्रशासन पूरी से नाकाम रहा। इतना ही नहीं प्रशासन का खुफिया तंत्र से लेकर आला अधिकारी तक इस पूरे प्रकरण में फेल नजर आए। धरना समाप्त कराने को लेकर प्रशासन की तरफ से चलाई गई सभी तरकीब आक्रोशित ग्रामीणों के आगे फेल हो गई। सुबह दस बजे से लेकर देर रात तक ग्रामीणों ने जुलूस निकाला। धरना खत्म कराने को लेकर अधिकारियों की सांसें फूली रहीं।
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इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता कि डीसी और एसपी के हाथ से मामला निकलने के बाद अंबाला के एडीसी आरके सिंह को बुलाना पड़ा। हालांकि, उनके प्रयास भी काम नहीं कर पाये और आंदोलनकारियों ने उनकी बात भी नहीं मानी। देर रात, एक महिला बेहोश हो गई तो आनन फानन में एंबुलेंस में उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया है। देर रात तक महिलाएं, पुुरुष व युवक लघु सचिवालय के मुख्य के बाहर ही धरने पर बैठे रहे। धरनास्थल पर बैठे लोग गांव में सुरक्षा की मांग करते हुए व आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। हालांकि, तीन घंटे तक चली बैठक में प्रशासन ने सारी मांगें मानने की बात कही, लेकिन बावजूद इसके धरना समाप्त नहीं हो पाया। देर रात तक डीसी मनदीप सिंह र्बाड़, एसपी जेएस रंधावा समेत, एसडीएम समेत अन्य अधिकारी लघु सचिवालय के अंदर ही बंधक की तरह रहे। मुख्य गेट पर प्रदर्शनकारी धरना देते रहे, जबकि अधिकारी धरना समाप्त कराने को तरकीब निकालते रहे।
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अहम बात यह है कि पीड़ित परिवार के सदस्य न प्रशासन पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं और प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर सख्त नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके मामले को गंभीरता से नहीं लिया और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई की। खुफिया विभाग से लेकर आला अधिकारी तक मामले को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखा पाए और न ही पलायन तक की बात को समझ पाये। प्रदर्शनकारियों की कोई भी रणनीति प्रशासन नहीं पकड़ पाया। महिलाओं का आरोप है कि जिले के आला अधिकारी मामले में कार्रवाई की बजास समझौते के लिए दबाव बनाते रहे। उधर, देर रात तक डीसी और एसपी समेत तमाम अधिकारी धरना खत्म कराने को लेकर अलग अलग तरकीब बनाते रहे, लेकिन उनकी को भी तरकीब काम नहीं आ सकी। वहीं, दूसरी ओर सभी की बातें अनसुनी कर सड़क पर ही लोगों ने निर्मल कुटिया की ओर से भेजे गए लंगर में भोजन किया। इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं व बच्चे सड़क पर ही लेट गए।

गांव में तनाव की स्थिति, कार्रवाई पर अड़े
सुबह से लेकर रात तक हुए पूरे घटनाक्रम पर गांव सग्गा में पूरी तरह से तनाव बरकरार है। हालांकि, पीड़ित परिवार से ज्यादातर शहर में आ चुके हैं, उधर सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल गांव में तैनात किया गया। उधर, दूसरे समाज के लोग भी गांव में पंचायत कर रहे हैं और पूरे मामले को लेकर नजर बनाए हुए हैं। उधर, डीसी और एसपी लगातार ग्रामीणों से संपर्क साधते रहे।


नेतृत्वहीन हुआ धरना, कमेटी की बात नहीं मान रहे
सुबह गांव छोड़ने के बाद से लेकर शाम तक आंदोलन पूरी तरह से नेतृत्वहीन में दिखा। रात को आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया है और सभी की सहमति से बनी कमेटी की ओर से प्रशासन से की गई बात को भी आंदोलनकारियों ने मानने से इंकार कर दिया। रात को पूरा मामला युवाओं के हाथ में रहा और अलग अलग युवा अपनी अपनी बात कहते नजर आए। कमेटी धरना समाप्त करने पर समझाने में जुटी रही, जबकि युवाओं ने मना कर दिया।
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