{"_id":"67825b3dd440d02fd40b7ca5","slug":"makar-sankranti-after-19-years-in-bhaum-pushya-nakshatra-karnal-news-c-18-knl1008-557433-2025-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: भौम पुष्य नक्षत्र में 19 साल बाद मकर संक्रांति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: भौम पुष्य नक्षत्र में 19 साल बाद मकर संक्रांति
Sat, 11 Jan 2025 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 11 Jan 2025 10:57 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भौम पुष्य योग में मकर संक्रांति 14 जनवरी मंगलवार को मनाई जाएगी। ये योग लगभग 19 साल के बाद बन रहा है। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्ठी वल्लब के बताया कि सुबह आठ बजकर 55 मिनट में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में इसी समय महाकुंभ का आरंभ प्रथम शाही स्नान से होगा। यह संक्रांति मेष, वृष, कर्क, तुला, बृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को शुभ देगी पर शेष राशि वालों को दौड़ भाग करने वाली रहेगी। मकर संक्रांति को स्नान और दान हवन करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन तिलों से हवन करना, तिलों का दान, खिचड़ी का दान, देसी घी का दान, कंबल का दान, गर्म वस्त्नों का दान करना लाभकारी माना जाता है।
पंडित षष्ठी वल्लब के अनुसार मकर संक्रांति के सबसे पहले पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग है। इस योग में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए सनातन धर्म में पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। इस योग का समापन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर होगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग है। पंडित के अनुसार वर्षों बाद मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र का संयोग है।
विज्ञापन
करनाल। भौम पुष्य योग में मकर संक्रांति 14 जनवरी मंगलवार को मनाई जाएगी। ये योग लगभग 19 साल के बाद बन रहा है। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्ठी वल्लब के बताया कि सुबह आठ बजकर 55 मिनट में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में इसी समय महाकुंभ का आरंभ प्रथम शाही स्नान से होगा। यह संक्रांति मेष, वृष, कर्क, तुला, बृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को शुभ देगी पर शेष राशि वालों को दौड़ भाग करने वाली रहेगी। मकर संक्रांति को स्नान और दान हवन करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन तिलों से हवन करना, तिलों का दान, खिचड़ी का दान, देसी घी का दान, कंबल का दान, गर्म वस्त्नों का दान करना लाभकारी माना जाता है।
पंडित षष्ठी वल्लब के अनुसार मकर संक्रांति के सबसे पहले पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग है। इस योग में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए सनातन धर्म में पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। इस योग का समापन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर होगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग है। पंडित के अनुसार वर्षों बाद मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र का संयोग है।

मेरठ---एसएन फार्म हाउस 100 फुटा रोड मृतको के शवो को कबिस्तान ले जाते लोगस ------नीटू
विज्ञापन