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सस्ता न्याय दिलवाना ही अधिवक्ताओं का कर्तव्य
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Thu, 10 Dec 2015 12:36 AM IST
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लोगों को सस्ता न्याय दिलवाना ही अधिवक्ताओं का कर्तव्य होना चाहिए। अधिवक्ताओं के सहयोग से ही राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाया जा सकता है। ये बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश ललित बतरा ने आगामी 12 दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की प्रमोशन को लेकर करनाल बार के अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से एक ही दिन में अधिक से अधिक मुकदमों का निपटारा किया जा सकता है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से वाहन दुर्घटना मुआवजा केस से संबधित मामले, मजदूरी विवादों, दिवानी मामलों जैसे कि किराया, बैंक ऋण, राजस्व आदि, बच्चों और पत्नी के लिए भरण-पोषण आदि से संबंधित, लंबित विवादों, राजीनामा योग्य, फौजदारी मामलों, वैवाहिक मामलों, आपराधिक, मनरेगा, भूमि अधिग्रहण, रेलवे, बिजली-पानी बिल से संबंधित मामले, चेक बाउंस मामले, आपदा मुआवजा, आयकर, बिक्री तथा श्रम विभाग से संबंधित किसी भी मामले का निपटारा आसानी से करवाया जा सकता है। इसके अलावा अन्य विवाद जो अदालत में लंबित नहीं है, उसे भी लोक अदालत में रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत में हुए फैसले की कोई अपील नहीं होती। उन्होंने कहा कि फैसला दोनों पक्षों की रजामंदी से होता है जिससे न किसी की जीत होती और न ही किसी की हार होती है। लोक अदालत में हुए फैसले में कोर्ट फीस वापस हो जाती है तथा समय व पैसे की बचत होती है। इस मौके पर बार एसोसिएशन के प्रधान निर्मलजीत सिंह विर्क ने अधिवक्ताओं की ओर से जिला एवं सत्र न्यायधीश ललित बतरा को विश्वास दिलाया कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सभी अधिवक्ता अपना पूर्ण सहयोग करेंगे।
इस अवसर पर एडीजे नरेश कत्याल, एडीजे डीके मित्तल, एडीजे अजय कुमार शारदा, एडीजे अजय वर्मा, सीजेएम अमित गर्ग, एसीजेएम केपी सिंह, सिविल जज अरविन्द कुमार, एडवोकेट पवन मल्होत्रा, गुरप्रीत ग्रेटा, अमित शर्मा, विशाल ग्रोवर, मनीष लाठर, गोपाल चौहान, प्रवीन पोसवाल सहित अन्य एडवोकेट मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से एक ही दिन में अधिक से अधिक मुकदमों का निपटारा किया जा सकता है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से वाहन दुर्घटना मुआवजा केस से संबधित मामले, मजदूरी विवादों, दिवानी मामलों जैसे कि किराया, बैंक ऋण, राजस्व आदि, बच्चों और पत्नी के लिए भरण-पोषण आदि से संबंधित, लंबित विवादों, राजीनामा योग्य, फौजदारी मामलों, वैवाहिक मामलों, आपराधिक, मनरेगा, भूमि अधिग्रहण, रेलवे, बिजली-पानी बिल से संबंधित मामले, चेक बाउंस मामले, आपदा मुआवजा, आयकर, बिक्री तथा श्रम विभाग से संबंधित किसी भी मामले का निपटारा आसानी से करवाया जा सकता है। इसके अलावा अन्य विवाद जो अदालत में लंबित नहीं है, उसे भी लोक अदालत में रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत में हुए फैसले की कोई अपील नहीं होती। उन्होंने कहा कि फैसला दोनों पक्षों की रजामंदी से होता है जिससे न किसी की जीत होती और न ही किसी की हार होती है। लोक अदालत में हुए फैसले में कोर्ट फीस वापस हो जाती है तथा समय व पैसे की बचत होती है। इस मौके पर बार एसोसिएशन के प्रधान निर्मलजीत सिंह विर्क ने अधिवक्ताओं की ओर से जिला एवं सत्र न्यायधीश ललित बतरा को विश्वास दिलाया कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सभी अधिवक्ता अपना पूर्ण सहयोग करेंगे।
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इस अवसर पर एडीजे नरेश कत्याल, एडीजे डीके मित्तल, एडीजे अजय कुमार शारदा, एडीजे अजय वर्मा, सीजेएम अमित गर्ग, एसीजेएम केपी सिंह, सिविल जज अरविन्द कुमार, एडवोकेट पवन मल्होत्रा, गुरप्रीत ग्रेटा, अमित शर्मा, विशाल ग्रोवर, मनीष लाठर, गोपाल चौहान, प्रवीन पोसवाल सहित अन्य एडवोकेट मौजूद रहे।
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