{"_id":"612aa52b8ebc3e06046cdc4b","slug":"if-there-is-a-creator-then-you-can-create-an-image-karnal-news-knl81441295","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंदोलन को हवा दे गया ‘टकराव’, पुलिस याद दिला रही वादाखिलाफी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंदोलन को हवा दे गया ‘टकराव’, पुलिस याद दिला रही वादाखिलाफी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनाल। शनिवार को नेशनल हाइवे स्थित करनालके बसताड़ा टोल पर किसानों के साथ हुआ पुलिस का टकराव आंदोलन को हवा दे गया। इससे नाराज किसान नेताओं ने एलान किया है कि इस बर्बरता के बाद आंदोलन को सूबे में और तेज किया जाएगा। जिसकी रणनीति 30 अगस्त को करनाल में ही बनेगी। इसके लिए विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं से करनाल में जुटने का आह्वान किया गया है। उधर, पुलिस लाठीचार्ज की इस घटना को मामूली बल प्रयोग करार देते हुए किसान नेताओं को टोहाना में किया वादा याद दिला रही है।
हालांकि इस टकराव की आशंका को लेकर प्रशासन और पुलिस शुक्रवार से ही सतर्क था। जब एक किसान नेता ने वीडियो वायरल कर भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करने के लिए शनिवार सुबह डेरा कार सेवा में एकत्रित होने का आह्वान किया था। इसी के मद्देनजर करनाल शहर को पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया और शहर में घुसने में नाकामयाब किसान नेशनल हाईवे बसताड़ा टोल पर एकत्रित हो गए। जहां पुलिस के साथ उनका टकराव हुआ और पुलिस ने उन पर लाठियां भांजी।
इस घटनाक्रम के बाद भारतीय किसान यूनियन ने जाम में फंसी जनता की परेशानी का हवाला देते हुए भले ही शनिवार देरशाम करनाल समेत विभिन्न जिलों में लगाया गया जाम हटा दिया। लेकिन किसान नेता इस टकराव को अपने आंदोलन की बुनियाद मजबूत करने वाला मान रहे हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस के अनुसार पुलिस ने जो बर्बरता की है, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन किसानों के साथ है, इसके बाद यह आंदोलन ज्यादा मजबूत और तेज होगा।
विज्ञापन
उधर, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा के करनाल में बसताड़ा टोल पर आंदोलनरत किसानों पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान धरने पर बैठे हुए थे, पुलिस ने बैठे हुए किसानों पर लाठियां भांजी है। इससे सरकार का असली चेहरा सामने आया है। उनके अनुसार 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत से ध्यान भटकाने के लिए सरकार षडयंत्र रच रही है। सरकार चाहती है कि हरियाणा के किसान महापंचायत में न जा पाएं, लेकिन देशभर का किसान कृषि कानूनी के खिलाफ पूरी तरह एकजुट हैं।
उधर, हरियाणा पुलिस के एडीजीपी लॉ एंड आर्डर नवदीप विर्क ने किसानों को उनका टोहाना में हुआ वादा याद दिलाते हुए कहा कि 7 जून को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने पुलिस को लिखित आश्वासन दिया था कि भविष्य में किसानों का आंदोलन उग्र रूप धारण नहीं करेगा और वे शांतिप्रिय ढंग से प्रदर्शन करेंगे। लेकिन उसके बाद काफी घटनाओं में आंदोलन हिंसक हुआ है। करनाल की घटना भी उसी में से एक थे।
लाठीचार्ज के बाद पुलिस का भावुक अंदाज
