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Karnal News: शिशु मृत्यु दर कम करने में स्वास्थ्य महकमा सफल
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- वर्ष 2019 में 29 हजार के जन्म पर हुई थी 55 की मौत, वर्ष 2023 में आई गिरावट
अनुज शर्मा
करनाल। स्वास्थ्य विभाग साल दर साल शिशु मृत्यु दर पर कमी लाने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसको लेकर कई योजनाएं चलाकर शिशु मृत्यु पर काफी हद तक काबू पाया भी है। वहीं आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्ष 2019 में 55 नवजातों की मौत हुई थीं। उसके बाद से निरंतर इसमें कमी आई है। वर्ष 2023 की बात करें तो पिछले वर्ष 14 नवजातों की ही मौत हुईं। अब विभाग ने शून्य तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उप-सिविल सर्जन डॉ. सरोज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए हैं। जिनका असर जन्म व शिशु मृत्यु दर पर दिखाई दे रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नवजात शिशुओं के लिए टीकाकरण योजना भी शिशु मृत्यु दर को कम करने में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले प्रति माह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत प्रतिमाह एक शिविर आयोजित किया जाता था लेकिन वर्ष 2019 से प्रत्येक माह दो शिविर लगाए जाते हैं। जिसके तहत आयोजित शिविरों में गर्भवतियों की पूरी शारीरिक जांच की जाती है। जिसके बाद कुछ कमी होने पर तुरंत डॉक्टर गर्भवती को परामर्श देते हैं इसके अलावा पोषण भी दिए जाते है।
वहीं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग मिशन इंद्रधनुष भी पीछे नहीं है। इसके तहत जन्म से लेकर पांच वर्ष तक समयानुसार बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जाता है। जिससे पांच साल तक बच्चा किसी भी गंभीर बीमारी से दूर रह सकें। जन्म से पांच वर्ष मात्र सात बार टीकाकरण किया जाता है। जिसमें बच्चों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। - संवाद
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पांच सालों में नवजात के जन्म व मृत्यु पर नजर
वर्ष जन्म मौत
2019 29,100 55
2020 26,623 41
2021 27,857 39
2022 27,802 24
2023 21,354 14
यह डाटा स्वास्थ्य विभाग से लिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवतियों व नवजात शिशुओं के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिस कारण शिशु मृत्यु दर पर काफी हद तक काबू पाया गया है। अब विभाग की ओर से इस वर्ष शून्य तक का लक्ष्य रखा गया है। जिस ओर सभी स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर आशा कर्मियों व आंगनबाड़ी कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सके।
डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल
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अनुज शर्मा
करनाल। स्वास्थ्य विभाग साल दर साल शिशु मृत्यु दर पर कमी लाने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसको लेकर कई योजनाएं चलाकर शिशु मृत्यु पर काफी हद तक काबू पाया भी है। वहीं आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्ष 2019 में 55 नवजातों की मौत हुई थीं। उसके बाद से निरंतर इसमें कमी आई है। वर्ष 2023 की बात करें तो पिछले वर्ष 14 नवजातों की ही मौत हुईं। अब विभाग ने शून्य तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उप-सिविल सर्जन डॉ. सरोज ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए हैं। जिनका असर जन्म व शिशु मृत्यु दर पर दिखाई दे रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नवजात शिशुओं के लिए टीकाकरण योजना भी शिशु मृत्यु दर को कम करने में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले प्रति माह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत प्रतिमाह एक शिविर आयोजित किया जाता था लेकिन वर्ष 2019 से प्रत्येक माह दो शिविर लगाए जाते हैं। जिसके तहत आयोजित शिविरों में गर्भवतियों की पूरी शारीरिक जांच की जाती है। जिसके बाद कुछ कमी होने पर तुरंत डॉक्टर गर्भवती को परामर्श देते हैं इसके अलावा पोषण भी दिए जाते है।
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वहीं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग मिशन इंद्रधनुष भी पीछे नहीं है। इसके तहत जन्म से लेकर पांच वर्ष तक समयानुसार बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जाता है। जिससे पांच साल तक बच्चा किसी भी गंभीर बीमारी से दूर रह सकें। जन्म से पांच वर्ष मात्र सात बार टीकाकरण किया जाता है। जिसमें बच्चों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। - संवाद
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पांच सालों में नवजात के जन्म व मृत्यु पर नजर
वर्ष जन्म मौत
2019 29,100 55
2020 26,623 41
2021 27,857 39
2022 27,802 24
2023 21,354 14
यह डाटा स्वास्थ्य विभाग से लिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवतियों व नवजात शिशुओं के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिस कारण शिशु मृत्यु दर पर काफी हद तक काबू पाया गया है। अब विभाग की ओर से इस वर्ष शून्य तक का लक्ष्य रखा गया है। जिस ओर सभी स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर आशा कर्मियों व आंगनबाड़ी कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सके।
डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल