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Karnal News: स्वयंसेवक के रूप में 20 वर्ष बीते, अब तो पक्का कर दो सरकार...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 02:09 AM IST
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I have spent 20 years as a volunteer, now please make it permanent, Government...
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सेक्टर-12 स्थित केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के कार्यालय पर महापड़ाव डाला। इस दौरान विभिन्न जिलों से पहुंची कार्यकर्ताओं ने करीब तीन घंटें तक अपनी मांगों को लेकर गुहार लगाई। इसके बाद लघु सचिवालय तक जुलूस के रूप में रोष मार्च निकाला। प्रदर्शन कर रही आशा वर्करों ने कहा कि स्वयंसेवक के तौर पर काम करते हुए 20 वर्ष पूरे हो गए हैं लेकिन सरकार की ओर से उन्हें अभी तक पक्का नहीं किया जा रहा है। उन्होंने 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और 2023 में 73 दिन की हड़ताल के बकाया मानदेय जारी करने की मुख्य मांग रखी।

महापड़ाव की अध्यक्षता करनाल से नीरू, पनीपत से सुशीला, सोनीपत से छवि, अंबाला से सर्वजीत कौर, कुरुक्षेत्र से मनजीत कौर, यमुनानगर से सुदेश कुमारी ने की। संचालन राज्य सचिव सुदेश रानी ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार आशा वर्कर्स को स्वयंसेवक के रूप में कार्य करते हुए 20 वर्ष पूरे हो गए हैं, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को सुधारने और कोरोना महामारी में वालंटियर कहीं जाने वाली आशा वर्करों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ ने आशाओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर पुरस्कार भी दिया। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्करों के महत्वपूर्ण कार्यों को अनदेखा कर रही हैं लंबे समय से सरकार द्वारा मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। जबकि बिना संसाधन और प्रोत्साहन राशि के काम को ऑनलाइन भी कराया जा रहा है।
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उनका कहना है कि बजट में केंद्र सरकार ने आशाओं की प्रोत्साहन राशी 1500 रुपये मासिक बढ़ाने की घोषणा की थी, परंतु उसे लागू नहीं किया गया। इस अवसर पर सीटू राज्य सचिव सुनील दत्त, सतीश सेठी, सतपाल सैनी, बिजनेश राणा, ओपी माटा, सुशील गुर्जर, सेवा राम, सत्यवान, जयप्रकाश शास्त्री, कलीराम, शिमला देवी और अनिल कुमार मौजूद रहे। ब्यूरो
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ये हैं मुख्य मांगें-

- वर्ष 2023 में 73 दिन की हड़ताल के दौरान का मानदेय जारी हो।

- पक्का कर्मचारी बनाएं, तब तक 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन हो।
- केंद्र सरकार की 1500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा तुरंत लागू हो।
- रिटायरमेंट लाभ बढ़ाया जाए। सरकारी बैंकों से ऋण की सुविधा मिले।

- ऑनलाइन एप में काम के लिए अलग से मानदेय मिले। चार श्रम संहिताएं रद्द करें।
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