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भाजपा की बैठक का विरोध करने आए किसानों पर लाठीचार्ज
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30......बसताड़ा टोल पर किसानों के ऊपर लाठीचार्ज करते पुलिसकर्मी। संवाद
घरौंडा(करनाल)। सूबे में पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियों पर मंथन करने के लिए करनाल में प्रस्तावित भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करना किसानों को भारी पड़ गया है। शनिवार को इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने न केवल किसानों पर लाठियां भांजी, बल्कि जवाब में किसानों ने पुलिस पर भी पत्थर बरसाए। इस टकराव में करीब 20 किसान घायल हो गए। जिसमें से चार गंभीर हैं। घायलों को निजी अस्पताल व स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए ले जाया गया। लाठीचार्ज के दौरान वहां खड़े किसानों के वाहनों के शीशे भी टूट गए।
नौ घंटे तक नेशनल हाईवे बसताड़ा टोल पर चले इस घटनाक्रम में बार-बार जाम लगाने की जिद्द कर रहे किसानों पर पुलिस ने चार बार लाठीचार्ज किया और उन्हें हाईवे से खदेड़कर खेतों की ओर दौड़ा दिया। इस दौरान पुलिस ने करीब 30 प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में भी लिया। उधर, डीसी निशांत कुमार यादव का दावा है कि कुछ पुलिस वाले भी चोटिल हुए हैं। इस टकराव के दौरान माहौल देरशाम तक पूरी तरह तनाव ग्रस्त रहा।
उधर, शाम को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी बसताड़ा टोल पर पहुंचे और धरने की कमान संभाली। इससे पूर्व उन्होंने दोपहर को वीडियो वायरल कर सभी जिलों में किसानों से सड़कों पर उतरकर इस घटनाक्रम के विरोधस्वरूप जाम लगाने का आह्वान किया। जिसके बाद सभी जिलों में भी विभिन्न राष्ट्रीय, राज्य और संपर्क मार्ग किसानों द्वारा जाम कर दिए गए। बसताड़ा टोल पर चढ़ूनी खुद हाईवे पर शाम को किसानों के साथ जाम लगाकर बैठ गए और हिरासत में लिए किसानों को छोड़ने तक विरोध प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी।
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मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस के भी तेवर नरम पड़ गए और उन्होंने किसानों के बढ़ते विरोध के मद्देनजर हिरासत में लिए सभी किसानों को छोड़ दिया। जिसके बाद किसानों ने भी शाम 7 बजकर 7 मिनट पर नेशनल हाईवे से जाम हटा दिया। इस दौरान मौके पर डीसी निशांत कुमार यादव, आईजी ममता सिंह, एसपी गंगाराम पूनिया, 13 डीएसपी, 30 इंस्पेक्टर सहित तीन जिलों के लगभग 800 पुलिस जवान तैनात रहे।
धनखड़ की गाड़ी का किया विरोध
बसताड़ा टोल पर शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की गाड़ी का भी किसानों ने विरोध किया। कुछ किसान पहले से ही वहां धरने पर बैठे थे। धनखड़ भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक में भाग लेने करनाल आ रहे थे। तभी बसताड़ा टोल से गुजरते हुए किसानों ने गाड़ी रोकने की कोशिश करते हुए काले झंडे दिखाए। इस दौरान किसानों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की। मगर पुलिस ने मौके पर स्थिति संभालते हुए धनखड़ की गाड़ी को तुरंत वहां से आगे निकाल दिया।
हाईवे जाम करेंगे, पत्थर मारेंगे तो कानून अपना काम करेगा: मनोहर
किसी के कार्यक्रम में व्यवधान डालना लोकतंत्र विरोधी कदम है। अगर किसानों ने प्रदर्शन ही करना था तो शांतिपूर्वक करते, हमें कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन पुलिस पर पत्थर मारेंगे या हाईवे जाम करेंगे तो कानून अपना काम करेगा। जाम के दौरान जिसका कसूर होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा
अन्नदाता का खून बहाना सरकार की आदत बन चुका: हुड्डा
अन्नदाता का खून बहाना सरकार की आदत बन चुकी है। पहले सरकार जानबूझकर टकराव के हालात पैदा करती है और पुलिस अलोकतांत्रिक, अमानवीय और तानाशाही तरीके से किसानों पर हमले होते है। यह पहला मौका नहीं है, जब किसान लहूलुहान हुआ हो।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री
इस बर्बरता का खामियाजा भुगतेंगी सरकारें : चढ़ूनी
लोगों की परेशानी को देखते हुए किसानों ने जाम खोल दिया है। लेकिन पुलिस की बर्बरता का विरोध जारी रहेगा। दो दिन के भीतर प्रदेश स्तरीय बैठक होगी। जिसमें इस घटनाक्रम का विरोध करने संबंधी रणनीति तैयार की जाए। इस घटना का खामियाजा प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों को भुगतना पडे़गा।
