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Haryana: आढ़तियों और श्रमिकों के फंसे 482.52 करोड़, अभी तक नहीं हुआ सरकार की ओर से भुगतान
Sat, 02 Dec 2023 12:26 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:26 AM IST
सार
धान की खरीद बंद हो चुकी है, मगर अभी तक सरकार की ओर से भुगतान नहीं हुआ है। आढ़तियों ने सरकार से 10 दिन के भीतर सरकार से ब्याज समेत बकाया मांगा है। मजदूर समय पर मजदूरी नहीं मिलने पर उधार लेकर अपने राज्य लौट रहे हैं।
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धान खरीद।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश में धान खरीद बंद हो चुकी है मगर अभी तक करनाल समेत विभिन्न जिलों के आढ़तियों को न तो कमीशन (आढ़त राशि) मिला है और न ही श्रमिकों को मजदूरी। आढ़ती व मजदूरी मिलाकर करनाल के करीब 80.49 करोड़ और पूरे प्रदेश के 482 करोड़ 52 लाख रुपये सरकार के पास फंसे हुए हैं। अब हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने 10 दिन के भीतर ब्याजसहित आढ़त व मजदूरी देने की मांग की है।
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हर साल राज्य में 15 नवंबर तक धान की खरीद की जाती है लेकिन इस बार करनाल जिले में छह नवंबर तो कई अधिकतर जिलों में 10 नवंबर तक धान की खरीद बंद कर दी गई। करनाल जिले में इस बार कुल 97 लाख 84 हजार 440 क्विंटल धान की खरीद की गई। आढ़तियों को सरकार की ओर से 45.88 रुपये प्रति क्विंटल की आढ़त दी जाती है, जबकि श्रमिकों को 36.80 रुपये प्रति क्विंटल की मजदूरी दी जाती है। इस आंकड़े के अनुसार करनाल जिले की सभी मंडियों में धान की कुल खरीद पर 44 करोड़ 49 लाख 10 हजार 107 रुपये की आढ़त और 36 करोड़ 67 हजार 392 रुपये की मजदूरी यानी कुल 80 करोड़ 49 लाख 77 हजार 499 रुपये बकाया है।
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हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार हरियाणा राज्य में इस बार पांच करोड़, 83 लाख 60 हजार क्विंटल धान की खरीद हुई है। कुल खरीद पर प्रदेशभर में कुल बकाया आढ़त के 267 करोड़ 75 लाख 56 हजार 800 रुपये और मजदूरी के 214 करोड़ 76 लाख 48 हजार रुपये बकाया हैं।
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उनके अनुसार श्रमिक अधिकतर बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से आते हैं, जिन्हें सीजन के बाद अपने राज्य वापस लौटना होता है, सीजन खत्म हो चुका है। फिलहाल वे मजदूरी लिए ही वापस लौट रहे हैं। अधिकतर श्रमिक आढ़तियों से उधार रुपये लेकर गए हैं, जिन्हें बकाया मिलने पर चुकता करेंगे। उन्होंने कहा कि कम से कम मजदूरों को तो उनकी मजदूरी समय पर मिल जानी चाहिए।
सरकार ने खरीद बंद होने के 15 दिनों के भीतर आढ़तियों की दामी यानी आढ़त और श्रमिकों की मजदूरी देने व देरी होने पर ब्याज देने की बात कही थी। अब खरीद बंद हुए 20 से 25 दिन हो चुके हैं लेकिन पूरे राज्य में किसी भी आढ़ती व श्रमिक को आढ़त व मजदूरी नहीं मिली है। सरकार ने पहले भी भुगतान में देरी की थी लेकिन कभी भी ब्याज नहीं दिया। सरकार को अपना वादा निभाना चाहिए, जितने दिन भी भुगतान में देरी हो रही है उतने दिन का ब्याजसहित भुगतान करना चाहिए। -रजनीश चौधरी, हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।