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पिछले वर्ष से 23 अंक गिरा लिंगानुपात, दो महीने में बढ़ाने के लिये चुनौती
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पिछले वर्ष की तुलना में जिले में लिंगानुपात 23 अंक गिर गया है, जो चिंताजनक है। पिछले वर्ष 2018 में जनवरी से अक्तूबर तक जिले का लिंगानुपात 930 था यानि एक हजार लड़कों पर 930 लड़कियां। इस वर्ष जनवरी से अक्तूबर तक की बात करें तो यह घटकर 907 पर पहुंच गया है, हालांकि अभी दो महीने बाकी है, लेकिन इन दो महीनों में लिंगानुपात बढ़ाना स्वास्थ्य विभाग के सामने बहुत बड़ी चुनौती है। पिछले वर्ष करनाल जिला 934 लिंगानुपात के साथ प्रदेश में दूसरे स्थान पर था। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि लिंगानुपात को बढ़ाने में सरकार व स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें नाकाफी हैं। विदित हो कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में 22 जनवरी को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत पानीपत से की थी।
20-30 हजार रुपये में कार में करते हैं लिंग जांच
लिंगानुपात को बढ़ाने के लिये सरकार ने सख्ती की है लेकिन इसके बावजूद भी लोग लिंग जांच करने से बाज नहीं आ रहे। वह 20 से 30 हजार रुपये लेकर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच करते हैं। इसके लिये वह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन को एक कार में रखते हैं और कार को सुनसान जगह पर ले जाकर गर्भवती महिला के गर्भ में बच्चे की लिंग जांच करते हैं। इस तरह के कई केस स्वास्थ्य विभाग ने पकड़े भी हैं।
पीएनडीटी व एमपीटी की हो चुकी है 41 एफआईआर
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार 2015 से अभी तक पीएनडीटी एक्ट के तहत 24 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। इनमें से चार मामले यूपी के हैं। इसी प्रकार एमपीटी एक्ट के तहत भी 17 एफआईआर अलग अलग थानों में दर्ज हो चुकी हैं।
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वर्ष - लिंगानुपात
2015 - 897
2016 - 909
2017 - 922
2018 - 934
पहला स्थान हासिल करने में एक अंक से रह गया था करनाल
2018 में करनाल जिला लिंगानुपात के मामले में एक अंक कम होने के कारण पहला स्थान हासिल नहीं कर पाया था। 935 लिंगानुपात के साथ सिरसा पहले स्थान पर था और करनाल 934 लिंगानुपात के साथ दूसरे स्थान पर था लेकिन इस बार हालात काफी नाजुक हैं।
बेटी बचाओ एक लाख पाओ, ये है स्कीम
डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि लिंगानुपात को लेकर सरकार और विभाग दोनों ही गंभीर है। पीएनडीटी व एमपीटी के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति जिलेभर में हो रहे भ्रूण लिंग जांच की गुप्त सूचना स्वास्थ्य विभाग को देकर बेटी बचाने में अपना सहयोग दे सकता है। इस सूचना पर यदि विभाग की टीम रेड मारने में कामयाब हो जाती है तो सरकार की ओर से सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाता है और उसे एक लाख रुपये भी दिये जाते हैं।
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20-30 हजार रुपये में कार में करते हैं लिंग जांच
लिंगानुपात को बढ़ाने के लिये सरकार ने सख्ती की है लेकिन इसके बावजूद भी लोग लिंग जांच करने से बाज नहीं आ रहे। वह 20 से 30 हजार रुपये लेकर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच करते हैं। इसके लिये वह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन को एक कार में रखते हैं और कार को सुनसान जगह पर ले जाकर गर्भवती महिला के गर्भ में बच्चे की लिंग जांच करते हैं। इस तरह के कई केस स्वास्थ्य विभाग ने पकड़े भी हैं।
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पीएनडीटी व एमपीटी की हो चुकी है 41 एफआईआर
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार 2015 से अभी तक पीएनडीटी एक्ट के तहत 24 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। इनमें से चार मामले यूपी के हैं। इसी प्रकार एमपीटी एक्ट के तहत भी 17 एफआईआर अलग अलग थानों में दर्ज हो चुकी हैं।
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वर्ष - लिंगानुपात
2015 - 897
2016 - 909
2017 - 922
2018 - 934
पहला स्थान हासिल करने में एक अंक से रह गया था करनाल
2018 में करनाल जिला लिंगानुपात के मामले में एक अंक कम होने के कारण पहला स्थान हासिल नहीं कर पाया था। 935 लिंगानुपात के साथ सिरसा पहले स्थान पर था और करनाल 934 लिंगानुपात के साथ दूसरे स्थान पर था लेकिन इस बार हालात काफी नाजुक हैं।
बेटी बचाओ एक लाख पाओ, ये है स्कीम
डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि लिंगानुपात को लेकर सरकार और विभाग दोनों ही गंभीर है। पीएनडीटी व एमपीटी के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति जिलेभर में हो रहे भ्रूण लिंग जांच की गुप्त सूचना स्वास्थ्य विभाग को देकर बेटी बचाने में अपना सहयोग दे सकता है। इस सूचना पर यदि विभाग की टीम रेड मारने में कामयाब हो जाती है तो सरकार की ओर से सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाता है और उसे एक लाख रुपये भी दिये जाते हैं।