- गुरनाम सिंह चढू़नी, प्रदेशाध्यक्ष भाकियू
विरोधी नेता किसानों को भी समझाएं : मेहता
कस्सी से पुलिस के जवानों पर जानलेवा हमला करने के बाद पुलिस लाठीचार्ज के लिए मजबूर हुई। विरोधी दलों के नेताओं को किसानों को भी समझाना चाहिए। प्रदर्शन करें, ये किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है, मगर संयम और शांति जरूरी है।
- विनोद मेहता, मीडिया एडवाइजर टू सीएम
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नौ घंटे तक नेशनल हाईवे बसताड़ा टोल पर चले इस घटनाक्रम में बार-बार जाम लगाने की जिद्द कर रहे किसानों पर पुलिस ने चार बार लाठीचार्ज किया और उन्हें हाईवे से खदेड़कर खेतों की ओर दौड़ा दिया। इस दौरान पुलिस ने करीब 30 प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में भी लिया। उधर, डीसी निशांत कुमार यादव का दावा है कि कुछ पुलिस वाले भी चोटिल हुए हैं। इस टकराव के दौरान माहौल देरशाम तक पूरी तरह तनाव ग्रस्त रहा।
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उधर, शाम को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी बसताड़ा टोल पर पहुंचे और धरने की कमान संभाली। इससे पूर्व उन्होंने दोपहर को वीडियो वायरल कर सभी जिलों में किसानों से सड़कों पर उतरकर इस घटनाक्रम के विरोधस्वरूप जाम लगाने का आह्वान किया। जिसके बाद सभी जिलों में भी विभिन्न राष्ट्रीय, राज्य और संपर्क मार्ग किसानों द्वारा जाम कर दिए गए। बसताड़ा टोल पर चढ़ूनी खुद हाईवे पर शाम को किसानों के साथ जाम लगाकर बैठ गए और हिरासत में लिए किसानों को छोड़ने तक विरोध प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी।
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मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस के भी तेवर नरम पड़ गए और उन्होंने किसानों के बढ़ते विरोध के मद्देनजर हिरासत में लिए सभी किसानों को छोड़ दिया। जिसके बाद किसानों ने भी शाम 7 बजकर 7 मिनट पर नेशनल हाईवे से जाम हटा दिया। इस दौरान मौके पर डीसी निशांत कुमार यादव, आईजी ममता सिंह, एसपी गंगाराम पूनिया, 13 डीएसपी, 30 इंस्पेक्टर सहित तीन जिलों के लगभग 800 पुलिस जवान तैनात रहे।
धनखड़ की गाड़ी का किया विरोध
बसताड़ा टोल पर शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की गाड़ी का भी किसानों ने विरोध किया। कुछ किसान पहले से ही वहां धरने पर बैठे थे। धनखड़ भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक में भाग लेने करनाल आ रहे थे। तभी बसताड़ा टोल से गुजरते हुए किसानों ने गाड़ी रोकने की कोशिश करते हुए काले झंडे दिखाए। इस दौरान किसानों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की। मगर पुलिस ने मौके पर स्थिति संभालते हुए धनखड़ की गाड़ी को तुरंत वहां से आगे निकाल दिया।
हाईवे जाम करेंगे, पत्थर मारेंगे तो कानून अपना काम करेगा: मनोहर
किसी के कार्यक्रम में व्यवधान डालना लोकतंत्र विरोधी कदम है। अगर किसानों ने प्रदर्शन ही करना था तो शांतिपूर्वक करते, हमें कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन पुलिस पर पत्थर मारेंगे या हाईवे जाम करेंगे तो कानून अपना काम करेगा। जाम के दौरान जिसका कसूर होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा
अन्नदाता का खून बहाना सरकार की आदत बन चुका: हुड्डा
अन्नदाता का खून बहाना सरकार की आदत बन चुकी है। पहले सरकार जानबूझकर टकराव के हालात पैदा करती है और पुलिस अलोकतांत्रिक, अमानवीय और तानाशाही तरीके से किसानों पर हमले होते है। यह पहला मौका नहीं है, जब किसान लहूलुहान हुआ हो।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री
इस बर्बरता का खामियाजा भुगतेंगी सरकारें : चढ़ूनी
लोगों की परेशानी को देखते हुए किसानों ने जाम खोल दिया है। लेकिन पुलिस की बर्बरता का विरोध जारी रहेगा। दो दिन के भीतर प्रदेश स्तरीय बैठक होगी। जिसमें इस घटनाक्रम का विरोध करने संबंधी रणनीति तैयार की जाए। इस घटना का खामियाजा प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों को भुगतना पडे़गा।
- गुरनाम सिंह चढू़नी, प्रदेशाध्यक्ष भाकियू
विरोधी नेता किसानों को भी समझाएं : मेहता
कस्सी से पुलिस के जवानों पर जानलेवा हमला करने के बाद पुलिस लाठीचार्ज के लिए मजबूर हुई। विरोधी दलों के नेताओं को किसानों को भी समझाना चाहिए। प्रदर्शन करें, ये किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है, मगर संयम और शांति जरूरी है।
- विनोद मेहता, मीडिया एडवाइजर टू सीएम