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धरी रह गई चुनावी तैयारियां, निरक्षरों को झटका

Wed, 12 Aug 2015 01:10 AM IST
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 12 Aug 2015 01:10 AM IST
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हरियाणा में पंचायती चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए दसवीं और आठवीं
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पास करने की शर्त ने जिले की कई पंचायतों के समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं।

पढ़ाई की परीक्षा में फेल होने वाले चौधरियों को आस थी कि वे सियासत की सीढ़ियां चढ़ेंगे और पंचायत चुनाव की परीक्षा में जरूर पास होंगे, लेकिन सरकार की शर्त ने उनके सपने तोड़ते हुए करारा झटका दिया है। अब आठवीं पास महिलाएं और दसवीं पास पुरुष ही पंचायती चुनाव लड़ पाएंगे। अब गंभीर आरोपों में फंसे और बिजली और बैंक के डिफाल्टरों को भी चुनाव से बाहर करने पर कई दागियों के दांव उल्टे पड़ गए हैं। कैबिनेट के इस फैसले से कहीं जिले में खुशी तो कहीं गम का आलम रहा।
करनाल में सभी सामाजिक संस्थाओं ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर की। वहीं कई दिनों से चुनावी समर में उतरे अनपढ़ संभावित प्रत्याशियों की सभी तैयारियां धरी की धराई रह गई। अब इन प्रत्याशियों के सरपंच बनने के सपने कभी साकार नहीं हो सकेंगे। इनके सभी अरमान इस फैसले के साथ धराशायी हो गए। हालांकि, चौधर के सपने को पूरा करने के लिए फैसले के तुरंत बाद ही चौधरियों ने अपने बेटे और बहू की डिग्री पर दांव लगाने की तैयारी कर ली है।
जिले में 30 प्रतिशत निरक्षर
करनाल जिले की बात करें तो यहां पिछले प्लान में कुल 372 पंचायतें थीं। इनमें कुल 35 हजार 95 पंच चुने गए। इन पंचों में से करीब 30 प्रतिशत पंच व सरपंच अनपढ़ हैं। करीब 6 लाख 25 हजार 45 वोटर जिनमें 3 लाख 44 हजार 369 पुरुष व 2 लाख 80 हजार 676 महिला मतदाताओं ने इन पंचों व सरपंचों का चयन किया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। चुनावी समर में इस बार पढ़े लिखे उम्मीदवार ही मैदान में उतरेंगे, जोकि जिले की 352 पंचायतों का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंगलवार को कैबिनेट के फैसले की तमाम सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जमकर सरहाना की। सभी ने इसे प्रदेश सरकार को बेहतरीन कदम बताते हुए इसे समाज व प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
अब अपने बच्चों को उतारने की तैयारी
पंचायती समर में कूदकर पूरी जान लगा चुके उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले के बाद अपने बच्चों को मैदान में उतारने का मन बनाया है। चूंकि कई गांव में कई उम्मीदवार अभी तक हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं। ऐसे मेें यह उम्मीदवार अब किसी भी हाल में वापस बैठने के मूड़ में नहीं हैं। सरकार के इस फैसले से सभी गांव का अब तक का समीकरण पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।

प्रदेश सरकार का फैसला वास्तव में सराहनीय है। इससे शिक्षा का स्तर ऊंचा उठेगा। चूंकि सरपंच या पंच बनने के लिए अब सभी को पढ़ाना पड़ेगा। साथ ही एक स्वच्छ व पढ़े लिखे राष्ट्र का निर्माण होगा। पढ़ा लिखा सरपंच आएगा तो वह अपनी जिम्मेदारी व ड्यूटी को समझने के साथ उसे पूरा भी कर सकेगा। पहले तो 5 वर्षों में सरपंच को यह भी नहीं पता चल पता था कि उसने करना क्या है।
डॉ. रमेश धीमान, गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, करनाल।
इस फैसले का जितना सम्मान किया जाए कम है। अब सरपंच अनपढ़ होने के कारण आने वाली दिक्कतें ग्रामीणों को नहीं आएंगी। न कोई पढ़े लिखे सरपंचों और पंचों से गलत तरीके से बहकाकर उनसे कहीं भी हस्ताक्षर ले सकेगा। महिलाएं भी वही आएंगी जो पढ़ी लिखी होंगी। निश्चित रूप से बेहतर समाज के लिए सरकार का बेहतरीन कदम है।
नरेंद्र विर्क, प्रिंसिपल।
क्रिमिनल व अनपढ़ लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का फैसला एक सभ्य समाज व सभ्य सरकार का फैसला है। इससे समाज में बढ़ रहे क्राइम पर अंकुश लगेगा। पढ़े लिखे प्रतिनिधि जनता का प्रतिनिधित्व करेंगे तो ग्रामीणों की समस्याएं भी जल्द से जल्द समाप्त होने की उम्मीद रहेगी। फैसला बेशक अभी कुछ लोगों को सही न लगे, लेकिन इसकी सही उपयोगिता आने वाले समय में लोगों का पता चलेगी।
डॉक्टर योगेश शर्मा, मेडिकल कॉलेज, करनाल।
नि:संदेह फैसला सम्मानीय है। यह फैसला पूर्व सरकार यदि ले लेती तो आज हम बेहतरीन समाज की कल्पना कर सकते थे। कम से कम 8वीं और 10वीं की योग्यता वाले लोग यदि जनता का प्रतिनिधित्व करेंगे तो उनसे अच्छे से अच्छे की उम्मीद की जा सकती है। ऐसे में भ्रष्टाचार को खत्म करने के सरकार के कदम भी सार्थक हो सकेंगे।
शोभा चौहान, प्रिंसिपल, जीजीएसएसएस, करनाल
समाज व राष्ट्र की भलाई के लिए सही समय पर उठाया गया सही कदम है। पंचायती चुनावों से शुरुआत की गई यह पहले अब एमपी व एमएलए के चुनावों तक पहुंचेगी ऐसी उम्मीद की जा सकती है। पहले गांव में सुधार होगा और फिर स्वच्छ छवि वाले पढ़े लिखे उम्मीदवार देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। क्राइम को रोकने में दोनों ही कदम बेहद सराहनीय रहेंगे।
डा. प्रभजोत कौर
पढ़े लिखे व स्वच्छ छवि के लोग सामने आने के कारण धर्म युक्त समाज का निर्माण होना तय है। पढ़ा लिखा व्यक्ति अपने गुस्से पर भी कंट्रोल कर सकता है। समाज की बेहतरी के लिए यह कदम बेहद प्रशंसनीय है। पढ़े खिले सरपंच व पंच को कोई भी बहका नहीं सकेगा। खुद सरपंच व पंच भी लेटर पढ़ सकेंगे। समस्याओं के निवारण के लिए खुद आगे आकर अधिकारियों से बातचीत कर सकेंगे, जोकि पहले नहीं हो पाता था।
महोन लाल गुप्ता, समाजसेवा
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