ठेकेदारों ने कहा नगर निगम में कमीशनखोरी का बोलबाला, नहीं करेंगे काम

ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Thu, 20 Oct 2016 12:25 AM IST
Kmishnkhori dominated in the municipal contractors, will not work, Karnal
ठेकेदारों ने कहा नगर निगम में कमीशनखोरी का बोलबाला, नहीं करेंगे काम - फोटो : Amar Ujala
 नगर निगम करनाल में अधिकारियों व कर्मचारियों पर ठेकेदारों ने कमीशनखोरी का आरोप लगाया है। मीडिया से मुखातिब ठेकेदारों का कहना है कि हर कार्य के लिए निगम में कर्मचारियों व अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ती है। पेमेंट लेने जाते हैं तो अलग अलग टेबल पर सबका कमीशन तय है, जो कुल 12 प्रतिशत बैठता है। जब तक कमीशन नहीं दे दिया जाता तब तक फाइल आगे नहीं चलती। ठेकेदारों का 14 करोड़ रुपये निगम ने सिर्फ कमीशन के फेर में रोका है। ठेकेदारों ने यह भी दावा किया है कि पिछले तीन साल में शहर में 100 करोड़ रुपये के सिविल कार्य हुए हैं। 12 प्रतिशत के हिसाब से 12 करोड़ रुपये तो सीधे तौर पर अधिकारियों के पास जा चुके हैं। ठेकेदारों ने निगम अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चल रहे निर्माण कार्यों को बंद करने, किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने और काली दिवाली मनाने का एलान किया है।
बुधवार को कर्ण पार्क में नगर निगम के करीब 50 ठेकेदारों की आपात बैठक में नगर निगम ठेकेदार एसोसिएशन का गठन किया गया और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया गया। एसो. प्रधान श्याम सिंह नरवाल ने बैठक में आरोप लगाया कि सीएम सिटी के नगर निगम में जमकर कमीशनखोरी चल रही है। कमीशन नहीं देने वाले ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है या फिरे उसके सैंपल फेल कर दिए जाते हैं। नरवाल ने कहा कि पिछले छह माह में सभी ठेकेदारों के कार्य पूरे हो चुके हैं, कमीशन के लिए 14 करोड़ रुपये रोक रखे हैं। निगम आयुक्त ने केवल आश्वासन दिए। तंग आकर उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को बंद करने का फैसला लिया है। आगामी टेंडर नहीं भरने और भरने वाले का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला भी लिया गया है। करीब दो घंटे तक चली बैठक में ठेकेदारों के निशाने पर अधिकारी रहे, खासकर निगम के कार्यकारी अभियंता महिपाल सिंह को जमकर कोसा।


पुराने अधिकारियों पर भी सवाल उठाए
कमीशनखोरी का विवाद निगम में पहली बार सामने नहीं आया है। पार्षद हर मीटिंग में यह मुद्दा उठाते हैं। 14 अक्तूबर को हाउस की बैठक में पार्षदों ने मुख्य सफाई निरीक्षक, एर्क्सईएन व एमई पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। पार्षदों के बाद अब यह मोर्चा नगर निगम के ठेकेदारों ने संभाला है। ठेकेदारों के अनुसार पिछले तीन साल में ही वह निगम अफसरों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दे चुके हैं।

अधिकारियों की सांसें फूली, हड़कंप
ठेकेदारों के खुलकर मीडिया के सामने आने से अफसरों के पसीने छूट गए हैं। बुधवार को ठेकेदारों की बैठक की जानकारी होने पर  अफसर निगम से खिसक गए। इस मामले को लेकर कोई भी अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है।  

बैठक में ये फैसले
1. नगर निगम के कार्यालय नहीं जाएंगे।
2. कोई भी नया टेंडर नहीं डालेंगे ठेकेदार।
3. बाहर से आने वाली कंपनी या ठेकेदार को टेंडर नहीं भरने देंगे।
4. चल रहे निर्माण कार्यों को बंद करेंगे।
5. नगर निगम के बाहर देंगे धरना।
6. नगर निगम करनाल को ब्लैक लिस्टेड करने का फैसला।

कमीशन नहीं तो सैंपल फेल
ठेकेदार नवीन कुमार, महेंद्र सिंह, संजीव चहल, दलबीर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जो ठेकेदार कमीशन नहीं देता, उसके सैंपल फेल कर दिये जाते हैं या फिर उसे ब्लेकलिस्टेड करने की धमकी दी जाती है। एक ठेकेदार ने बताया कि उसकी ईटों को एमई ने पास कर दिया, लेकिन एक्सईएन फेल कर रहे हैं। जब पैसे की बात करते हैं तब ओके हो जाते हैं।

कमिश्नर से बड़े एक्सईएन
ठेकेदार अमन, गंगाराम, नवीन राणा, हेमंत ने साफ शब्दों में कहा है कि नगर निगम में हर टेबल पर पैसा देना पड़ता है। इतना ही नहीं यहां कोई भी आयुक्त आए, उससे बड़ा एर्क्सईएन महिपाल होता है। आयुक्त फाइल पास कर देते हैं लेकिन महिपाल उसे रोक देता है। कमीशन के अलावा उनको अधिकारियों की बेगार भी उठानी पड़ती हैं।


यह गंभीर मामला है। इस बारे में अधिकारियों के साथ साथ कमिश्नर से बात की जाएगी। जांच के दौरान जो भी अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम गुणवत्ता का अच्छा काम चाहते हैं। अगर कोई अधिकारी व कर्मचारी कमीशन मांगता है तो यह गलत है और हम इसका विरोध करते हैं।
रेणु बाला गुप्ता, मेयर।

मैं और हमारे पार्षद साथी पिछले तीन साल से इस कमीशनखोरी को लेकर चिल्ला रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब ठेकेदारों ने साफ कर दिया है कि यहां पर 12 प्रतिशत कमीशन लिया जाता है। जो जो लोग पैसे लेते हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। एक्सईएन को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करके जांच की जानी चाहिए। -
बाघ सिंह, पार्षद।

अगर कोई कमीशनखोरी करता है तो उसके सबूत और शिकायत हमें दें, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मेरे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए निगम में मूवमेंट रजिस्टर लगाया गया है, इसके तहत किसी भी अधिकारी के पास पांच दिन से ज्यादा किसी की फाइल नहीं रह पाएगी। अगर कोई ज्यादा दिन फाइल रखता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डा. आदित्य दहिया, आयुक्त।  

सभी आरोप मनघड़ंत हैं। बिना तथ्यों और बिना आधार की काल्पनिक बाते हैं। उन्होंने किसी भी कमीशन नहीं लिया और न ही किसी की फाइल रोकी। यह सब बदनाम करने की कोशिश है। मैं अपना काम अच्छे तरीके और कानूनन तरीके से कर रहा हूं।
महिपाल, कार्यकारी अभियंता। 

नोट : ठेकेदारों के अनुसार नए आयुक्त कमीशन नहीं लेते हैं, वे पहले इस पोस्ट के नाम के 2 प्रतिशत कमीशन देते रहे हैं।  

ठेकेदारों के अनुसार ये है कमीशन का प्रतिशत
जेई : ढाई प्रतिशत
एमई : ढाई प्रतिशत
एक्सईएन : डेढ़ प्रतिशत
एसई : एक प्रतिशत
एसडीसी : 40 पैसे
एसएओ ब्रांच : 1 प्रतिशत
आडिट ब्रांच : एक प्रतिशत
आयुक्त : 0
अकाउंटेंट : 40 पैसे।

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