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Karnal News: गोरा बनने के चक्कर में बिगाड़ रहे चेहरे की रंगत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 02:59 AM IST
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In an attempt to become fair, the complexion of the face is getting spoiled
- सोशल मीडिया पर रील देखकर इस्तेमाल किए जा रहे स्टेराॅयड पहुंचा रहे त्वचा को नुकसान, 15 से 20 मरीज आ रहे रोज ओपीडी में
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काजल पांचाल

करनाल। गोरा दिखने के चक्कर में लोग अपनी त्वचा की रंगत को बिगाड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सुंदर दिखने के लिए लोग डाॅक्टर की सलाह के बगैर ही स्टेराॅयड का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये स्टेराॅयड युक्त क्रीम कुछ समय के लिए तो चेहरे को चमका देता है, लेकिन बाद में इसके साइड इफेक्ट बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं।
नागरिक अस्पताल के वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में रोज इस तरह के 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। इनमें त्वचा संबंधी परेशानियां होती हैं। जानकारी करने पर पता चलता है कि इनमें आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जिन्होंने गोरा बनने की चाह में सोशल मीडिया पर रील देखकर स्टेराॅयड का इस्तेमाल किया। कुछ ऐसे भी मामले हैं, जिनमें कील-मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए स्टेराॅयड लिए गए। ऐसे मरीजों में महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी हैं।
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नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डाॅ. एसपी सिंघल का कहना है कि स्टेराॅयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल डाॅक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए। चिकित्सक सबसे पहले यह देखता है कि किस तरह की त्वचा के लिए किस तरह का उपचार किया जाना ठीक रहेगा। स्टेराॅयड का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और जरूरी होने पर ही किया जाता है।
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त्वचा पर एलर्जी होने और रक्तचाप बढ़ने का खतरा
डाॅ. सिंघल का कहना है कि डाॅक्टर की सलाह के बगैर स्टेराॅयड क्रीम का इस्तेमाल चेहरे की रंगत बिगाड़ सकता है। त्वचा पर एलर्जी हो सकती है। चेहरे पर सूजन आ सकती है। शरीर का रक्तचाप बढ़ सकता है। लगातार इस्तेमाल से त्वचा की ऊपरी परत खराब हो सकती है। चेहरे पर दाग और धब्बे भी हो सकते हैं। ऐसे भी केस आए हैं, जिनमें ये परेशानियां नजर आने के बाद भी स्टेराॅयड क्रीम का इस्तेमाल बंद नहीं किया गया। परेशानी बढ़ने पर मरीज ने डाॅक्टर का रुख किया।

मेलेनिन से तय होता है रंग
त्वचा की रंग के पीछे जो चीज काम करती है उसे मेलेनिन कहा जाता है। अगर किसी के शरीर में इस रंग द्रव्य की मात्रा कम होती है तो उसकी त्वचा का रंग साफ होता है। इसकी मात्रा अधिक होने पर विपरीत परिणाम आता है। मेलेनिन त्वचा की मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं से निकलता है। शरीर में मेलेनिन की मात्रा कुछ अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें आनुवंशिकी प्रमुख है।
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