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Karnal News: सरकार के दावे और जनता के आक्रोश में फंसे एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर, भ्रामक आंकड़ों पर असंतोष

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 12:33 AM IST
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LPG distributors are caught between government claims and public anger, and dissatisfaction with misleading data.
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन की बैठक को संबो​धित करते के प्रधान वीरेंद्र कुमार। संगठन
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। एलपीजी किल्लत के बीच सरकार और तेल कंपनियों के दावों और जनता के आक्रोश के बीच डिस्ट्रीब्यूटर फंस गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत करके सही स्थिति दर्शा रही है, जबकि उपभोक्ता को गैस न मिलने पर परेशानी बढ़ रही है। सोमवार को करनाल के जिमखाना क्लब में हुई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन की बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हालात पर असंतोष व्यक्त किया।
प्रधान वीरेंद्र कुमार और सचिव मनोज बी नांगिया ने कहा कि सरकार द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि गैस की आपूर्ति 80 प्रतिशत तक है, जबकि वास्तव में 50 प्रतिशत आपूर्ति भी नहीं हो पा रही। पिछले तीन वर्षों के पुराने आंकड़ों के आधार पर वर्तमान स्थिति को बेहतर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने सरकार और तेल कंपनियों को चेताया कि यदि नीतियों और झूठे आंकड़ों का खेल बंद नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर और अप्रत्याशित परिणाम सामने आएंगे।
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शहरी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और ग्रामीण के लिए 45 दिन का बुकिंग अंतराल तय कर दिया गया है, जिससे कृत्रिम रूप से मांग को नियंत्रित किया जा रहा है। यह नियम उपभोक्ताओं के हित में नहीं बल्कि सिस्टम की कमियों को छिपाने के लिए लागू किया गया है। कॉमर्शियल गैस सप्लाई को पीएनजी की ओर मोड़ने पर भी नाराजगी व्यक्त की। डिस्ट्रीब्यूटर पहले 8 घंटे काम करते थे लेकिन अब 12-14 घंटे काम करने को मजबूर हैं, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। इस अवसर पर मुकेश, सतेंद्र सिंह, डॉ सरोज बिश्नोई व परमजीत कौर मौजूद रहे।
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दबाव में कर्मचारी, बुकिंग पेंडेंसी हजारों में पहुंची
फेडरेशन के सदस्यों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में डिस्ट्रीब्यूटर दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। एक ओर केंद्र सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय, राज्य सरकार और जिला प्रशासन का दबाव है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं का आक्रोश झेलना पड़ रहा है। एक-एक एजेंसी पर हजारों की बुकिंग पेंडेंसी है, जबकि रोजाना सीमित संख्या में ही सिलिंडर की आपूर्ति हो रही है। इसके बावजूद कंपनियों के अधिकारी हम पर दबाव बना रहे हैं कि वे वीडियो जारी कर पूरी सप्लाई का दावा करें।


डिलीवरी प्वाइंट सिस्टम हो लागू
डिस्ट्रीब्यूटरों ने केवाईसी, रिकॉर्ड अपडेट और डीएससी (डिजिटल सत्यापन) की अनिवार्यता को भी संकट के समय अतिरिक्त बोझ बताया। डीएससी के सिलेंडर डिलीवरी पर रोक के कारण डिलीवरी सिस्टम बाधित हो रहा है और उपभोक्ताओं को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है। सुझाव दिया गया कि पारदर्शिता के लिए डिलीवरी प्वाइंट सिस्टम लागू किया जाए, जहां उपभोक्ता स्वयं एजेंसी से सिलिंडर लेकर मौके पर जांच कर सके। इससे शिकायतों और विवादों में कमी आएगी।

यह रखी मुख्य मांगें
- गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए
- बुकिंग अंतराल (25/45 दिन) की व्यवस्था तुरंत समाप्त हो
- सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को पर्याप्त गैस उपलब्ध कराई जाए, ताकि बैकलॉग खत्म हो सके

- डीएससी व केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं में राहत दी जाए

- पीएनजी कनेक्शन के लिए जबरदस्ती और भारी सिक्योरिटी राशि की नीति समाप्त हो
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