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Karnal News: यहां खाकी वर्दी चढ़ाने से पुलिस में भर्ती की चाह होती है पूरी
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विशु शर्मा
करनाल। ऊंचा समाना गांव के समीप बने बाबा पक्के पुल वाले के धाम पर हर वीरवार और रविवार को लोग माथा टेक कर मन्नत मांगते हैं। इस धाम की मान्यता के अनुसार जो भी पुलिस में भर्ती होना चाहता है वह सबसे पहले यहां पर माथा टेक कर खाकी वर्दी चढ़ाता है जिससे उसकी पुलिस की नौकरी की मन्नत पूरी हो जाती है।
इस धाम के गद्दीधारक प्रेम प्रजापति भगत ने बताया कि यह धाम करीब 200 साल से अधिक पुराना है जिसमें हजरत इलाही बख्श पीर बाबा की मजार है और इनके साथ सबल सिंह बावरी, केसरमल बावरी व मोहम्मद अली के थान बने हैं। उन्होंने बताया कि इस धाम का नाम पक्का पुल धाम इसलिए पड़ा क्योंकि 1540 से 1544 तक यहां बने पुल का निर्माण शेर शाह सूरी ने कराया था। यह धाम मुगल काल से बना हुआ है और पुल के निर्माण के बाद से इस धाम को पक्के पुल के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि हर रोज श्रद्धालु यहां पर माथा टेकने आते हैं, लेकिन वीरवार और रविवार को लाखों की संख्या में पूरे प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल व राजस्थान के श्रद्धालु यहां पर आते हैं। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति पुलिस में जाना चाहता है, बाबा सबल सिंह बावरी उनके सपने में खाकी बाने में आते हैं और वह व्यक्ति फिर बाबा को खाकी वर्दी चढ़ाकर जाता है। संवाद
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करनाल। ऊंचा समाना गांव के समीप बने बाबा पक्के पुल वाले के धाम पर हर वीरवार और रविवार को लोग माथा टेक कर मन्नत मांगते हैं। इस धाम की मान्यता के अनुसार जो भी पुलिस में भर्ती होना चाहता है वह सबसे पहले यहां पर माथा टेक कर खाकी वर्दी चढ़ाता है जिससे उसकी पुलिस की नौकरी की मन्नत पूरी हो जाती है।
इस धाम के गद्दीधारक प्रेम प्रजापति भगत ने बताया कि यह धाम करीब 200 साल से अधिक पुराना है जिसमें हजरत इलाही बख्श पीर बाबा की मजार है और इनके साथ सबल सिंह बावरी, केसरमल बावरी व मोहम्मद अली के थान बने हैं। उन्होंने बताया कि इस धाम का नाम पक्का पुल धाम इसलिए पड़ा क्योंकि 1540 से 1544 तक यहां बने पुल का निर्माण शेर शाह सूरी ने कराया था। यह धाम मुगल काल से बना हुआ है और पुल के निर्माण के बाद से इस धाम को पक्के पुल के नाम से जाना जाता है।
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उन्होंने बताया कि हर रोज श्रद्धालु यहां पर माथा टेकने आते हैं, लेकिन वीरवार और रविवार को लाखों की संख्या में पूरे प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल व राजस्थान के श्रद्धालु यहां पर आते हैं। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति पुलिस में जाना चाहता है, बाबा सबल सिंह बावरी उनके सपने में खाकी बाने में आते हैं और वह व्यक्ति फिर बाबा को खाकी वर्दी चढ़ाकर जाता है। संवाद
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