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देवों के देव महादेव हर लेते हैं कष्ट : रसिक बिहारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सग्गा गांव में शिव महापुराण कथा में प्रवचन करते हुए रसिक बिहारी महाराज ने कहा कि भगवान शिव की कथा जीवन के बड़े से बड़े पाप, ताप और संताप को दूर कर सकती है। जीवन में कितनी भी बड़ा संकट हो उन्हें देवों के देव महादेव हर लेते हैं। महादेव हमेशा अपने भक्तों के निकट होता है। इस कलिकाल में सबसे सरल पूजा अगर किसी देव की है, तो वह देवाधिदेव महादेव की है। जीवन के दिनचर्या में मात्र एक लोटा जल नित्य भगवान शंकर के शिवलिंग पर चढ़ने मात्र से बड़ी से बड़ी समस्याएं दूर की जा सकती हैं।
कलयुग में जीवमात्र को भगवान महादेव की कथा का रसपान करने से रोग, भय, संताप आदि का नाश हो जाता है और पुण्य की भागी बन जाते हैं। महापुराण सुनने मात्र से ही वंश में वृद्धि होती है। यह कल्पवृक्ष के समान है, जो भी इसे जिस भावना से सुनता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें सभी सुख प्रदान करते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े प्रयास की आवश्यकता नहीं, बल्कि केवल सच्ची श्रद्धा और भक्ति ही पर्याप्त है।
स्वामी ने बताया कि भगवान शिव की महिमा अनंत और अपार है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों में कोई भी ऐसा ग्रंथ नहीं है जिसमें भगवान शिव की महिमा का वर्णन न हुआ हो। भगवान शिव के अनेक नाम हैं, लेकिन उनका सबसे प्रिय नाम महादेव है।
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करनाल। सग्गा गांव में शिव महापुराण कथा में प्रवचन करते हुए रसिक बिहारी महाराज ने कहा कि भगवान शिव की कथा जीवन के बड़े से बड़े पाप, ताप और संताप को दूर कर सकती है। जीवन में कितनी भी बड़ा संकट हो उन्हें देवों के देव महादेव हर लेते हैं। महादेव हमेशा अपने भक्तों के निकट होता है। इस कलिकाल में सबसे सरल पूजा अगर किसी देव की है, तो वह देवाधिदेव महादेव की है। जीवन के दिनचर्या में मात्र एक लोटा जल नित्य भगवान शंकर के शिवलिंग पर चढ़ने मात्र से बड़ी से बड़ी समस्याएं दूर की जा सकती हैं।
कलयुग में जीवमात्र को भगवान महादेव की कथा का रसपान करने से रोग, भय, संताप आदि का नाश हो जाता है और पुण्य की भागी बन जाते हैं। महापुराण सुनने मात्र से ही वंश में वृद्धि होती है। यह कल्पवृक्ष के समान है, जो भी इसे जिस भावना से सुनता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें सभी सुख प्रदान करते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े प्रयास की आवश्यकता नहीं, बल्कि केवल सच्ची श्रद्धा और भक्ति ही पर्याप्त है।
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स्वामी ने बताया कि भगवान शिव की महिमा अनंत और अपार है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों में कोई भी ऐसा ग्रंथ नहीं है जिसमें भगवान शिव की महिमा का वर्णन न हुआ हो। भगवान शिव के अनेक नाम हैं, लेकिन उनका सबसे प्रिय नाम महादेव है।
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