लाठीचार्ज की इस घटना के बाद शनिवार देररात को पुलिस का इस घटनाक्रम पर भावुक अंदाज दिखा। हरियाणा पुलिस ने रात को वीडियो वायरल कर बसताड़ा टोल पर हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वीडियो में पहले एक किसान कस्सी के साथ पुलिस जवानों पर हमला करता हुआ दिख रहा है। उसके बाद लाठीचार्ज के बाद एक पुलिस का जवान ही खून से लथपथ किसान के सिर पर पट्टी बांधता दिख रहा है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए हरियाणा पुलिस ने लिखा है कि - मैं भी आपका ही भाई-बेटा हूं। करनाल में बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान एक घायल जवान की पट्टी करता जवान। पुलिस ने आमजन को सूचना देते हुए अंत में लिखा है कि रात तक नेशनल हाईवे-44 (अंबाला-दिल्ली) पर सभी जगह से जाम हट गया है और इस पर यातायात सुचारू हो गया है।
विज्ञापन
हालांकि इस टकराव की आशंका को लेकर प्रशासन और पुलिस शुक्रवार से ही सतर्क था। जब एक किसान नेता ने वीडियो वायरल कर भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करने के लिए शनिवार सुबह डेरा कार सेवा में एकत्रित होने का आह्वान किया था। इसी के मद्देनजर करनाल शहर को पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया और शहर में घुसने में नाकामयाब किसान नेशनल हाईवे बसताड़ा टोल पर एकत्रित हो गए। जहां पुलिस के साथ उनका टकराव हुआ और पुलिस ने उन पर लाठियां भांजी।
विज्ञापन
इस घटनाक्रम के बाद भारतीय किसान यूनियन ने जाम में फंसी जनता की परेशानी का हवाला देते हुए भले ही शनिवार देरशाम करनाल समेत विभिन्न जिलों में लगाया गया जाम हटा दिया। लेकिन किसान नेता इस टकराव को अपने आंदोलन की बुनियाद मजबूत करने वाला मान रहे हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस के अनुसार पुलिस ने जो बर्बरता की है, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन किसानों के साथ है, इसके बाद यह आंदोलन ज्यादा मजबूत और तेज होगा।
विज्ञापन
उधर, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा के करनाल में बसताड़ा टोल पर आंदोलनरत किसानों पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान धरने पर बैठे हुए थे, पुलिस ने बैठे हुए किसानों पर लाठियां भांजी है। इससे सरकार का असली चेहरा सामने आया है। उनके अनुसार 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत से ध्यान भटकाने के लिए सरकार षडयंत्र रच रही है। सरकार चाहती है कि हरियाणा के किसान महापंचायत में न जा पाएं, लेकिन देशभर का किसान कृषि कानूनी के खिलाफ पूरी तरह एकजुट हैं।
उधर, हरियाणा पुलिस के एडीजीपी लॉ एंड आर्डर नवदीप विर्क ने किसानों को उनका टोहाना में हुआ वादा याद दिलाते हुए कहा कि 7 जून को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने पुलिस को लिखित आश्वासन दिया था कि भविष्य में किसानों का आंदोलन उग्र रूप धारण नहीं करेगा और वे शांतिप्रिय ढंग से प्रदर्शन करेंगे। लेकिन उसके बाद काफी घटनाओं में आंदोलन हिंसक हुआ है। करनाल की घटना भी उसी में से एक थे।
लाठीचार्ज के बाद पुलिस का भावुक अंदाज
लाठीचार्ज की इस घटना के बाद शनिवार देररात को पुलिस का इस घटनाक्रम पर भावुक अंदाज दिखा। हरियाणा पुलिस ने रात को वीडियो वायरल कर बसताड़ा टोल पर हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वीडियो में पहले एक किसान कस्सी के साथ पुलिस जवानों पर हमला करता हुआ दिख रहा है। उसके बाद लाठीचार्ज के बाद एक पुलिस का जवान ही खून से लथपथ किसान के सिर पर पट्टी बांधता दिख रहा है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए हरियाणा पुलिस ने लिखा है कि - मैं भी आपका ही भाई-बेटा हूं। करनाल में बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान एक घायल जवान की पट्टी करता जवान। पुलिस ने आमजन को सूचना देते हुए अंत में लिखा है कि रात तक नेशनल हाईवे-44 (अंबाला-दिल्ली) पर सभी जगह से जाम हट गया है और इस पर यातायात सुचारू हो गया है।

शहर में जगह जगह लगे बैरीगेटस के कारण दूध की सप्लाई करने वाले सुनील का दूध खराब। संवाद