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Karnal News: भारत को चाहिए पराली प्रबंधन करने वाली स्मार्ट मशीन

Sat, 30 Nov 2024 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 30 Nov 2024 02:23 AM IST
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India needs smart machines for stubble management
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के संयुक्त तत्वावधान में अतंरराष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला हुई। कार्यशाला में जहां पराली जलाने के मामले कम होने पर संतोष व्यक्त किया गया। वहीं देश में एक ही मशीन से संपूर्ण पराली प्रबंधन हो सके, ऐसी मशीन की आवश्यकता बताई गई।
वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, उच्चाधिकारियों, किसानों आदि ने मिलकर वैश्विक पर्यावरणीय चिंता तो ध्यान में रखते हुए पराली प्रबंधन को एक समाधान देने वाली स्मार्ट मशीनेँ, सीधी बिजाई के लिए कम समय व पानी लेने वाली उपयुक्त किस्में, खास तकनीकियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संयुक्त रूप से मिलकर कार्य करने की जरूरत बताई गई।
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कार्यशाला में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस रुक्मणी और , एम एंड टी के उपायुक्त एएन मेशराम ने इस वर्ष कम पराली जलने के लिए सभी के प्रयासों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार ने चालू वर्ष में इन-सीटू प्रबंधन शृंखला में विभिन्न सहभागियों को विशेष सहायता प्रदान की है। कुलदीप सिंह, राजबीर सिंह आदि हरियाणा और पंजाब के किसानों ने कई आशंकाएं जाहिर की।
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सीधी बिजाई को ठीक बताया लेकिन इसके लिए उपयुक्त किस्मों की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए किसान कई तरह की अलग अलग कई महंगी मशीनेँ रखने में सक्षम नहीं है, कोई एक ही ऐसई स्मार्ट मशीन बने, जो पूरा कार्य करें। किसानों ने ये आरोप भी लगाया कि कंपनियां जानबूझ कर मशीनों की कीमत कई गुना बढ़ाकर रख रही हैं।
ट्रैक्टर की सात लाख और उससे चलने वाली मशीनों की कीमत 16 लाख रखी जा रही है, जबकि मशीन की लागत ट्रैक्टर से एक तिहाई भी नहीं होती। वैज्ञानिकों ने स्थायी अवशेष प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधानों और तकनीकी नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए फसल जलाने के लिए अभिनव और व्यवहार्य विकल्प प्रस्तुत किए।
सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि प्रमुख विकल्पों के रूप में धान और गेहूं की छोटी अवधि की किस्में, धान की जल्दी बुवाई और स्मार्ट सीडर्स, हैप्पी सीडर्स और सरफेस सीडर्स जैसी मशीनरी का उपयोग, मशरूम की खेती के लिए धान के भूसे का उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए बायोचार उत्पादन, एक आशाजनक समाधान ऊपर उल्लिखित रणनीतियों के साथ जैव अपघटकों का एकीकरण आदि पर चर्चा की गई।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एडीजी डॉ. राजबीर सिंह ने प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए मशीनरी के वैज्ञानिक उपयोग, स्थानीय अवशेष प्रबंधन दृष्टिकोण और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. बूटा सिंह ढिल्लों ने जून में धान की जल्द बुवाई के खिलाफ सलाह देते हुए पंजाब उप-मृदा जल अधिनियम के तहत भूजल को बचाने के विकल्प सुझाए।
सब पर फिट जैसा समाधान होना चाहिए : हागिवारा
भारत में एफएओ के प्रतिनिधि ताकायुकी हागिवारा ने कहा कि स्थायी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कोई एक-आकार- सभी पर फिट जैसा समाधान नहीं है। इसके लिए सभी हितधारकों के बीच सहयोगात्मक प्रयास की आवश्यकता है। समाधानों को पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करना चाहिए, किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए और उनके लिए व्यावहारिक और स्वीकार्य दोनों होना चाहिए।
बासमती की तीन नई किस्में शीघ्र होगी रिलीज : चौधरी
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कौल के चावल अनुसंधान केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ओपी चौधरी ने कहा कि बासमती चावल की तीन नई किस्में जल्द ही जारी की जाएंगी। साथ ही कई अन्य उन्नत किस्मों की जांच की जा रही है, जिनमें कम बायोमास, कम पानी की आवश्यकता, जल्दी परिपक्वता और खरपतवारनाशकों को सहन करने की क्षमता शामिल है।

समाधान के रूप में दी कट सॉयलर की जानकारी
जापान इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर साइसेंस (जेआईआरसीएएस) व सीएसएसआरआई के सहयोग से जापानी कट सायलर के भारतीय वर्जन को तैयार कर प्रस्तुत किया गया, जिसे पराली प्रबंधन के लिए उपयोगी बताया गया। सीएसएसआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र यादव ने बताया कि ये मशीन जापान ने तैयार की है, जिसे भारतीय फसल व मौसम के अनुसार तैयार करने पर कार्य किया जा रहा है, जो पराली को काटकर उसी खेत में करीब 50 से 60 सेंटीमीटर जमीन के अंदर पहुंचा देती है, जिसके उसके सभी पोषक तत्व खेत को मिलते हैं। जापान के अधिकारियों ने इसकी जानकारी कार्यशाला में दी।
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