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Karnal News: बीमारी में महेंद्र का सहारा बने पत्नी मोहिनी और बेटा पीयूष... पीछे-पीछे ही चले गए

Thu, 02 Oct 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 02 Oct 2025 01:27 AM IST
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Mahendra's wife Mohini and son Piyush became his support during his illness... and they followed him.
करनाल। घर के मुखिया गांव फरीदपुर निवासी महेंद्र जुनेजा (51) को वर्ष 2020 में कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। बीमारी के बाद वह खुद को कमजोर महसूस करने लगे थे। ऐसे में पत्नी मोहिनी (45) और बेटे पीयूष (22) और हार्दिक (18) उनका सहारा बने। बीमारी से लड़ने और कामकाज में संतुलन बैठाने में पत्नी और बड़े बेटे ने हाथ बंटाया। उनके जाने के बाद पत्नी मोहिनी और बेटा पियूष भी पीछे-पीछे ही चल बसे। आसपास के लोग कह रहे हैं कि वे हमेशा एकसाथ रहने की बात किया करते थे...।
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महेंद्र के भाई राजेंद्र ने बताया कि 25 साल पहले महेंद्र और मोहिनी की शादी हुई थी। दो बेटे हुए। बेटों को व्यवसाय में स्थापित करने के बाद दोनों शादी के सपने संजो रहे थे। कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। खुशियों भरे परिवार में अचानक सबकुछ बिखर गया।
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कैंसर से कमजोर पड़ते महेंद्र जुनेजा की 22 सितंबर को मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद बड़े बेटे पीयूष ने उनका अंतिम संस्कार किया था। बुधवार को दसवां दिन होने पर अस्थियां लेकर परिवार हरिद्वार गया। रास्ते में हुए सड़क हादसे में बेटे पीयूष और पत्नी मोहिनी की मौत हो गई। हादसे में घायल छोटे बेटे हार्दिक की हालत भी खराब है। वह अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है। परिवार व रिश्तेदार बेटे के तंदरुस्त होने की कामना कर रहे हैं। ताकि महेंद्र जुनेजा का परिवार आगे चलता रहे।
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स्कूल की पढ़ाई के बाद संभाल लिया था पिता का काम

महेंद्र जुनेजा की पानीपत में बरसत रोड पर हार्डवेयर एवं सेनेटरी की दुकान है। दोनों बेटों ने घरौंडा के स्कूल से पढ़ाई की थी। पिता को कैंसर होने के बाद 12वीं की पढ़ाई पूरी करके बड़े बेटे पीयूष ने घर चलाने के लिए पिता की दुकान पर हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। काफी समय से वह ही पूरा कामकाज देख रहा था। छोटा बेटा हार्दिक भी 10वीं की पढ़ाई के बाद बड़े भाई की मदद के लिए दुकान पर जाता था। घर पर मां मोहिनी पिता महेंद्र जुनेजा की देखभाल करती थीं। पीयूष स्कूल के बाद आगे की पढ़ाई भी साथ-साथ कर रहा है।




आंखों के सामने बिखर गया लाडले छोटे भाई का घर

अपने परिवार में महेंद्र जुनेजा सबसे छोटे थे। उनके तीन बड़े भाई और तीन बहनें थीं। भाई राजेंद्र ने बताया कि सबसे छोटा होने के कारण शुरु से ही सभी का उनसे खास स्नेह रहा। सुख-दुख में सभी महेंद्र जुनेजा को सबसे पहले पूछते थे। आंखों के सामने बड़े हुए, शादी हुई। अब बच्चों को स्थापित करने की चिंता में लगे रहते थे। उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा है कि लाडले भाई का घर ऐसे बिखर गया। कैंसर का पता चलने के बाद से ही सभी मायूस थे लेकिन कभी किसी ने उन्हें ऐसा एहसास नहीं होने दिया कि वह बीमार हैं। हर कोई उन्हें मजबूत होने का दिलासा देता था। किसी के आंसू नहीं थम रहे हैं।
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