{"_id":"6257359a5c54224fbf3f33ba","slug":"in-this-way-the-traditional-games-of-india-will-become-extinct-karnal-news-knl104879518","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसे तो भारत के परंपरागत खेल हो जाएंगे विलुप्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसे तो भारत के परंपरागत खेल हो जाएंगे विलुप्त
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की जारी प्रथम सूची में शामिल 16 खेलों में जहां टी 20 क्रिकेट को शामिल किया गया है, वही, पहले से ही निकाले गए शूटिंग, तीरंदाजी के बाद अब कुश्ती जैसे खेल को बाहर कर दिया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के खिलाड़ियों पर पडे़गा।
कुश्ती खिलाड़ी और खेल प्रशिक्षकोें का कहना है कि वह इस कदम से निराश और नाराज हैं। हमारे देश के खिलाड़ियों ने जब भी किसी खेल में बेहतर प्रदर्शन किया है उसी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोक लगा दी गई या नए नियम बना दिए गए। जिसके चलते हमारे खिलाड़ी कई बार पिछड़े लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा प्रयास कर अपनी जगह बनाई। उनका कहना है कि, लगता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं को आयोजित करने वाले संगठनों में भारत की ओर से मजबूती से अपनी बात नहीं रखी जाती। यही हाल रहा तो भारत के परंपरागत खेल तो विलुप्त ही हो जाएंगे। साथ ही भारत की पदक तालिका पर भी फर्क पड़ेगा।
क्या बोले खिलाड़ी
कुश्ती इवेंट में ग्रीको रोमन को तो पहले ही निकाल दिया गया था। अब पूरे कुश्ती खेल को ही बाहर करना निराशाजनक है। इसका देश भर के खिलाड़ियों पर असर पड़ेगा, सबसे ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ियों पर पड़ेगा। हमारे कुश्ती खिलाड़ियों ने दुनिया में कुश्ती से देश का बहुत मान बढ़ाया है। यह फैसला निराशाजनक है, इस पर पुनरविचार करना चाहिए।
विज्ञापन
वजीर मलिक, कुश्ती प्रशिक्षक
राष्ट्रमंडल खेल ओलंपिक के बाद सबसे लोकप्रिय और बड़ी खेल प्रतियोगिता है, जिसमें भारत के कुश्ती खिलाड़ियों का हमेशा से दबदबा रहा हैं। कुश्ती को बाहर करने से हमारी पदक तालिका पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। इस फैसले से पुराने खिलाड़ियों को बहुत निराशा हुई है। युवा खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं।
अशोक दुआ, जिला खेल अधिकारी
कुश्ती खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेल हो या अन्य प्रतियोगिताएं, सभी में सबसे ज्यादा पदक लाते हैं। शायद इसी कारण से कुश्ती को बाहर किया जा रहा है। यह खेल तो खिलाड़ी को संयमित और नियमित बनाता है। ऐसे में इसे बाहर करना हमारे देश के खेल व खिलाड़ियों के साथ पक्षपात करने जैसा है।
जगदीप सिंह पोसवाल, महासचिव जिला कुश्ती संघ
कुश्ती को बाहर करना भारत के लोकप्रिय खेल का अपमान है। हर खिलाड़ी का सपना होता है ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक लाना। कुश्ती तो भारत में खेलों की आत्मा है। ऐसे में इसे बाहर करना आत्मा को खत्म करने जैसा है। भारत सरकार को इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।
हरीश बड़ौता, कुश्ती प्रशिक्षक
विज्ञापन
करनाल। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की जारी प्रथम सूची में शामिल 16 खेलों में जहां टी 20 क्रिकेट को शामिल किया गया है, वही, पहले से ही निकाले गए शूटिंग, तीरंदाजी के बाद अब कुश्ती जैसे खेल को बाहर कर दिया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के खिलाड़ियों पर पडे़गा।
कुश्ती खिलाड़ी और खेल प्रशिक्षकोें का कहना है कि वह इस कदम से निराश और नाराज हैं। हमारे देश के खिलाड़ियों ने जब भी किसी खेल में बेहतर प्रदर्शन किया है उसी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोक लगा दी गई या नए नियम बना दिए गए। जिसके चलते हमारे खिलाड़ी कई बार पिछड़े लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा प्रयास कर अपनी जगह बनाई। उनका कहना है कि, लगता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं को आयोजित करने वाले संगठनों में भारत की ओर से मजबूती से अपनी बात नहीं रखी जाती। यही हाल रहा तो भारत के परंपरागत खेल तो विलुप्त ही हो जाएंगे। साथ ही भारत की पदक तालिका पर भी फर्क पड़ेगा।
विज्ञापन
क्या बोले खिलाड़ी
कुश्ती इवेंट में ग्रीको रोमन को तो पहले ही निकाल दिया गया था। अब पूरे कुश्ती खेल को ही बाहर करना निराशाजनक है। इसका देश भर के खिलाड़ियों पर असर पड़ेगा, सबसे ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ियों पर पड़ेगा। हमारे कुश्ती खिलाड़ियों ने दुनिया में कुश्ती से देश का बहुत मान बढ़ाया है। यह फैसला निराशाजनक है, इस पर पुनरविचार करना चाहिए।
विज्ञापन
वजीर मलिक, कुश्ती प्रशिक्षक
राष्ट्रमंडल खेल ओलंपिक के बाद सबसे लोकप्रिय और बड़ी खेल प्रतियोगिता है, जिसमें भारत के कुश्ती खिलाड़ियों का हमेशा से दबदबा रहा हैं। कुश्ती को बाहर करने से हमारी पदक तालिका पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। इस फैसले से पुराने खिलाड़ियों को बहुत निराशा हुई है। युवा खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं।
अशोक दुआ, जिला खेल अधिकारी
कुश्ती खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेल हो या अन्य प्रतियोगिताएं, सभी में सबसे ज्यादा पदक लाते हैं। शायद इसी कारण से कुश्ती को बाहर किया जा रहा है। यह खेल तो खिलाड़ी को संयमित और नियमित बनाता है। ऐसे में इसे बाहर करना हमारे देश के खेल व खिलाड़ियों के साथ पक्षपात करने जैसा है।
जगदीप सिंह पोसवाल, महासचिव जिला कुश्ती संघ
कुश्ती को बाहर करना भारत के लोकप्रिय खेल का अपमान है। हर खिलाड़ी का सपना होता है ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक लाना। कुश्ती तो भारत में खेलों की आत्मा है। ऐसे में इसे बाहर करना आत्मा को खत्म करने जैसा है। भारत सरकार को इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।
हरीश बड़ौता, कुश्ती प्रशिक्षक