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Karnal News: हत्या के दोषी को आजीवन कारावास
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- भतीजे ने ही दोस्ताें संग मिलकर कराई थी चाचा की हत्या, फिर खुद पुलिस को दी थी शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। गोली मारकर व्यक्ति की हत्या करने के दोषी विश्व को आजीवन कारावास और आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता दोषी रणदीप को आर्म एक्ट के मामले में उसका जेल में रहना ही सजा मानी गई है। दोषी रणदीप ने ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर चाचा की हत्या कराई थी। फिर खुद पुलिस को शिकायत भी दी थी। उस पर आर्म्स एक्ट के तहत एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। यह सजा जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रशेखर ने सुनाई है।
जानकारी के अनुसार घोघड़ीपुर निवासी रणदीप ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चाचा बिजेंद्र की हत्या करवा दी थी। इस मामले में रणदीप ने 11 फरवरी 2020 को थाना मधुबन में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि सुबह 11:00 बजे के करीब गांव के नजदीक सफेद कार में आए अज्ञात लोगों ने उसके चाचा बिजेंद्र पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी है। वारदात को अंजाम देकर आरोपी मूनक की ओर फरार हो गए हैं।
रणदीप ने पुलिस को बताया था कि उसके पिता रविंद्र की 2010 में मृत्यु हो गई थी। उसके चाचा विजेंद्र जिसकी हत्या की गई है, वह अविवाहित हैं। उसके चाचा के पास सात एकड़ भूमि थी। साढ़े पांच एकड़ भूमि बेच दी है। बची हुई डेढ़ एकड़ भूमि पर फार्म हाउस बनाया है। वह चंडीगढ़ ही रह रहा था और गांव घोघड़ीपुर में बनाए गए अपने फार्म हाउस पर अक्सर आता-रहता था। वारदात के दिन भी उसका चाचा अपने फार्म हाउस पर ही आया था।
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कार की बरामदगी से पकड़ा गया भतीजा
हत्या की वारदात के बाद पुलिस को डॉयल 100 पर किसी का फोन आया और बताया गया कि गांव घोघड़ीपुर के नजदीक मूनक रोड पर सफेद कार में सवार लोगों ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी है। उस व्यक्ति ने पुलिस को कार का नंबर भी नोट कराया। पुलिस ने जब जांच की तो कार का मालिक शिकायतकर्ता रणदीप ही निकला। पुलिस ने हत्या के मामले में 16 फरवरी 2020 को आरोपी रणदीप को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर सात दिन का रिमांड लिया तो उसने हत्या का राज खोल दिया।
फोटो-1003
गंभीर मामलों में दोषियों को अधिक से अधिक सजा दिलाने का प्रयास रहता है। बीते मामलों में भी दोषियों को लंबी सजा करवाई गई है। अदालत में गवाहों एवं सबूतों को मजबूती से पेश किया जाता है, ताकि दोषी बच के निकल न पाएं। दोषियों को सजा मिलने से समाज में भी संदेश जाता है कि अपराधी गतिविधियों में संलिप्त होने से दोषी बच नहीं सकता और आखिर में उसे जेल की सलाखों के पीछे आना ही पड़ता है। इसलिए अदालत और सजा का डर अपराध को कम करने में मददगार साबित होता है।
- डॉ. पंकज, जिला न्यायवादी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। गोली मारकर व्यक्ति की हत्या करने के दोषी विश्व को आजीवन कारावास और आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। वहीं, मुख्य साजिशकर्ता दोषी रणदीप को आर्म एक्ट के मामले में उसका जेल में रहना ही सजा मानी गई है। दोषी रणदीप ने ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर चाचा की हत्या कराई थी। फिर खुद पुलिस को शिकायत भी दी थी। उस पर आर्म्स एक्ट के तहत एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। यह सजा जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रशेखर ने सुनाई है।
जानकारी के अनुसार घोघड़ीपुर निवासी रणदीप ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चाचा बिजेंद्र की हत्या करवा दी थी। इस मामले में रणदीप ने 11 फरवरी 2020 को थाना मधुबन में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि सुबह 11:00 बजे के करीब गांव के नजदीक सफेद कार में आए अज्ञात लोगों ने उसके चाचा बिजेंद्र पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी है। वारदात को अंजाम देकर आरोपी मूनक की ओर फरार हो गए हैं।
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रणदीप ने पुलिस को बताया था कि उसके पिता रविंद्र की 2010 में मृत्यु हो गई थी। उसके चाचा विजेंद्र जिसकी हत्या की गई है, वह अविवाहित हैं। उसके चाचा के पास सात एकड़ भूमि थी। साढ़े पांच एकड़ भूमि बेच दी है। बची हुई डेढ़ एकड़ भूमि पर फार्म हाउस बनाया है। वह चंडीगढ़ ही रह रहा था और गांव घोघड़ीपुर में बनाए गए अपने फार्म हाउस पर अक्सर आता-रहता था। वारदात के दिन भी उसका चाचा अपने फार्म हाउस पर ही आया था।
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कार की बरामदगी से पकड़ा गया भतीजा
हत्या की वारदात के बाद पुलिस को डॉयल 100 पर किसी का फोन आया और बताया गया कि गांव घोघड़ीपुर के नजदीक मूनक रोड पर सफेद कार में सवार लोगों ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी है। उस व्यक्ति ने पुलिस को कार का नंबर भी नोट कराया। पुलिस ने जब जांच की तो कार का मालिक शिकायतकर्ता रणदीप ही निकला। पुलिस ने हत्या के मामले में 16 फरवरी 2020 को आरोपी रणदीप को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर सात दिन का रिमांड लिया तो उसने हत्या का राज खोल दिया।
फोटो-1003
गंभीर मामलों में दोषियों को अधिक से अधिक सजा दिलाने का प्रयास रहता है। बीते मामलों में भी दोषियों को लंबी सजा करवाई गई है। अदालत में गवाहों एवं सबूतों को मजबूती से पेश किया जाता है, ताकि दोषी बच के निकल न पाएं। दोषियों को सजा मिलने से समाज में भी संदेश जाता है कि अपराधी गतिविधियों में संलिप्त होने से दोषी बच नहीं सकता और आखिर में उसे जेल की सलाखों के पीछे आना ही पड़ता है। इसलिए अदालत और सजा का डर अपराध को कम करने में मददगार साबित होता है।
- डॉ. पंकज, जिला न्यायवादी