{"_id":"27c83de14ee2f38c4ed47e184a7ac1b7","slug":"kalpana-chawla-medical-college-unstoppable-work","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर रुका कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर रुका कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज का काम
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Mon, 09 Jun 2014 11:32 PM IST
विज्ञापन
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निर्माण में लगी सुप्रीम कंपनी
विज्ञापन
ने एक ही झटके चौदह कर्मचारियों को बाहर कर दिया है। न कोई नोटिस ही दिया
और न ही कोई नोटिफिकेशन निकाला। निकाले गए कर्मचारियों में इंजीनियर्स,
टेक्निकल और मेकेनिकल स्टाफ के कर्मचारी शामिल हैं।
विरोध में हटाए गए कर्मचारियों ने सोमवार को निर्माण कार्य रोक दिया और कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। पांच महीने से रेगुलर स्टाफ को और तीन महीने से आउट सोर्सिंग स्टाफ को वेतन नहीं दिया गया था। अब उन्हें वेतन के फाइनल पोस्ट डेटिड चेक काट कर थमा दिए गए हैं और निकाल दिया गया है।
हटाए गए सभी कर्मचारी दूसरे प्रदेशों के रहने वाले हैं और उनके पास अब घर जाने के भी पैसे नहीं है। इसके चलते उन्होंने काम बंद कर दिया और दूसरे कर्मचारियों व लेबर को भी काम पर नहीं लगने दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनका पूरा भुगतान कैश में नहीं हो जाता, वे काम शुरू नहीं होने देेंगे।
रेगुलर में दस में से छह हटाए
झारखंड निवासी फोरमैन उदय कुमार, बिहार निवासी ईएंडएम इंचार्ज इंजीनियर सौरभ सिंह, उत्तरप्रदेश निवासी सेफ्टी मैनेजर प्रदीप शुक्ला, राजस्थान निवासी स्टोर कीपर महीपथ, पश्चिम बंगाल निवासी सीनियर सर्वेयर पुलक ससमल और बिहार निवासी साइट इंजीनियर दीवाकर सुप्रीम कंपनी में रेगुलर स्टाफ में थे।
रेगुलर स्टाफ के दस सदस्यों में से छह को हटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि पांच महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद वे अपने घर से पैसे मंगवाकर काम करते रहे, लेकिन अब एक झटके से उन्हें सारे लाभ व बोनस काटकर चार महीने दस दिन के वेतन के चेक थमा दिए गए हैं। यह चेक 30 जून और 25 मई की तारीख के हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का इतिहास है कि यह हटाए गए किसी भी कर्मचारी को वेतन नहीं देती है। इसी तरह आगे की तारीखों के चैक दिए जाते हैं, जो बाद में बाउंस हो जाते हैं।
आउट सोर्सिंग के 11 में आठ हटाए
आउटसोर्र्सिंग पॉलिसी के तहत लगाए गए 11 कर्मचारियों में से आठ को हटा दिया गया है। इनमें उत्तरप्रदेश निवासी क्यूसीआई अंकित कुमार, एडमिन इंचार्ज प्रदीप राजपूत, एचआर सर्वेयर भरत सिंह, मध्यप्रदेश निवासी हरे कृष्णा, हरियाणा निवासी सन्नी सिंह, बिहार निवासी शनिकांत, उत्तरप्रदेश निवासी महेश ओझा और बिहार निवासी विजय महतो शामिल हैं। इन्हें तीन महीने दस दिन के वेतन के पोस्ट डेटिड चेक दिए गए हैं। इन कर्मचारियों ने बताया कि उनका वेतन अभी तक कैश ही दिया जाता था। अब चेक क्यों दिए गए हैं।
इसलिए हटाए कर्मचारी
सुप्रीम कंपनी कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ा पाई है। बिलों का भुगतान अटकने का बहाना बनाकर कंपनी ने काम ही नहीं किया और जब सरकार का दबाव बढ़ा तो आगे एक अन्य कंपनी डीएसआर को कांट्रेक्ट दे दिया और इसने काम शुरू कर दिया है। सुप्रीम कंपनी यहां से पैक अप की तैयारी में है। इसलिए कंपनी अब अपने कर्मचारियों को हटा रही है।
सारे काम बंद पड़े
हटाए गए कर्मचारियों ने बताया कि सुप्रीम कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आईआईटी, सेक्टर 37 गुड़गांव में रामप्रस्था प्रोजेक्ट, सेक्टर 95 एडब्ल्यूएचओ प्रोजेक्ट और गुड़गांव में ही पारस काम अपने हाथ में लिया था। इनमें से अधिकतर काम बंद पड़े हैं। सेक्टर 95 एडब्ल्यूएचओ प्राजेक्ट गुड़गांव के पूरे स्टाफ को भी इसी तरह से टर्मिनेट किया गया था और अब मंडी के स्टाफ को हटाने की तैयारी चल रही है।
अस्पताल का काम प्रभावित
