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Karnal News: डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत में दो साल बाद अस्पताल की लापरवाही उजागर, दो डॉक्टरों पर केस
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- परुथी क्लीनिक के डॉक्टरों के पास उच्च जोखिम गर्भवती की डिलीवरी करवाने की नहीं थी डिग्री, फिर भी कर दी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत में दो साल बाद अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई है। इसके बाद एक क्लीनिक के दो डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि परुथी क्लीनिक के डॉक्टरों के पास उच्च जोखिम गर्भवती की डिलीवरी करवाने की डिग्री नहीं थी इसके बावजूद उन्होंने गर्भवती की डिलीवरी करवा दी। इस कारण कुछ देर बाद ही बच्चे की मौत हो गई। वहीं बाद में महिला की बच्चेदानी भी निकालनी पड़ी। मामला वर्ष 2021 का है, लेकिन सीएमओ को अब जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। आरोपी डॉक्टरों ने भर्ती महिला को अपने क्लीनिक पर 10 साल पहले फर्जी भर्ती दिखाया।
गली नंबर दो हांसी रोड करनाल निवासी निशा रानी ने सीएम विंडो में दी शिकायत में आरोप लगाया था कि 17 सितंबर 2021 की रात करीब एक बजे उसे लेबर पेन हुआ तो वह पति व सास के साथ परुथी क्लीनिक करनाल में गई। जहां पर उसे डॉक्टरों ने दाखिल कर लिया और उसके पति से पांच हजार रुपये डिलीवरी के लिए ले लिए और डॉ. कोमल व डॉ. दीपक ने उससे कहा कि सुबह 10 बजे उसकी सामान्य डिलीवरी हो जाएगी। इसके बाद आरोपी डॉक्टर उसे डिलीवरी कक्ष में ले गए। जहां डिलीवरी दो बजे तक नहीं हुई तो उसकी सास गंगा ने दोनों डॉक्टरों से कहा कि अगर सामान्य डिलीवरी नहीं हो रही है तो उसकी पुत्र वयू को रेफर कर दो। वे ऑपरेशन से डिलीवरी करवा लेंगे, लेकिन डॉक्टर कहते रहे कि पांच मिनट बाद डिलीवरी हो जाएगी और ऐसा करते-करते काफी समय बीत गया।
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि परुथी क्लीनिक से डॉ. कोमल नॉर्मल डिलीवरी कर रही थीं तो पेट में डॉक्टर की लापरवाही से उसके बच्चे की गर्दन में कट लग गया। जब बच्चे ने जन्म लिया तो बच्चे की गर्दन के पीछे की तरफ कट का निशान था। उसके बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन बच्चे को श्री हरि अस्पताल करनाल रेफर कर दिया। जहां पर बच्चा दाखिल हुआ और डॉ. दीपक ने श्री हरि अस्पताल में इलाज के लिए 20 हजार रुपये उसके पति से ले लिए और आधे घंटे बाद ही श्री हरि अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। जहां से परुथी क्लीनिक का कंपाउंडर शमशेर व उसका पति मृतक बच्चे को लेकर श्मशान गप्पू बाग में ले गए। जहां पर शमशेर वापस आ गया और उसका पति व अन्य रिश्तेदारों ने बच्चे को श्मशान में दफना दिया।
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डिलीवरी के कुछ घंटे बाद बिगड़ी तबीयत
पीड़ित महिला ने बताया कि डिलीवरी के कुछ घंटे बाद ही उसकी तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद डॉक्टर स्वयं अपनी कार में उसे एक अल्ट्रासाउंड केंद्र में ले गए। जहां उसका अल्ट्रासाउंड किया गया। जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे दवा देकर घर भेज दिया। इसके बाद एक अक्तूबर 2021 को फिर से उसकी तबीयत खराब हो गई। उसके बाद उसके पति व सास ने परुथी क्लीनिक पर फोन कर डॉक्टरों से कहा कि उसके पुत्रवधू की तबीयत खराब हो जा रही है तो उसके बाद डॉक्टरों ने उसको अमृतधारा अस्पताल में भर्ती करवा दिया। फिर अगले दिन दो अक्तूबर 2021 को उसके तीन ऑपरेशन किए गए। जिसमें उसकी बच्चेदानी भी ऑपरेशन द्वारा निकाल दी गई, क्योंकि उसकी बच्चेदानी पर कट लगा हुआ था जिस कारण उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी, लेकिन उसके बावजूद उसकी तबीयत खराब रहती है।
सीएमओ की रिपोर्ट में ये मिला
जांच में पाया गया कि परुथी क्लीनिक के पास उच्च जोखिम गर्भावस्था की संभाल करने के लिए कोई डिग्री नहीं है। सभी रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि किसी भी रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं किया गया था, क्योंकि मरीज को 17 सितंबर 2021 को भर्ती कराया गया था, लेकिन उसने 18 सितंबर 2011 को अपने बेड पर मरीज को भर्ती दिखाया था और प्रवेश पर मरीज की सहमति दिखाई थी और प्रसव के साथ-साथ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था भी नहीं ली गई।
वर्जन -
पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी परुथी क्लीनिक के डॉक्टरों पर मामला दर्ज किया गया है। वहीं सीएमओ की जांच रिपोर्ट उनके पास आ चुकी है। अब वे अपने तौर पर जांच करेंगे। जिसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
