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Karnal News: शहर में संवरी धरोहर पर गांवों में अनदेखी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2024 04:49 AM IST
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Heritage is preserved in the city but villages are ignored
गगन तलवार
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करनाल। करनाल महारथी दानवीर राजा कर्ण से लेकर मुगल व ब्रिटिश काल तक की निशानियां ऐतिहासिक धरोहर के रूप में समेटे हुए है। ये निशानियां वक्त के साथ-साथ अपना रूप भी खोती गईं। पुरातत्व विभाग के अलावा प्रशासन ने भी इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। लेकिन करनाल के स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद उन्हें खासतौर पर संवारा गया।
आजादी के 75 साल बाद कर्ण नगरी की कई धरोहर अपने पुराने वजूद को जिंदा रखते हुए नया रूप में दिखाई दे रही हैं। स्मार्ट सिटी के तहत प्रशासन ने बलड़ी चौक से अग्रसेन चौक तक हेरिटेज कॉरिडोर बनाया। ऐतिहासिक निशानियों के रूप में बलड़ी बाईपास से लेकर पुराना कमेटी चौक तक के करीब पांच किलोमीटर के रास्ते में पड़ने वाली सभी धरोहर को चुना गया।
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इनमें 200 साल पुरानी क्रिश्चियन सिमेटरी, ब्रिटिश काल में बना ओल्ड कचहरी भवन, रिकॉर्ड रूम, कोस मीनार और आजादी से पूर्व का विक्टोरिया मेमोरियल हॉल शामिल है, जिन्हें नया रूप दिया गया। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की निशानियां अनदेखी का शिकार हुए हैं। क्या है इनका इतिहास विश्व धरोहर सप्ताह के अवसर पर पढ़े अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट-
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क्रिश्चियन सिमेटरी में दफन हैं सैनिकों के पार्थिव शरीर
एनडीआरआई रोड पर करीब 200 साल पहले ब्रिटिश सेनाओं की छावनी थी। करीब साढ़े आठ एकड़ की सिमिट्री में उस समय के सैनिकों के पार्थिव शरीर दफन हैं। एक ऊंचा चर्च टावर है, जो दूर से ही दिखाई देता है। पुरातत्व विभाग की ओर से यहां छोटे-छोटे पार्क और फुटपाथ बनवाए गए हैं। प्रवेश द्वार बनेगा और लाइटिंग के साथ मूलभूत सुविधाएं दी गई हैं।
पुरानी कचहरी का खंडहर भवन जोह रहा विकास की बाट
महात्मा गांधी चौक के पास ब्रिटिश काल की पुरानी कचहरी का एक भवन आज भी है। उस जमाने में मुकदमों की सुनवाई और फैसले यहीं हुआ करते थे। अब वर्षों से सेक्टर-12 में नई कचहरी बनने के बाद यह भवन खाली और बदहाल स्थिति में है। 2021 में इसकी मरम्मत करके इसे सुंदर लुक देने और यहां पुस्तकालय भी बनाने की योजना बनी थी। लेकिन अभी तक काम नहीं शुरू हुआ। ऐसे में खंडहर भवन अपने विकास की बाट जोह रहा है।
विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में दी बापू को श्रद्धांजलि
पुराना कमेटी चौक के पास स्थित विक्टोरिया मेमोरियल हॉल भी आजादी से पहले का है। इसे संरक्षित रखने के लिए कई साल पहले पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन लिया था। बताया जाता है कि वर्ष 1948 में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, उस समय इस भवन में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शहर के लोग एकत्रित हुए थे। इसका भी कायाकल्प करने की योजना बनी थी। कुछ कार्य हुआ लेकिन बाकी कार्य अधर में लटका है।

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कोस मीनार
पांच सौ साल पहले कोस मीनार जीटी रोड के सबसे महत्वपूर्ण स्थल में शुमार थी। एक मीनार से दूसरी मीनार होते हुए पत्र अपने पते तक पहुंचते थे। राहगीर इसी मीनार पर पहुंचकर सुस्ता लेते थे। जन सुविधाओं का इंतजाम भी यहीं होता था।
वक्त के बदलते पहिये की गवाह यह मीनार बनी रही हैं। लेकिन आज यही कोस मीनार अपने धुंधले होते इतिहास को देख रही है। इनमें से कई अपने अस्तित्व की लड़ाई भी लड़ रही हैं। बच्चे व किशोर भी इन मीनारों के महत्व से अनजान हैं। क्योंकि इन मीनारों को इस तरह संभालकर नहीं रखा गया कि कोई अपने बच्चों को यहां लाकर उसके बारे में संपूर्ण जानकारी दे सके।
हालांकि इन्हें संवारने के लिए योजना बनी थी, काम भी शुरू हुआ था। लेकिन जिस तरह से पुराने जमाने की सुविधाओं के दावे किए गए थे, वैसा अभी तक कुछ नहीं हो पाया। शहर में मीनार रोड पर एक कोस मीनार, सेक्टर चार में एक, करनाल से घरौंडा के बीच में दो व कुंजपुरा के पास एक कोस मीनार दिखाई देती है।

ताल में स्नान के बाद सोना दान करते थे कर्ण
शहर के मध्य में स्थापित कर्ण ताल को देखते ही करनाल का इतिहास आंखों के सामने आने लगता है। यह वही जगह है, जहां कर्ण स्नान करने के बाद सोना दान करते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने अपने कार्यकाल में कर्ण ताल की स्थिति को सुधारा था, इसके बाद अनदेखी का शिकार होता गया। बरसों बाद सीएम मनोहर लाल ने इसकी सुध ली और वादे अनुसार इसका जीर्णोद्धार करवाया। यहां सुविधाएं बढ़ाई गई तो साथ ही म्यूजिकल फाउंटेन की स्थापना की गई। शाम के समय संगीत और रंग-बिरंगी लाइटों के बीच फव्वारा लोगों के आकर्षण का केंद्र है।



हेरिटेज कॉरिडोर में महाभारत काल की तस्वीरें
अग्रसेन चौक तक चार किलोमीटर का फुटपाथ और इसके साथ दीवार बनाई गई। इस पर करनाल का इतिहास को दर्शाती पेंटिंग हुई। वहीं फुटपाथ के साथ ग्रील लगाकर हरियाली भी की गई। स्मार्ट सिटी के तहत 2.71 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्तमान में एनडीआरआई गेट से आगे राजा कर्ण की प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अलावा भगवत गीता द्वार भी इसी मार्ग की शोभा बढ़ा रहा है। कई जगह महाभारत काल व करनाल से जुड़े इतिहास की पेंटिंग बनी है।
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