नवंबर 2013 में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था, जो 25 माह में पूरा होना है। आठ महीने की अवधि बीत जाने के बाद अभी तक महज छह प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। प्रोजेक्ट की कुल 646 करोड़ रुपये की लागत में से अभी तक 40 करोड़ रुपये का ही काम निर्माण कार्य में लगी कंपनियां कर पाई हैं। ऐसे हालातों में अस्पताल का निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूरा होना संभव नहीं लग रहा।
विरोध में हटाए गए कर्मचारियों ने सोमवार को निर्माण कार्य रोक दिया और कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। पांच महीने से रेगुलर स्टाफ को और तीन महीने से आउट सोर्सिंग स्टाफ को वेतन नहीं दिया गया था। अब उन्हें वेतन के फाइनल पोस्ट डेटिड चेक काट कर थमा दिए गए हैं और निकाल दिया गया है।
हटाए गए सभी कर्मचारी दूसरे प्रदेशों के रहने वाले हैं और उनके पास अब घर जाने के भी पैसे नहीं है। इसके चलते उन्होंने काम बंद कर दिया और दूसरे कर्मचारियों व लेबर को भी काम पर नहीं लगने दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनका पूरा भुगतान कैश में नहीं हो जाता, वे काम शुरू नहीं होने देेंगे।
रेगुलर में दस में से छह हटाए
झारखंड निवासी फोरमैन उदय कुमार, बिहार निवासी ईएंडएम इंचार्ज इंजीनियर सौरभ सिंह, उत्तरप्रदेश निवासी सेफ्टी मैनेजर प्रदीप शुक्ला, राजस्थान निवासी स्टोर कीपर महीपथ, पश्चिम बंगाल निवासी सीनियर सर्वेयर पुलक ससमल और बिहार निवासी साइट इंजीनियर दीवाकर सुप्रीम कंपनी में रेगुलर स्टाफ में थे।
रेगुलर स्टाफ के दस सदस्यों में से छह को हटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि पांच महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद वे अपने घर से पैसे मंगवाकर काम करते रहे, लेकिन अब एक झटके से उन्हें सारे लाभ व बोनस काटकर चार महीने दस दिन के वेतन के चेक थमा दिए गए हैं। यह चेक 30 जून और 25 मई की तारीख के हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का इतिहास है कि यह हटाए गए किसी भी कर्मचारी को वेतन नहीं देती है। इसी तरह आगे की तारीखों के चैक दिए जाते हैं, जो बाद में बाउंस हो जाते हैं।
आउट सोर्सिंग के 11 में आठ हटाए
आउटसोर्र्सिंग पॉलिसी के तहत लगाए गए 11 कर्मचारियों में से आठ को हटा दिया गया है। इनमें उत्तरप्रदेश निवासी क्यूसीआई अंकित कुमार, एडमिन इंचार्ज प्रदीप राजपूत, एचआर सर्वेयर भरत सिंह, मध्यप्रदेश निवासी हरे कृष्णा, हरियाणा निवासी सन्नी सिंह, बिहार निवासी शनिकांत, उत्तरप्रदेश निवासी महेश ओझा और बिहार निवासी विजय महतो शामिल हैं। इन्हें तीन महीने दस दिन के वेतन के पोस्ट डेटिड चेक दिए गए हैं। इन कर्मचारियों ने बताया कि उनका वेतन अभी तक कैश ही दिया जाता था। अब चेक क्यों दिए गए हैं।
इसलिए हटाए कर्मचारी
सुप्रीम कंपनी कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ा पाई है। बिलों का भुगतान अटकने का बहाना बनाकर कंपनी ने काम ही नहीं किया और जब सरकार का दबाव बढ़ा तो आगे एक अन्य कंपनी डीएसआर को कांट्रेक्ट दे दिया और इसने काम शुरू कर दिया है। सुप्रीम कंपनी यहां से पैक अप की तैयारी में है। इसलिए कंपनी अब अपने कर्मचारियों को हटा रही है।
सारे काम बंद पड़े
हटाए गए कर्मचारियों ने बताया कि सुप्रीम कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आईआईटी, सेक्टर 37 गुड़गांव में रामप्रस्था प्रोजेक्ट, सेक्टर 95 एडब्ल्यूएचओ प्रोजेक्ट और गुड़गांव में ही पारस काम अपने हाथ में लिया था। इनमें से अधिकतर काम बंद पड़े हैं। सेक्टर 95 एडब्ल्यूएचओ प्राजेक्ट गुड़गांव के पूरे स्टाफ को भी इसी तरह से टर्मिनेट किया गया था और अब मंडी के स्टाफ को हटाने की तैयारी चल रही है।
अस्पताल का काम प्रभावित
नवंबर 2013 में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था, जो 25 माह में पूरा होना है। आठ महीने की अवधि बीत जाने के बाद अभी तक महज छह प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। प्रोजेक्ट की कुल 646 करोड़ रुपये की लागत में से अभी तक 40 करोड़ रुपये का ही काम निर्माण कार्य में लगी कंपनियां कर पाई हैं। ऐसे हालातों में अस्पताल का निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूरा होना संभव नहीं लग रहा।