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Karnal: मेडिकल कॉलेज का आईटी सेल कमजोर, केसीजीएमसी वेबसाइट ‘नॉट सिक्योर’

Thu, 26 Jan 2023 08:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 26 Jan 2023 08:01 AM IST
सार

सुरक्षा और अधिकार समितियां अपडेट करने के अलावा कॉलेज की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। नॉट सिक्योर श्रेणी में वेबसाइट पिछले दिनों हैक भी हुई और करीब तीन घंटे तक अनजान के हाथ में सर्वर रहा था। इसी वेबसाइट पर हजारों विद्यार्थियों के शिक्षण संबंधित कार्य होते हैं। 

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KCGMC website of Kalpana Chawla Government Medical College is 'not secure'
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

करनाल स्थित कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की विभिन्न सुरक्षा और अधिकार समितियों के अलावा अब संस्थान का आईटी सेल भी कमजोर साबित हो रहा है। पिछले कई माह से संस्थान की वेबसाइट केसीजीएमसी ‘नॉट सिक्योर’ श्रेणी में है। यह विद्यार्थियों के रिकॉर्ड से संबंधित एक बड़ी लापरवाही है।

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यह हालात तब हैं जब पिछले दिनों कॉलेज की वेबसाइट हैक भी हो चुकी है और करीब तीन घंटे तक किसी अनजान के हाथ में इसका सर्वर रहा था। इसके बाद भी डिजिटल युग में मेडिकल संस्थान विद्यार्थियों व स्टाफ के रिकॉर्ड को लेकर सजग नहीं है।
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साइबर विशेषज्ञ इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं,क्योंकि कॉलेज के हजारों विद्यार्थियों के शिक्षण संबंधित कार्य इसी वेबसाइट के माध्यम से होते हैं और उनका रिकॉर्ड भी यहां दर्ज है। साथ ही कॉलेज की नई अपडेट, समितियां, आंतरिक कार्यों का विवरण भी इसी के माध्यम से दिया जाता है।
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फिर भी वेबसाइट का ‘नॉट सिक्योर’ श्रेणी में होना चिंताजनक है। वेबसाइट पर संस्थान की कुल 12 आंतरिक समितियां दर्शायी गई हैं। इनमें से 2018-19 में भंग हो चुकी कई समितियों आज भी वेबसाइट पर कार्यशील हैं। हालांकि मेडिकल अधीक्षक डॉ. हिमांशु मदान का दावा है कि वेबसाइट को कॉलेज के आईटी सेल द्वारा अपडेट किया जा रहा है।

हैकर ने निदेशक की ई-मेल आईडी भी की थी इस्तेमाल 
सितंबर 2022 में मेडिकल कॉलेज के निदेशक की ई-मेल आईडी भी हैक हो चुकी है। हैकर ने उनके ई-मेल से कुछ अनधिकृत संदेश दूसरे ई-मेल आईडी पर भेजे थे। करीब पांच घंटे तक ई-मेल को हैक करके रखा गया। इस दौरान गोपनीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई। जब इसका पता आईटी इंचार्ज को लगा तो उन्होंने तुरंत सर्वर से ई-मेल आईडी बंद कर दी। मामले में केस भी दर्ज है। 

सरकारी संस्थान की वेबसाइट लॉक श्रेणी में ही विश्वसनीय
साइबर एक्सपर्ट प्रदीप नैन का कहना है कि राजकीय संस्थान होने के नाते वेबसाइट का सिक्योर होना जरूरी है। सुरक्षा मानक पूरे करने के बाद ही वेबसाइट को लॉक श्रेणी मिलती है। जिनके पास वेबसाइट के संचालन की जिम्मेदारी है या संस्थान की ओर से जो भी इसका एडमिन है, वो मानक पूरे करके सिक्योर करा सकता है। सिक्योर अथवा लॉक श्रेणी के वेबसाइट के हैक होने के चांस कम रहते हैं। 


यह है लॉक और नॉट सिक्योर श्रेणी में अंतर 
पुलिस के साइबर एक्सपर्ट प्रदीप नैन के अनुसार, नोट सिक्योर श्रेणी में वेबसाइट सुरक्षित नहीं माना जाता। जिस भी वेब ब्राउजर पर इसे यूज करते हैं, कुछ गलत होने पर ब्राउजर इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता, इसलिए नॉट सिक्योर श्रेणी प्रदर्शित भी करता है, जबकि लॉक श्रेणी को सुरक्षित माना जाता है। नॉट सिक्योर श्रेणी में साइट के माध्यम से हैकर व्यक्तिगत जानकारी भी आसानी से चुरा सकता है। यदि इस मंशा से वेबसाइट बनी है तो रिकॉर्ड सेव कर सकती है और वो कहां शेयर होगा इसका किसी को नहीं पता चलता।

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