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Karnal News: परिवार से लड़कर कलमकार बनने का सपना किया पूरा

Fri, 22 Aug 2025 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 22 Aug 2025 02:15 AM IST
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He fought with his family and fulfilled his dream of becoming a writer
155....ममता प्रवीन - फोटो : samvad
- कविताएं, उपन्यास और कहानियां लिखकर समाज को नई दिशा दे रहीं महिलाओं ने बताई संघर्ष की कहानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले की कई महिला साहित्यकार अनेक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ समाज को अपनी लेखन कला के माध्यम से जागरूक करने का काम कर रही हैं। ये महिला साहित्यकार आज की पीढ़ी को अपनी रचनाओं से कई संदेश भी दे रहीं हैं। इनका कहना है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं, इसलिए अपने अंदर छिपे हुनर को पहचान कर सपनों को पूरा करें और समाज व युवाओं को सही दिशा लेखन के माध्यम से दिखाएं। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने परिवार से लड़कर अपने सपने पूरे किए।

बचपन में सामने आईं परिस्थितियों से मिली लिखने की प्रेरणा
ममता प्रवीन ने बताया कि उन्हें लिखने का बचपन से शौक था। अपने आस-पास कई परिस्थितियों को देखने से मन में कई सवाल उठा करते थे जिनके जवाब पाने के लिए लिखना शुरू किया। अपने जीवन की पहली पुस्तक मन की बात प्रकाशित की। जिसमें बचपन से लेकर जो भी परिस्थितियां समाज से देखी जिनके लिए समाज को जागरूक करना बेहद जरूरी लगा, तो पुस्तक और कविताएं लिखनी शुरू कीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बाल कहानियों पर लेखन कार्य चल रहा है जिसमें बच्चों के मन के भाव और उनकी बातें समाज तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने संदेश दिया कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं। इसलिए अपने अंदर छिपे हुनर को पहचान कर सपनों को पूरा करें।
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पिता और बहन से लिखने की कला को किया समाहित

डाॅ. अनीता अग्रवाल ने बताया कि वह 30 साल से लेखन कार्य कर रही हैं। परिवार में पिता और बहन से लिखने की कला समाहित हुई। बचपन से पिता को शौक के तौर पर लिखते हुए देखा जिससे लिखने की इच्छा जागृत हुई। आठ वर्ष की आयु से डायरी लिखनी शुरू की। इस दौरान स्कूल में भी अपने विचार साझा करना और लेखन के माध्यम से अपनी बात पहुंचाना शौक बनता गया। उन्होंने बताया कि हमेशा केवल परिस्थितियों से प्रेरित होकर कहानियों व कविताओं को लिखा। संदेश दिया की समाज में कई परिस्थितियां ऐसी हैं जिसके लिए समाज व लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है लेकिन सोशल मीडिया इस पर अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है।
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माता के निधन के बाद अकेलेपन से शुरू किया लिखना
डाॅ. वनीता चोपड़ा ने बताया कि बचपन से ही बहुत संघर्ष किया। वह अकेली लड़की रही जिन्होंने गांव से निकलकर शिक्षा प्राप्त की। परिवार से लड़कर अपने सपने पूरे किए। माता के निधन होने के बाद लिखने के शौक में तेजी आई। अकेलापन ने लिखने की कला को निखारा और कविताएं, उपन्यास और साहित्य लिखकर समाज को जागरूक करने का कार्य कर रही हूं। 2022 में करवट लेता वक्त, 2023 में हारा हुआ विजेता और पत्ते पर ठहरी ओस पुस्तकों को लिखा। उन्होंने बताया कि यदि समाज और युवाओं को सही दिशा देनी है तो जरूरी है कि लेखन के माध्यम से उन्हें सही रास्ता दिखाया जाए। वहीं महिलाएं अपने अंदर समाहित कला को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

155....ममता प्रवीन

155....ममता प्रवीन- फोटो : samvad

155....ममता प्रवीन

155....ममता प्रवीन- फोटो : samvad

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