नसीब सिंह, प्रभारी, शहर थाना, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत में दो साल बाद अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई है। इसके बाद एक क्लीनिक के दो डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि परुथी क्लीनिक के डॉक्टरों के पास उच्च जोखिम गर्भवती की डिलीवरी करवाने की डिग्री नहीं थी इसके बावजूद उन्होंने गर्भवती की डिलीवरी करवा दी। इस कारण कुछ देर बाद ही बच्चे की मौत हो गई। वहीं बाद में महिला की बच्चेदानी भी निकालनी पड़ी। मामला वर्ष 2021 का है, लेकिन सीएमओ को अब जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। आरोपी डॉक्टरों ने भर्ती महिला को अपने क्लीनिक पर 10 साल पहले फर्जी भर्ती दिखाया।
गली नंबर दो हांसी रोड करनाल निवासी निशा रानी ने सीएम विंडो में दी शिकायत में आरोप लगाया था कि 17 सितंबर 2021 की रात करीब एक बजे उसे लेबर पेन हुआ तो वह पति व सास के साथ परुथी क्लीनिक करनाल में गई। जहां पर उसे डॉक्टरों ने दाखिल कर लिया और उसके पति से पांच हजार रुपये डिलीवरी के लिए ले लिए और डॉ. कोमल व डॉ. दीपक ने उससे कहा कि सुबह 10 बजे उसकी सामान्य डिलीवरी हो जाएगी। इसके बाद आरोपी डॉक्टर उसे डिलीवरी कक्ष में ले गए। जहां डिलीवरी दो बजे तक नहीं हुई तो उसकी सास गंगा ने दोनों डॉक्टरों से कहा कि अगर सामान्य डिलीवरी नहीं हो रही है तो उसकी पुत्र वयू को रेफर कर दो। वे ऑपरेशन से डिलीवरी करवा लेंगे, लेकिन डॉक्टर कहते रहे कि पांच मिनट बाद डिलीवरी हो जाएगी और ऐसा करते-करते काफी समय बीत गया।
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पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि परुथी क्लीनिक से डॉ. कोमल नॉर्मल डिलीवरी कर रही थीं तो पेट में डॉक्टर की लापरवाही से उसके बच्चे की गर्दन में कट लग गया। जब बच्चे ने जन्म लिया तो बच्चे की गर्दन के पीछे की तरफ कट का निशान था। उसके बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन बच्चे को श्री हरि अस्पताल करनाल रेफर कर दिया। जहां पर बच्चा दाखिल हुआ और डॉ. दीपक ने श्री हरि अस्पताल में इलाज के लिए 20 हजार रुपये उसके पति से ले लिए और आधे घंटे बाद ही श्री हरि अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। जहां से परुथी क्लीनिक का कंपाउंडर शमशेर व उसका पति मृतक बच्चे को लेकर श्मशान गप्पू बाग में ले गए। जहां पर शमशेर वापस आ गया और उसका पति व अन्य रिश्तेदारों ने बच्चे को श्मशान में दफना दिया।
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डिलीवरी के कुछ घंटे बाद बिगड़ी तबीयत
पीड़ित महिला ने बताया कि डिलीवरी के कुछ घंटे बाद ही उसकी तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद डॉक्टर स्वयं अपनी कार में उसे एक अल्ट्रासाउंड केंद्र में ले गए। जहां उसका अल्ट्रासाउंड किया गया। जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे दवा देकर घर भेज दिया। इसके बाद एक अक्तूबर 2021 को फिर से उसकी तबीयत खराब हो गई। उसके बाद उसके पति व सास ने परुथी क्लीनिक पर फोन कर डॉक्टरों से कहा कि उसके पुत्रवधू की तबीयत खराब हो जा रही है तो उसके बाद डॉक्टरों ने उसको अमृतधारा अस्पताल में भर्ती करवा दिया। फिर अगले दिन दो अक्तूबर 2021 को उसके तीन ऑपरेशन किए गए। जिसमें उसकी बच्चेदानी भी ऑपरेशन द्वारा निकाल दी गई, क्योंकि उसकी बच्चेदानी पर कट लगा हुआ था जिस कारण उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी, लेकिन उसके बावजूद उसकी तबीयत खराब रहती है।
सीएमओ की रिपोर्ट में ये मिला
जांच में पाया गया कि परुथी क्लीनिक के पास उच्च जोखिम गर्भावस्था की संभाल करने के लिए कोई डिग्री नहीं है। सभी रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि किसी भी रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं किया गया था, क्योंकि मरीज को 17 सितंबर 2021 को भर्ती कराया गया था, लेकिन उसने 18 सितंबर 2011 को अपने बेड पर मरीज को भर्ती दिखाया था और प्रवेश पर मरीज की सहमति दिखाई थी और प्रसव के साथ-साथ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था भी नहीं ली गई।
वर्जन -
पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी परुथी क्लीनिक के डॉक्टरों पर मामला दर्ज किया गया है। वहीं सीएमओ की जांच रिपोर्ट उनके पास आ चुकी है। अब वे अपने तौर पर जांच करेंगे। जिसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
नसीब सिंह, प्रभारी, शहर थाना, करनाल