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Karnal News: आफत में सुहाग, गोद में बच्चा, एंबुलेंस का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2024 05:38 AM IST
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Husband in trouble, child in lap, waiting for ambulance
शहर के नागरिक अस्पताल में ट्रामा सेंटर की सीढियों पर बच्चे को गोद में लेकर एंबुलेंस का इंतजार क
अंबाला सिटी। डायल 112 और नागरिक अस्पताल की खराब एंबुलेंस मरीजों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। आए दिन नागरिक अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। विभाग ने अभी तक खराब एंबुलेंस को ठीक नहीं कराया है।
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शनिवार को भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया। एक महिला गंभीर अवस्था में अपने पति को लेकर अस्पताल पहुंची। यहां से रेफर कार्ड बनने के एक घंटे बाद तक एंबुलेंस नहीं आई। इस पूरी प्रणाली से अंजान पत्नी इधर से उधर भटकती रही, लेकिन उसे पूछने वाला कोई नहीं था। दरअसल, शनिवार सुबह हरि माजरा निवासी जसबीर सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उसकी पत्नी ममता रानी शनिवार सुबह 10 बजे सिटी के नागरिक अस्पताल पहुंची।
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यहां पहुंचने पर पता लगा कि जसबीर ने जहरीला पदार्थ निगला है। जबकि उसकी पत्नी का कहना था कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। ईसीजी और प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने मरीज को 11 बजे चंडीगढ़ रेफर कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने महिला के नंबर से डायल 112 पर फोन कर एंबुलेंस को बुलाया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। एंबुलेंस को आने में एक घंटे का समय लग गया।
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इस दौरान महिला रेफर कार्ड और अपना चार वर्ष का बेटा गोद में लिए हुए ट्रामा सेंटर की सीढि़यों पर एंबुलेंस का इंतजार करती रही। 12 बजे एंबुलेंस मरीज को लेने के लिए पहुंची तब जाकर मरीज को चंडीगढ़ ले जाया गया। महिला को इस बात की भी जानकारी नहीं थी कि उसके पति को क्या हुआ है और उसे चंडीगढ़ क्यों भेजा जा रहा है।



अस्पताल में 15 में से छह एंबुलेंस खराब



जिले में करीब 27 एंबुलेंस हैं। इनमें से सिटी नागरिक अस्पताल के पास 15 एंबुलेंस हैं और छह एंबुलेंस खराब हैं। ये एंबुलेंस एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान खराब हुई थी। इन्हें ठीक कराने के लिए मोहड़ी भेजा गया है। शनिवार को किसान आंदोलन के 200 दिन पूरे होने पर शंभू बॉर्डर पर तीन एंबुलेंस तैनात की थी कि अगर कोई दिक्कत तो इनका प्रयोग किया जा सके। जो शेष एंबुलेंस हैं उनको भी अलग-अलग काम पर लगा रखा है। ऐसे में एक ही दिन में अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था बिगड़ गई। एक एंबुलेंस गर्भवती को छोड़ने गई थी। हालात यह थे कि जब पीड़ित महिला के पति जसबीर को एंबुलेंस नहीं मिली तो मजबूरन अस्पताल के स्टॉफ ने डायल 112 पर महिला के नंबर से कॉल किया। मगर यहां भी अव्यवस्था देखो कि जिनका दावा है कि वह 15 मिनट में एंबुलेंस पहुंचाने का है वह भी एक घंटे बाद अस्पताल में महिला से मिलने पहुंचे। इसके बाद महिला को डायल 112 से मिली एंबुलेंस चंडीगढ़ पीजीआई लेकर रवाना हुई।



इससे पहले भी देरी पर हो चुके विवाद



इससे पहले भी नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस लाने में देरी के चलते विवाद हो चुके हैं। दो महीने पहले ही हादसे में भाई-बहन को नग्गल में गंभीर चोटें आई थीं। इसके चलते डॉक्टरों ने दोनों को चंडीगढ़ रेफर किया था लेकिन फोन करने के आधे घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। मजबूरन परिजनों को अस्पताल में हंगामा करना पड़ा। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस मिली थी। जबकि नियमों के अनुसार एंबुलेंस को 15 मिनट के भीतर मरीज तक पहुंचना होता है।



वर्जन



अस्पताल के पास जो एंबुलेंस हैं उनमें से छह एंबुलेंस खराब हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए भेजा हुआ है। जल्द ही उन्हें ठीक करवा वापिस इस्तेमाल में लाया जाएगा। एंबुलेंस आने में अगर देरी हुई है तो इसकी जांच कि जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।




-डॉ. हितार्थ, एंबुलेंस सेवा नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।

शहर के नागरिक अस्पताल में ट्रामा सेंटर की सीढियों पर बच्चे को गोद में लेकर एंबुलेंस का इंतजार क

शहर के नागरिक अस्पताल में ट्रामा सेंटर की सीढियों पर बच्चे को गोद में लेकर एंबुलेंस का इंतजार क

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